{"_id":"570fd9684f1c1bbb3b4a6abe","slug":"20-thousand-malnourished-children-are-being-treated-in-five","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुपोषित बच्चे 20 हजार, इलाज हो रहा पांच का","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुपोषित बच्चे 20 हजार, इलाज हो रहा पांच का
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Thu, 14 Apr 2016 11:24 PM IST
विज्ञापन
अतिकुपोषित बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुपोषित बच्चों को सुपोषित बनाने के लिए सरकार द्वारा जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में पोषण पुनर्वास केंद्र का निर्माण कराया गया है। लेकिन यहां महज पांच बच्चों का इलाज चल रहा है। जबकि जिले में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 20 हजार के आसपास है। आंगनबाड़ी व आशा कार्यकत्रियों की उदासीनता के कारण जिले के तमाम नौनिहाल अभी कुपोषण के चक्र से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग व बाल विकास विभाग के मुताबिक जिले में करीब 3 हजार छह सौ बच्चे कुपोषित हैं। जबकि 20 हजार बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी में है। सरकार ने कुपोषण से निपटने के लिए वर्ष 2015 में बहराइच को पोषण पुनर्वास केंद्र की सौगात दी। जिसे अमलीजामा पहनाने के लिए जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में केंद्र की स्थापना की गई।
केंद्र में दस बच्चों को भर्ती किए जाने की व्यवस्था है। यहां पौष्टिक भोजन के साथ बच्चों के लिए खेल-खिलौनों की भी व्यवस्था की गई है। इसके अलावा कुपोषण के खात्मे के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों ने दो-दो गांव गोद भी लिए हैं।
विज्ञापन
यहां वजन दिवस के दौरान कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों का निर्धारण किया गया। जिन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा गया। अभी तक केंद्र में मार्च 2015 से मार्च 2016 तक महज 113 बच्चों का इलाज हुआ है। जबकि वर्तमान में पांच बच्चे सुपोषित होने के लिए भर्ती हैं।
नहीं निभा रहीं दायित्व
आशा व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को जिला प्रशासन ने अति कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने की जिम्मेदारी सौंप रखी है। लेकिन जब किसी अधिकारी या नेता का दौरा होता है तो वार्ड फुल हो जाता है, अन्यथा शेष समय यहां सन्नाटा पसरा रहता है।
ये हैं केंद्र में भर्ती-
नाजिरपुरा मोहल्ला निवासी खदीजा (1)।
धरमनपुर गांव निवासी खुशबू (8 माह)।
कानूनगोपुरा मोहल्ला निवासी अबु बकर (9 माह)।
किशुनपुर गांव निवासी मोहित (1)।
माधवरेती मोहल्ला निवासी अमित (1)।
113 नौनिहाल कुपोषण के दायरे से हुए बाहर
पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती होने वाले मरीजों को पौष्टिक भोजन दिया जाता है। अब तक यहां से 113 बच्चे सुपोषित होकर घर गए हैं। समय-समय पर उनका फालोअप भी किया जाता है। वर्तमान में 5 बच्चे भर्ती हैं। इनमें तीन बच्चे तकरीबन कुपोषण के दायरे से बाहर आ चुके हैं।
-डॉ. ओपी पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग व बाल विकास विभाग के मुताबिक जिले में करीब 3 हजार छह सौ बच्चे कुपोषित हैं। जबकि 20 हजार बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी में है। सरकार ने कुपोषण से निपटने के लिए वर्ष 2015 में बहराइच को पोषण पुनर्वास केंद्र की सौगात दी। जिसे अमलीजामा पहनाने के लिए जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में केंद्र की स्थापना की गई।
विज्ञापन
केंद्र में दस बच्चों को भर्ती किए जाने की व्यवस्था है। यहां पौष्टिक भोजन के साथ बच्चों के लिए खेल-खिलौनों की भी व्यवस्था की गई है। इसके अलावा कुपोषण के खात्मे के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों ने दो-दो गांव गोद भी लिए हैं।
विज्ञापन
यहां वजन दिवस के दौरान कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों का निर्धारण किया गया। जिन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा गया। अभी तक केंद्र में मार्च 2015 से मार्च 2016 तक महज 113 बच्चों का इलाज हुआ है। जबकि वर्तमान में पांच बच्चे सुपोषित होने के लिए भर्ती हैं।
नहीं निभा रहीं दायित्व
आशा व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को जिला प्रशासन ने अति कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने की जिम्मेदारी सौंप रखी है। लेकिन जब किसी अधिकारी या नेता का दौरा होता है तो वार्ड फुल हो जाता है, अन्यथा शेष समय यहां सन्नाटा पसरा रहता है।
ये हैं केंद्र में भर्ती-
नाजिरपुरा मोहल्ला निवासी खदीजा (1)।
धरमनपुर गांव निवासी खुशबू (8 माह)।
कानूनगोपुरा मोहल्ला निवासी अबु बकर (9 माह)।
किशुनपुर गांव निवासी मोहित (1)।
माधवरेती मोहल्ला निवासी अमित (1)।
113 नौनिहाल कुपोषण के दायरे से हुए बाहर
पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती होने वाले मरीजों को पौष्टिक भोजन दिया जाता है। अब तक यहां से 113 बच्चे सुपोषित होकर घर गए हैं। समय-समय पर उनका फालोअप भी किया जाता है। वर्तमान में 5 बच्चे भर्ती हैं। इनमें तीन बच्चे तकरीबन कुपोषण के दायरे से बाहर आ चुके हैं।
-डॉ. ओपी पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक