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हाथियों ने रौंदी 22 बीघा गेहूं की फसल
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बिछिया (बहराइच)। नेपाल से आए हाथियों के झुंड ने गुरुवार रात को गेरुआपार के खेतों में जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने भवानीपुर और आसपास स्थित गेंहू के खेतों में पहुंचकर फसल को तहस नहस कर दिया।
लगभग 22 बीघा गेहूं की फसल बर्बाद हुई है। हाथी दो घंटे तक खेतों में जमे रहे। सूचना रेंज कार्यालय को दी गई है। लेकिन कोई भी वन कर्मी मौके पर नहीं पहुंचा है।
नेपाल के रायल बर्दिया नेशनल पार्क से आया 30 से अधिक हाथियों का झुंड बीते चार दिनों से क्षेत्र में उत्पात मचा रहा है। गुरुवार रात हाथियों का झुंड जंगल से सटे गेरुआपार के गांवों के निकट गेहूं के खेतों में पहुंच गया। हाथियों ने बैरीकेटिंग तोड़ दी।
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इसके बाद फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। खेतों में घुसे हाथी लगभग दो घंटे तक फसल को रौंदते रहे। हाथियों की चिंघाड़ सुनकर आसपास के ग्रामीणों ने ढोल और पीपा पीटना शुरू किया। मशाल भी जलाई। गनीमत यह रही कि हाथियों का झुंड रिहायशी इलाके की ओर नहीं आया।
गांव निवासी राजाराम, बदलू, दीनाननाथ आदि ने बताया कि कि हाथी अक्सर उत्पात मचाते हैं। सूचना रेंज कार्यालय पर दी जाती है। लेकिन कोई भी वनाधिकारी मौके पर नहीं पहुंचता। इसके चलते खेत से फसल खलिहान पहुंचने की नौबत नहीं है।
वहीं डीएफओ जीपी सिंह का कहना है कि हाथियों का मूवमेंट निरंतर गेरुआ से सटे इलाकों के आसपास रहता है। ग्रामीण सजग रहकर सुरक्षित रहें। हाथियों के द्वारा किए गए नुकसान का आकलन करवाया जाएगा।
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लगभग 22 बीघा गेहूं की फसल बर्बाद हुई है। हाथी दो घंटे तक खेतों में जमे रहे। सूचना रेंज कार्यालय को दी गई है। लेकिन कोई भी वन कर्मी मौके पर नहीं पहुंचा है।
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नेपाल के रायल बर्दिया नेशनल पार्क से आया 30 से अधिक हाथियों का झुंड बीते चार दिनों से क्षेत्र में उत्पात मचा रहा है। गुरुवार रात हाथियों का झुंड जंगल से सटे गेरुआपार के गांवों के निकट गेहूं के खेतों में पहुंच गया। हाथियों ने बैरीकेटिंग तोड़ दी।
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इसके बाद फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। खेतों में घुसे हाथी लगभग दो घंटे तक फसल को रौंदते रहे। हाथियों की चिंघाड़ सुनकर आसपास के ग्रामीणों ने ढोल और पीपा पीटना शुरू किया। मशाल भी जलाई। गनीमत यह रही कि हाथियों का झुंड रिहायशी इलाके की ओर नहीं आया।
गांव निवासी राजाराम, बदलू, दीनाननाथ आदि ने बताया कि कि हाथी अक्सर उत्पात मचाते हैं। सूचना रेंज कार्यालय पर दी जाती है। लेकिन कोई भी वनाधिकारी मौके पर नहीं पहुंचता। इसके चलते खेत से फसल खलिहान पहुंचने की नौबत नहीं है।
वहीं डीएफओ जीपी सिंह का कहना है कि हाथियों का मूवमेंट निरंतर गेरुआ से सटे इलाकों के आसपास रहता है। ग्रामीण सजग रहकर सुरक्षित रहें। हाथियों के द्वारा किए गए नुकसान का आकलन करवाया जाएगा।