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घाघरा में छोड़ा 3.29 लाख क्यूसेक पानी

Tue, 08 Aug 2017 10:16 PM IST
बहराइच
बहराइच Updated Tue, 08 Aug 2017 10:16 PM IST
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3.29 lakh cusec water left in Ghaghra
महसी में बाढ़ के बाद पिपरा गांव में पानी से डूबे ग्रामीणों के मकान। - फोटो : अमर उजाला
नेपाल और तराई में हो रही बरसात के चलते घाघरा और सरयू नदियां मंगलवार को भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। वहीं घाघरा नदी में फिर 3.29 लाख से अधिक क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। उधर महसी और कैसरगंज तहसील क्षेत्र के गांवों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर बनी हुई है।
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पांच गांवों में 700 परिवार तीन दिनों से बाढ़ में फंसे हुए हैं। उन्हें प्रशासनिक राहत और सहायता नहीं मिल पा रही है। वहीं 111 गांवों में चार हजार लोग मंगलवार तक पलायन कर चुके हैं। कटान शुरू होने से अफरातफरी की स्थिति है। 
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नेपाल और तराई में हो रही वर्षा के चलते घाघरा और सरयू नदियों का पानी कम नहीं हो रहा है। केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघरा घाट के मापक सुशील शुक्ला ने बताया कि मंगलवार दोपहर में एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 के सापेक्ष 106.596 मीटर रिकॉर्ड हुआ।
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यह जलस्तर खतरे के निशान से 52 सेंटीमीटर अधिक है। उधर घाघरा नदी में फिर 3.29 लाख से अधिक क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। आपदा विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक गिरिजापुरी बैराज से घाघरा नदी में 115207 क्यूसेक, गोपिया बैराज से 318 क्यूसेक, शारदा बैराज से 135054 व बनबसा बैराज से 79368 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। ऐसे में आगामी 24 घंटे में पुन: नदी के जलस्तर में इजाफे के संकेत मिल रहे हैं। फिर बाढ़ की स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

वहीं महसी के घूरदेवी में भी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। हालात यह हैं कि अभी भी जलस्तर कम न होने से 111 गांवों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। वहीं महसी के रामदहिनपुरवा, फक्कड़पुरवा, कोनीपुरवा, जानकीनगर, पूरे प्रसाद गांवों में प्रशासनिक राहत व सहायता नहीं पहुंच सकी है।


इन गांवों में 700 लोग बाढ़ में फंसे हुए हैं। एक तरफ जहां बाढ़ का कहर है। वहीं दूसरी तरफ घाघरा के कटान से भी लोगों को जूझना पड़ रहा है। कोई छत तो कोई छप्परों पर शरण लिए हुए है। अब तक बाढ़ प्रभावित 111 गांवों के चार हजार लोग पलायन कर चुके हैं। लेकिन पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है। सभी खुले आसमान तले गुजर-बसर कर रहे हैं।
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