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Bahraich News: वर्ष 2025 में 47 अपराधियों को सुनाई गई सजा
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बहराइच। दुराचारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए न्यायपालिका ने वर्ष 2025 में अपराधियों पर जमकर शिकंजा कसा। अभियोजन पक्ष की कड़ी पैरवी के चलते दुष्कर्म, हत्या और अपहरण जैसे जघन्य अपराधों के 47 मामलों में आरोपियों को दोषसिद्ध कर न्यायपालिका ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ऐसे अपराधियों को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है।
जिले में मासूमों के साथ बढ़ते अपराधों से आमजन में भय का माहौल था। अपराधी बहन-बेटियों और मासूमों के साथ दुराचार व हत्या जैसे जघन्य अपराध करने से बाज नहीं आ रहे थे। घटनाओं के बाद मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने से अपराधियों में कानून का भय भी कम होने लगा था। हालांकि वर्ष 2025 में विशेष न्यायाधीश पाक्सो की अदालत ने वर्ष के आरंभ में ही ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अपना इरादा साफ कर दिया।
अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के आधार पर जनवरी 2025 से अदालत ने लगातार सख्ती दिखाई। हालात यह रहे कि विशेष न्यायाधीश पाक्सो ने मासूमों के साथ दुष्कर्म, अपहरण और हत्या जैसे जघन्य अपराधों के मामलों में नौ आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास तथा दस आरोपियों को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। वहीं अपहरण और छेड़छाड़ जैसे मामलों में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 18 आरोपियों को 10 वर्ष तथा 10 आरोपियों को 10 वर्ष से कम अवधि के कारावास की सजा सुनाई गई।
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जनवरी से शुरू हुआ सजा का सिलसिला
विशेष न्यायाधीश पाक्सो की अदालत ने जनवरी माह में सात आरोपियों को सजा सुनाकर सख्ती का संकेत दे दिया था। इसके बाद मार्च में चार, अप्रैल में एक, मई में सात, जून में छह, जुलाई में सात, अगस्त में तीन, सितंबर में सात, अक्टूबर में दो, नवंबर में एक और दिसंबर में दो आरोपियों को सजा सुनाई गई।
विशेष लोक अभियोजक (पाक्सो) संतोष सिंह ने बताया कि 47 दोषसिद्ध आरोपियों में एक आरोपी ऐसा भी था, जिसने चार से सात वर्ष की उम्र की चार मासूम बच्चियों के साथ घिनौनी हरकत की थी। इस मामले में लगातार गवाहों और साक्ष्यों को डे-बाय-डे कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। परिणामस्वरूप मात्र छह माह के भीतर चारों मामलों में आरोपी को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाकर पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाया गया।
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जिले में मासूमों के साथ बढ़ते अपराधों से आमजन में भय का माहौल था। अपराधी बहन-बेटियों और मासूमों के साथ दुराचार व हत्या जैसे जघन्य अपराध करने से बाज नहीं आ रहे थे। घटनाओं के बाद मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने से अपराधियों में कानून का भय भी कम होने लगा था। हालांकि वर्ष 2025 में विशेष न्यायाधीश पाक्सो की अदालत ने वर्ष के आरंभ में ही ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अपना इरादा साफ कर दिया।
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अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के आधार पर जनवरी 2025 से अदालत ने लगातार सख्ती दिखाई। हालात यह रहे कि विशेष न्यायाधीश पाक्सो ने मासूमों के साथ दुष्कर्म, अपहरण और हत्या जैसे जघन्य अपराधों के मामलों में नौ आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास तथा दस आरोपियों को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। वहीं अपहरण और छेड़छाड़ जैसे मामलों में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 18 आरोपियों को 10 वर्ष तथा 10 आरोपियों को 10 वर्ष से कम अवधि के कारावास की सजा सुनाई गई।
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जनवरी से शुरू हुआ सजा का सिलसिला
विशेष न्यायाधीश पाक्सो की अदालत ने जनवरी माह में सात आरोपियों को सजा सुनाकर सख्ती का संकेत दे दिया था। इसके बाद मार्च में चार, अप्रैल में एक, मई में सात, जून में छह, जुलाई में सात, अगस्त में तीन, सितंबर में सात, अक्टूबर में दो, नवंबर में एक और दिसंबर में दो आरोपियों को सजा सुनाई गई।
विशेष लोक अभियोजक (पाक्सो) संतोष सिंह ने बताया कि 47 दोषसिद्ध आरोपियों में एक आरोपी ऐसा भी था, जिसने चार से सात वर्ष की उम्र की चार मासूम बच्चियों के साथ घिनौनी हरकत की थी। इस मामले में लगातार गवाहों और साक्ष्यों को डे-बाय-डे कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। परिणामस्वरूप मात्र छह माह के भीतर चारों मामलों में आरोपी को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाकर पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाया गया।