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कतर्नियाघाट में 29 इको विकास समितियां फिर होंगी सक्रिय
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बिछिया (बहराइच)। जंगल से लोगों की निर्भरता कम करने व रोजगारपरक योजनाओं से जोड़ने के लिए इको विकास समितियों का गठन किया गया था, लेकिन पंजीकरण रिनीवल न हो पाने के कारण समितियों के अस्तित्व पर सवाल उठने लगे थे। हालांकि अब कतर्नियाघाट में गठित 29 इको विकास समितियों को फिर से सक्रिय करने की कवायद वन विभाग ने शुरू कर दी है। जल्द ही इनका धरातल पर असर भी दिखाई देने लगेगा। इसके लिए 11 दिसंबर को बैठक बुलाई गई है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव के लोगों की जंगल के प्रति भागीदारी और वैकल्पिक संसाधनों के तहत आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए कतर्नियाघाट में 29 इको विकास समितियों का गठन किया गया था। समितियां विश्व बैंक की ओर से वित्त पोषित थीं। हालांकि इनका पंजीकरण नवीनीकरण न होने से संचालन बंद हो गया था। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने इन समितियों को फिर से सक्रिय करने का निर्देश दिया है। इस कार्य में तकनीकी सहयोग डब्ल्यूडब्ल्यूएफ करेगी। इसी के तहत शनिवार को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजनाधिकारी दबीर हसन की टीम ने इको विकास समिति बिशुनापुर में बैठक कर लोगों से उनके विचार जाने। लोगों से मिले सुझावों को टीम ने प्रभागीय वनाधिकारी यशवंत के साथ साझा किया।
प्रभागीय वनाधिकारी यशवंत ने बताया कि समितियों को फिर से सक्रिय करने से संबंधित ग्राम पंचायतों का सर्वे और बैठक कराने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति की बैठक 11 दिसंबर को बुलाई गई है, जिसमें लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। 16 दिसंबर को सभी इको विकास समितियों के अध्यक्ष व सचिवों की कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसके बाद ग्राम स्तर पर इनकी बैठक व योजनाओं से लोगों को जोड़ने की पहल शुरू कर दी जाएगी।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव के लोगों की जंगल के प्रति भागीदारी और वैकल्पिक संसाधनों के तहत आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए कतर्नियाघाट में 29 इको विकास समितियों का गठन किया गया था। समितियां विश्व बैंक की ओर से वित्त पोषित थीं। हालांकि इनका पंजीकरण नवीनीकरण न होने से संचालन बंद हो गया था। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने इन समितियों को फिर से सक्रिय करने का निर्देश दिया है। इस कार्य में तकनीकी सहयोग डब्ल्यूडब्ल्यूएफ करेगी। इसी के तहत शनिवार को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजनाधिकारी दबीर हसन की टीम ने इको विकास समिति बिशुनापुर में बैठक कर लोगों से उनके विचार जाने। लोगों से मिले सुझावों को टीम ने प्रभागीय वनाधिकारी यशवंत के साथ साझा किया।
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प्रभागीय वनाधिकारी यशवंत ने बताया कि समितियों को फिर से सक्रिय करने से संबंधित ग्राम पंचायतों का सर्वे और बैठक कराने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति की बैठक 11 दिसंबर को बुलाई गई है, जिसमें लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। 16 दिसंबर को सभी इको विकास समितियों के अध्यक्ष व सचिवों की कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसके बाद ग्राम स्तर पर इनकी बैठक व योजनाओं से लोगों को जोड़ने की पहल शुरू कर दी जाएगी।
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