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होके मजबूर, तपती सड़कों पर निकले मजदूर
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यमुना की ओर से पैदल बागपत पहुंचे मैनपुरी व एटा और इलहाबाद के मजदूर
- फोटो : BAGHPAT
होके मजबूर, तपती सड़कों पर निकले मजदूर
बागपत। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत अन्य प्रदेशों से प्रवासियों के आने का सिलसिला जारी है। जिसे जो राह मिल रही है, उसी से मंजिल की तलाश है। तपती सड़कों पर मजबूर होकर मजदूर घरों की तरफ जा रहे हैं। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे, निवाड़ा, टांडा और नगर में यमुना के पक्का घाट के रास्ते प्रवासी जिले में पहुंचे। डीएम शकुंतला गौतम और एसपी प्रताप गोपेंद्र यादव ने बॉर्डर के क्षेत्रों का भ्रमण किया। निर्देश दिए कि कोई भी मजदूर पैदल न चलें। स्क्रीनिंग सेंटरों के जरिए बसों में रवाना किए जाएंगे। एआरएम (रोडवेज) योगेंद्र पाल सिंह ने बताया सोमवार को 44 बसों में 1710 प्रवासी मजदूरों को भेजा है।
रविवार की रात में यमुना के पक्का घाट से होते हुए 60 मजदूरों का काफिला बागपत पहुंचा। यहां से उन्हें सम्राट पृथ्वीराज चौहान डिग्री कॉलेज में बनाए स्क्रीनिंग सेंटर पर ले जाया गया। सोमवार को दिनभर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर मजदूरों के आने का सिलसिला जारी रहा। तपते एक्सप्रेस-वे पर मजबूर होकर मजदूर पैदल ही गुजरे। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को मुसीबत का सामना करना पड़ा। बागपत कोतवाली प्रभारी अरविंद कुमार ने बताया स्क्रीनिंग सेंटर के माध्यम से मजदूरों को उनके गंतव्य तक भेजा जा रहा है। पैदल चलने से रोका जा रहा है, ताकि गर्मी में परेशानी न हो जाए। छपरौली, बड़ौत समेत यमुना के किनारों वाले क्षेत्र में प्रवासी पैदल भी चल रहे हैं।
घर जाने में कर दी कौन सी खता, हम मुजरिम तो नहीं
बागपत। प्रवासी अपने घरों की तरफ बढ़े चले जा रहे हैं। सबके अपने दर्द हैं और सबकी अपनी मुसीबत। शामली के तेजपाल ने बताया वह 11 लोगों के साथ छत्तीसगढ़ गए थे। गुड़ बनाने का काम करते थे। कोल्हू ठेके पर लिया और काम चल रहा था, लेकिन कोरोना संक्रमण से लाखों रुपये भी डूब गए और उन्हें पैदल चलकर घर की तरफ आना पड़ा। मुंबई की फ्लोर मिल में काम करने वाले मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना निवासी नीटू का कहना है कि कोरोना का संक्रमण मुंबई में ज्यादा है। वह किसी तरह घर के लिए निकले हैं। रोहित का कहना है कि हर जगह उनकी तलाशी ली जा रही है। क्या अपने घर जाना भी गलत है। आखिर उन्होंने कौन सी खता की है।
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चाहिए घर जाने की इजाजत
बागपत। खुब्बीपुर निवाड़ा से कलक्ट्रेट पहुंचे श्रमिकों ने कहा वह अपने घर जाना चाहते हैं। 37 श्रमिक हरियाणा के टोहाना और अंबाला जाना चाहते हैं। डीएम शकुंतला गौतम से मिलने पहुंचे श्रमिकों का कहना है कि काम बंद हो गया है, जिस कारण वह बेहद परेशान हो गए हैं।
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बागपत। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत अन्य प्रदेशों से प्रवासियों के आने का सिलसिला जारी है। जिसे जो राह मिल रही है, उसी से मंजिल की तलाश है। तपती सड़कों पर मजबूर होकर मजदूर घरों की तरफ जा रहे हैं। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे, निवाड़ा, टांडा और नगर में यमुना के पक्का घाट के रास्ते प्रवासी जिले में पहुंचे। डीएम शकुंतला गौतम और एसपी प्रताप गोपेंद्र यादव ने बॉर्डर के क्षेत्रों का भ्रमण किया। निर्देश दिए कि कोई भी मजदूर पैदल न चलें। स्क्रीनिंग सेंटरों के जरिए बसों में रवाना किए जाएंगे। एआरएम (रोडवेज) योगेंद्र पाल सिंह ने बताया सोमवार को 44 बसों में 1710 प्रवासी मजदूरों को भेजा है।
रविवार की रात में यमुना के पक्का घाट से होते हुए 60 मजदूरों का काफिला बागपत पहुंचा। यहां से उन्हें सम्राट पृथ्वीराज चौहान डिग्री कॉलेज में बनाए स्क्रीनिंग सेंटर पर ले जाया गया। सोमवार को दिनभर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर मजदूरों के आने का सिलसिला जारी रहा। तपते एक्सप्रेस-वे पर मजबूर होकर मजदूर पैदल ही गुजरे। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को मुसीबत का सामना करना पड़ा। बागपत कोतवाली प्रभारी अरविंद कुमार ने बताया स्क्रीनिंग सेंटर के माध्यम से मजदूरों को उनके गंतव्य तक भेजा जा रहा है। पैदल चलने से रोका जा रहा है, ताकि गर्मी में परेशानी न हो जाए। छपरौली, बड़ौत समेत यमुना के किनारों वाले क्षेत्र में प्रवासी पैदल भी चल रहे हैं।
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घर जाने में कर दी कौन सी खता, हम मुजरिम तो नहीं
बागपत। प्रवासी अपने घरों की तरफ बढ़े चले जा रहे हैं। सबके अपने दर्द हैं और सबकी अपनी मुसीबत। शामली के तेजपाल ने बताया वह 11 लोगों के साथ छत्तीसगढ़ गए थे। गुड़ बनाने का काम करते थे। कोल्हू ठेके पर लिया और काम चल रहा था, लेकिन कोरोना संक्रमण से लाखों रुपये भी डूब गए और उन्हें पैदल चलकर घर की तरफ आना पड़ा। मुंबई की फ्लोर मिल में काम करने वाले मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना निवासी नीटू का कहना है कि कोरोना का संक्रमण मुंबई में ज्यादा है। वह किसी तरह घर के लिए निकले हैं। रोहित का कहना है कि हर जगह उनकी तलाशी ली जा रही है। क्या अपने घर जाना भी गलत है। आखिर उन्होंने कौन सी खता की है।
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चाहिए घर जाने की इजाजत
बागपत। खुब्बीपुर निवाड़ा से कलक्ट्रेट पहुंचे श्रमिकों ने कहा वह अपने घर जाना चाहते हैं। 37 श्रमिक हरियाणा के टोहाना और अंबाला जाना चाहते हैं। डीएम शकुंतला गौतम से मिलने पहुंचे श्रमिकों का कहना है कि काम बंद हो गया है, जिस कारण वह बेहद परेशान हो गए हैं।