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डौला के लाल को यश भारती
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Fri, 28 Oct 2016 12:56 AM IST
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जलपुरुष राजेंद्र सिंह।
- फोटो : amar ujala
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बागपत। नदियों को बचाने की मुहिम चलाने वाले डौला गांव के जल पुरुष राजेंद्र सिंह को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यश भारती से नवाजा। राजस्थान में चलाया गया उनका अभियान रिकॉर्ड है। पिछले दिनों वह जिले में भी हिंडन पुनर्जीवन यात्रा लेकर पहुंचे थे। उनके गांव के लोगों ने यश भारती देने पर खुशी जाहिर की।
बृहस्पतिवार को जिन 71 हस्तियों को यश भारती से नवाजा गया, इनमें राजेंद्र सिंह भी शामिल है। प्रकृति को बचाने के लिए उनके योगदान को देख यह अवार्ड दिया है। जिले के डौला गांव में छह अगस्त 1959 को जन्में राजेंद्र सिंह देशभर में वाटरमैन के नाम से ख्यातिलब्ध हैं। शिक्षक और परिवार की प्रेरणा से वह आगे बढ़े। राजस्थान के अलवर से नदियों को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया। उनका अधिकतर कार्यक्षेत्र राजस्थान ही रहा। उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों उन्होंने हिंडन पुनर्जीवन यात्रा निकाली। तरुण भारत के नाम से वह एनजीओ चलाते हैं।
गंगा सिर्फ चुनावी मुद्दा : राजेंद्र सिंह
बागपत। रमन मैग्सेसे अवार्ड विजेता और जल पुरुष के नाम से दुनियाभर में पहचाने जाने वाले राजेंद्र सिंह पहले ही कह चुके हैं कि गंगा को सिर्फ चुनावी मुद्दा बनाया गया है। केंद्र सरकार ने जो वायदा किया था, उस पर अब तक संतोषजनक कार्य शुरू नहीं हो पाया है। ऐसा लगता है जैसे सरकार गंगा की सफाई के कार्य को भूल गई है। यदि हिंडन को स्वच्छ बनाना है तो प्रदेश सरकार को सख्ती दिखानी होगी। सरकार जल के मामले में गंभीर नहीं है।
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ऐसे हैं राजेंद्र सिंह
बागपत के डौला गांव निवासी राजेंद्र सिंह को वर्ष 2001 में रमन मैग्सेसे अवार्ड से नवाजा गया। उन्होंने राजस्थान के अलवर में अरावली नदी के जीर्णोद्वार और गांव-गांव तालाबों में जल संचय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्हें स्टॉक होम अवार्ड, राष्ट्रपति अवार्ड भी मिल चुका है।
यश भारती में बागपत का डंका
यश भारती अवार्ड छठी बार बागपत के हिस्से में आया है। इससे पहले खेल और साहित्य के क्षेत्र में यह पुरस्कार बागपत को मिला चुका है। पहलवान सुनील राणा, अर्जुन अवार्डी शोकेंद्र तोमर, अंशु तोमर, भगत पहलवान, साहित्यकार एवं कवि बलवीर सिंह करुण को यह पुरस्कार मिल चुका है।
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बृहस्पतिवार को जिन 71 हस्तियों को यश भारती से नवाजा गया, इनमें राजेंद्र सिंह भी शामिल है। प्रकृति को बचाने के लिए उनके योगदान को देख यह अवार्ड दिया है। जिले के डौला गांव में छह अगस्त 1959 को जन्में राजेंद्र सिंह देशभर में वाटरमैन के नाम से ख्यातिलब्ध हैं। शिक्षक और परिवार की प्रेरणा से वह आगे बढ़े। राजस्थान के अलवर से नदियों को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया। उनका अधिकतर कार्यक्षेत्र राजस्थान ही रहा। उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों उन्होंने हिंडन पुनर्जीवन यात्रा निकाली। तरुण भारत के नाम से वह एनजीओ चलाते हैं।
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गंगा सिर्फ चुनावी मुद्दा : राजेंद्र सिंह
बागपत। रमन मैग्सेसे अवार्ड विजेता और जल पुरुष के नाम से दुनियाभर में पहचाने जाने वाले राजेंद्र सिंह पहले ही कह चुके हैं कि गंगा को सिर्फ चुनावी मुद्दा बनाया गया है। केंद्र सरकार ने जो वायदा किया था, उस पर अब तक संतोषजनक कार्य शुरू नहीं हो पाया है। ऐसा लगता है जैसे सरकार गंगा की सफाई के कार्य को भूल गई है। यदि हिंडन को स्वच्छ बनाना है तो प्रदेश सरकार को सख्ती दिखानी होगी। सरकार जल के मामले में गंभीर नहीं है।
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ऐसे हैं राजेंद्र सिंह
बागपत के डौला गांव निवासी राजेंद्र सिंह को वर्ष 2001 में रमन मैग्सेसे अवार्ड से नवाजा गया। उन्होंने राजस्थान के अलवर में अरावली नदी के जीर्णोद्वार और गांव-गांव तालाबों में जल संचय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्हें स्टॉक होम अवार्ड, राष्ट्रपति अवार्ड भी मिल चुका है।
यश भारती में बागपत का डंका
यश भारती अवार्ड छठी बार बागपत के हिस्से में आया है। इससे पहले खेल और साहित्य के क्षेत्र में यह पुरस्कार बागपत को मिला चुका है। पहलवान सुनील राणा, अर्जुन अवार्डी शोकेंद्र तोमर, अंशु तोमर, भगत पहलवान, साहित्यकार एवं कवि बलवीर सिंह करुण को यह पुरस्कार मिल चुका है।