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ईंट का जवाब पत्थर से देना पड़ेगा

Wed, 21 Sep 2016 12:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Wed, 21 Sep 2016 12:40 AM IST
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You will need to respond to the brick with stone
सेवानिवृत्त कैप्टन राज सिंह ढाका। - फोटो : amar ujala
बागपत। जम्मू-कश्मीर के उड़ी के आतंकी हमले में शहीद हुए 18 सैनिकों की शहादत से 90 साल के सेवानिवृत्त कैप्टन राज सिंह ढाका बेहद आहत हैं। तेरह साल तक इसी सेक्टर में देश सेवा करने वाले ढाका का कहना है कि उन्हें उड़ी की भौगोलिक स्थिति की पूरी जानकारी है। जवानों की मौत से वह आहत हैं और सेना की मदद करना चाहते हैं।
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ढिकौली गांव के राज सिंह ढाका वर्ष 1948 में सेना में भर्ती हुए थे। बत्तीस साल तक सेना में रहे। वर्ष 1962, 65 और वर्ष 1971 की लड़ाई लड़ीं। वर्ष 1965 में युद्ध के दौरान वह लाहौर तक गए। पाकिस्तान के खिलाफ जंग में जब वह घायल हुए तो अस्पताल में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उनसे मिलने के लिए पहुंची थी। 
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राज सिंह ढाका कहते हैं  उड़ी में पश्चिम और दक्षिण की दो पहाड़ी आजाद कश्मीर का हिस्सा है। वर्ष 1964 में वह वहां तैनात रहे। हाजी पीर से बहकर आने वाला नाला झेलम में गिरता है। इस नाले को भारतीय सेना कवर करके रखती है। यहां चौकस और चाबुक पिकेट तैनात रहती है। उन्होंने कहा भारतीय सेना को ईंट का जवाब पत्थर से देना होगा। समझाने से पाकिस्तान और आतंकवादी बाज आने वाले नहीं है।
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उन्हें और उनके दौर के सैनिकों को उड़ी सेक्टर की पूरी जानकारी है, सेना चाहे तो उनके अनुभव से मदद ले सकती है। सैनिकों की शहादत पर कैप्टन  ढाका बेहद दुखद है। उन्होंने कहा 18 जवानों पर कायरता पूर्ण तरीके से हमला किया गया।
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