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जुमे के दिन अल्लाह की इबादत करना अधिक सुन्नत

Mon, 25 Apr 2022 11:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 25 Apr 2022 11:39 PM IST
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Worshiping Allah on Jummah is more Sunnah
अग्रवाल मंडी टटीरी (सहारनपुर)। हाजी हाफिज वकील अहमद ने कहा कि जुमे का दिन और दिनों का सरदार होता है। जुमे के दिन साफ-सुथरे कपड़े पहनकर दूसरे दिनों से ज्यादा इबादत करना सुन्नत है। रमजान मुबारक माह में आखिरी जुमा को अलविदा जुमा कहा जाता है। अलविदा जुमे को बंदा और भी ज्यादा इबादत करता है जो बंदा रमजान मुबारक माह में रोजे नहीं रखता अलविदा जुमे को वह भी रोजा रखता है।
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अलविदा जुमा का कोई त्योहार नहीं होता परंतु बंदा जानता है कि रमजान मुबारक का यह आखिरी जुमा जिंदगी में पता नहीं दोबारा मिले या न मिले। इसलिए यह जुमा खास अहमियत रखता है। लोग इस जुमे पर सुबह से नमाज की तैयारी में लग जाते हैं। उन्होंने कहा कि 20 रोजों के बाद में फितरा अदा कर देना चाहिए। फितरा उन लोगों को देना चाहिए जो गरीब बेसहारा व यतीम हैं। फितरा की फजीलत यह है कि सबसे पहले अपने पड़ोस उसके बाद में रिश्तेदार को यह फितरा अदा करना चाहिए।जिससे गरीब व बेसहारा भी ईद की खुशी में शामिल हो सकें। फितरा ईद की नमाज से पूर्व पैदाइश बच्चे पर भी वाजिब है और ईद की नमाज से पूर्व अदा कर देना चाहिए। उन्होंने रमजान के रोजे रखकर अल्लाह से अपने गुनाह तौबा करनी चाहिए तथा कुराने-ए-पाक की तिलावत करने से बहुत अधिक सबाब मिलता है।
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