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अभी तो है बाढ़ का ट्रेलर, अगस्त में प्रतिवर्ष कहर बरपाती है घाघरा
Updated Fri, 14 Jul 2017 11:18 PM IST
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बहराइच। घाघरा नदी का जलस्तर अस्थिर बना हुआ है। जिसके चलते कभी उफान की स्थिति बनती है तो कभी नदी शांत हो जाती है। हालांकि प्रथम चक्र की बाढ़ में ही बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। लगभग 20 हजार की आबादी प्रभावित हुई है। 250 से अधिक लोग बेघर हो गए हैं। कुछ ने अपना मकान उजाड़ा तो कुछ के मकान नदी में समाहित हो गए। बुजुर्गों की मानें तो यह बाढ़ का ट्रेलर है। अगस्त माह में प्रतिवर्ष नदी की लहरें कहर बरपाती हैं। फिर व्यवस्था संभालना मुश्किल हो जाता है।
मानसून की शुरुआत के साथ ही तराई में तीन दिन तक हुई मूसलधार वर्षा से घाघरा नदी उफान पर आ गई थी। इसका परिणाम यह हुआ कि महसी तहसील क्षेत्र के तटबंध के उस पार का निचला इलाका बाढ़ की चपेट में आ गया है। 20 गांव बाढ़ की चपेेट में आए। इनमें सिर्फ चार गांवों का बाढ़ का पानी नदी का जलस्तर कम होने के साथ ही खिसक गया। लेकिन अभी भी 16 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। हालांकि इन गांवों के अंदर बाढ़ का पानी नहीं घुसा है। लेकिन गांव बाढ़ से घिरे हुए हैं। इससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हैं। वहीं नदी की लहरों के कटान के चलते गोलागंज, चुरईपुरवा, कायमपुर, जरमापुर गांव के लोग आशियाने उजाड़ रहे हैं। वर्तमान बाढ़ में 2881 परिवार चपेट में हैं। लगभग 20 हजार की आबादी प्रभावित हुई है। वहीं अब तक 28 मकान, दो धर्मस्थल, तीन सड़कें और एक स्कूल नदी में समाहित हुआ है।
बुजुर्ग बोले यह तो है बानगी, अगस्त में बरपेगा कहर
कायमपुर निवासी रामहरख ने कहा कि बाबू अभी बाढ़ तो बानगी है। आठ-दस दिन रुके रहिए, फिर बाढ़ का प्रकोप देखना। जिंदगी और भी दुश्वार हो जाएगी। मंगरवल निवासी रामबहोरी ने कहा कि प्रतिवर्ष चार से पांच बार बाढ़ आती है। इस बार पहली बार की बाढ़ ही काफी कष्टदायी रही। घर छूट गया। सड़क पर डेरा डाले हुए हैं। कायमपुर निवासी सूरजलाल ने कहा कि पहले चरण के बाढ़ में यह हाल है। आगे जिंदगी बचेगी या नहीं पता नहीं।
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2014 में हुई थी 18 लोगों की मौत
वर्ष 2007 में घाघरा की लहरों ने जमकर तबाही मचायी थी। महसी, कैसरगंज और नानपारा आंशिक क्षेत्र की साढ़े तीन लाख की आबादी प्रभावित हुई थी। आदमपुर-रेवली और बेलहा-बेहरौली तटबंध तीन बार क्षतिग्रस्त हुआ था। 2007 की बाढ़ में आठ गांव नदी में समाहित हो गए थे। वहीं 2014 की बाढ़ ठीक 15 अगस्त के दिन आयी थी। तीन गांव रातोंरात बह गए थे। 18 लोगों की मौत हुई थी।
अभी नौ गांव बाढ़ की चपेट में
तहसील महसी के तीन, माझादरियाबुर्द, कायमपुर तथा बौण्डी के छह गांव बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित हैं। 1290 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है जिसमें 880 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि शामिल है। बचाव एवं राहत कार्य के लिए 04 बाढ़ चैकियां संचालित की गई हैं। साथ ही सात नावें भी लगायी गयी हैं। -संतोष कुमार राय, एडीएम
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मानसून की शुरुआत के साथ ही तराई में तीन दिन तक हुई मूसलधार वर्षा से घाघरा नदी उफान पर आ गई थी। इसका परिणाम यह हुआ कि महसी तहसील क्षेत्र के तटबंध के उस पार का निचला इलाका बाढ़ की चपेट में आ गया है। 20 गांव बाढ़ की चपेेट में आए। इनमें सिर्फ चार गांवों का बाढ़ का पानी नदी का जलस्तर कम होने के साथ ही खिसक गया। लेकिन अभी भी 16 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। हालांकि इन गांवों के अंदर बाढ़ का पानी नहीं घुसा है। लेकिन गांव बाढ़ से घिरे हुए हैं। इससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हैं। वहीं नदी की लहरों के कटान के चलते गोलागंज, चुरईपुरवा, कायमपुर, जरमापुर गांव के लोग आशियाने उजाड़ रहे हैं। वर्तमान बाढ़ में 2881 परिवार चपेट में हैं। लगभग 20 हजार की आबादी प्रभावित हुई है। वहीं अब तक 28 मकान, दो धर्मस्थल, तीन सड़कें और एक स्कूल नदी में समाहित हुआ है।
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बुजुर्ग बोले यह तो है बानगी, अगस्त में बरपेगा कहर
कायमपुर निवासी रामहरख ने कहा कि बाबू अभी बाढ़ तो बानगी है। आठ-दस दिन रुके रहिए, फिर बाढ़ का प्रकोप देखना। जिंदगी और भी दुश्वार हो जाएगी। मंगरवल निवासी रामबहोरी ने कहा कि प्रतिवर्ष चार से पांच बार बाढ़ आती है। इस बार पहली बार की बाढ़ ही काफी कष्टदायी रही। घर छूट गया। सड़क पर डेरा डाले हुए हैं। कायमपुर निवासी सूरजलाल ने कहा कि पहले चरण के बाढ़ में यह हाल है। आगे जिंदगी बचेगी या नहीं पता नहीं।
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2014 में हुई थी 18 लोगों की मौत
वर्ष 2007 में घाघरा की लहरों ने जमकर तबाही मचायी थी। महसी, कैसरगंज और नानपारा आंशिक क्षेत्र की साढ़े तीन लाख की आबादी प्रभावित हुई थी। आदमपुर-रेवली और बेलहा-बेहरौली तटबंध तीन बार क्षतिग्रस्त हुआ था। 2007 की बाढ़ में आठ गांव नदी में समाहित हो गए थे। वहीं 2014 की बाढ़ ठीक 15 अगस्त के दिन आयी थी। तीन गांव रातोंरात बह गए थे। 18 लोगों की मौत हुई थी।
अभी नौ गांव बाढ़ की चपेट में
तहसील महसी के तीन, माझादरियाबुर्द, कायमपुर तथा बौण्डी के छह गांव बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित हैं। 1290 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है जिसमें 880 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि शामिल है। बचाव एवं राहत कार्य के लिए 04 बाढ़ चैकियां संचालित की गई हैं। साथ ही सात नावें भी लगायी गयी हैं। -संतोष कुमार राय, एडीएम