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डूबकर दो कांवरियों की मौत
Updated Tue, 07 Aug 2018 12:33 AM IST
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नानपारा/नवाबगंज। कांवड़ियों का जत्था सुबह राप्ती नदी के लक्ष्मनपुर घाट पर जल भर रहा था। तभी एक कांवड़िया डूबने लगा। उसे बचाने में उसका साथी भी डूब गया। दोनों के शवों को नदी से निकाल लिया गया।
हादसे के बाद कांवड़िया भड़क उठे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने किसी तरह सभी को समझाकर शांत किया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिवारीजनों को सौंप दिए गए।
सावन माह के दूसरे सोमवार को लेकर सुबह से ही शिव भक्तों में काफी उत्साह था। परंपरा के तहत नवाबगंज से सैकड़ों कांवड़ियों का जत्था पांडवकालीन मंगलीनाथ मंदिर में जलाभिषेक के लिए जल लाने राप्ती नदी के लक्ष्मनपुर घाट रवाना हुआ।
जत्थे में नवाबगंज के नंदा गांव निवासी पंकज कुमार वर्मा (22) पुत्र लोकनाथ व हरिहरपुर हर्रैया नवाबगंज निवासी सुभाष (23) पुत्र रामकुमार भी शामिल थे। नदी के तट पर कांवड़ियों की भीड़ थी।
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जल भरते समय सुभाष का पैर फिसलने से वह गहरे पानी में चला गया। उसे बचाने में पंकज ने हाथ बढ़ाया तो वह भी अपने को संभाल नहीं सका। तट पर भीड़ होने के कारण लोगों की नजर काफी देर बाद दोनों पर पड़ी।
उन्हें बचाने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक दोनों डूब गए। पुलिसकर्मियों ने कांवड़ियों की मदद से 25 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों शवों को नदी से निकाला।
इस दौरान नदी के तट पर समुचित इंतजाम न होने की बात कहकर कांवड़िये भड़क उठे। उप जिलाधिकारी नानपारा सिद्धार्थ यादव, सीओ विजयप्रताप सिंह, प्रभारी पप्पू यादव ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाकर शांत किया। देर शाम दोनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
हादसे के बाद प्रशासन ने जगह-जगह रोक दी यात्रा
नवाबगंज में जल भरते समय दो कांवड़ियों की डूबकर हुई मौत की सूचना जैसे ही प्रशासन को मिली, जिले भर में नदी की ओर बढ़ रहे कांवड़ियों के जत्थों को रोक दिया गया।
रामगांव क्षेत्र में डेढ़ घंटे तक जत्था रुका रहा। यही स्थिति नानपारा, मिहींपुरवा इलाके में भी रही। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जत्थे को नदी के तट से जल भरवाया गया।
कांवड़ियों की मौत के मामले में पोस्टमार्टम का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद किसान दुर्घटना बीमा के तहत चार-चार लाख रुपये का मुआवजा मृतक आश्रितों को दिया जाएगा।
- सिद्धार्थ यादव, उप जिलाधिकारी
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हादसे के बाद कांवड़िया भड़क उठे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने किसी तरह सभी को समझाकर शांत किया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिवारीजनों को सौंप दिए गए।
सावन माह के दूसरे सोमवार को लेकर सुबह से ही शिव भक्तों में काफी उत्साह था। परंपरा के तहत नवाबगंज से सैकड़ों कांवड़ियों का जत्था पांडवकालीन मंगलीनाथ मंदिर में जलाभिषेक के लिए जल लाने राप्ती नदी के लक्ष्मनपुर घाट रवाना हुआ।
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जत्थे में नवाबगंज के नंदा गांव निवासी पंकज कुमार वर्मा (22) पुत्र लोकनाथ व हरिहरपुर हर्रैया नवाबगंज निवासी सुभाष (23) पुत्र रामकुमार भी शामिल थे। नदी के तट पर कांवड़ियों की भीड़ थी।
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जल भरते समय सुभाष का पैर फिसलने से वह गहरे पानी में चला गया। उसे बचाने में पंकज ने हाथ बढ़ाया तो वह भी अपने को संभाल नहीं सका। तट पर भीड़ होने के कारण लोगों की नजर काफी देर बाद दोनों पर पड़ी।
उन्हें बचाने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक दोनों डूब गए। पुलिसकर्मियों ने कांवड़ियों की मदद से 25 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों शवों को नदी से निकाला।
इस दौरान नदी के तट पर समुचित इंतजाम न होने की बात कहकर कांवड़िये भड़क उठे। उप जिलाधिकारी नानपारा सिद्धार्थ यादव, सीओ विजयप्रताप सिंह, प्रभारी पप्पू यादव ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाकर शांत किया। देर शाम दोनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
हादसे के बाद प्रशासन ने जगह-जगह रोक दी यात्रा
नवाबगंज में जल भरते समय दो कांवड़ियों की डूबकर हुई मौत की सूचना जैसे ही प्रशासन को मिली, जिले भर में नदी की ओर बढ़ रहे कांवड़ियों के जत्थों को रोक दिया गया।
रामगांव क्षेत्र में डेढ़ घंटे तक जत्था रुका रहा। यही स्थिति नानपारा, मिहींपुरवा इलाके में भी रही। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जत्थे को नदी के तट से जल भरवाया गया।
कांवड़ियों की मौत के मामले में पोस्टमार्टम का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद किसान दुर्घटना बीमा के तहत चार-चार लाख रुपये का मुआवजा मृतक आश्रितों को दिया जाएगा।
- सिद्धार्थ यादव, उप जिलाधिकारी