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ये क्या, आईसीयू ही बंद
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Tue, 29 Sep 2015 01:14 AM IST
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बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के प्रमुख सचिव कुमार कमलेश ने सोमवार को जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रमुख सचिव को अस्पताल में कदम-कदम पर खामियां मिलीं।
अधिकारियों ने उन्हें बताया कि पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के चलते आईसीयू होने के बावजूद चालू नहीं है। उन्होंने स्टाफ से लेकर सीएमएस तक को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि अस्पताल में सफाई की व्यवस्था होनी चाहिए। मरीजों को अस्पताल में उपचार और पर्याप्त सुविधा मिले।
बाल विकास एवं पुष्टाहार के प्रमुख सचिव कुमार कमलेश सुबह करीब 8.30 बजे अस्पताल पहुुंच गए। अस्पताल परिसर में उन्हें ओपीडी की पर्ची बनवाने वालों की भीड़ लगी हुई मिली। उन्होंने कहा कि पर्ची के लिए एक खिड़की पर्याप्त नहीं है। तुरंत दूसरीे खिड़की चालू करने के निर्देश दिए।
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मरीजों और उनके साथ आए लोगों की सुविधा के लिए वाटर कूलर लगाए जाने के भी निर्देश दिए। उन्हें अस्पताल में गंदगी का अंबार लगा मिला। यहां तक सीएमएस बी.एस कुशवाहा के कक्ष में भी गंदगी मिली। इस पर उन्होंने सीएमएस को फटकार लगाते हुए सफाई कराने के निर्देश दिए। उन्होंने सीएमएस से पूछा कि अस्पताल की बिल्डिंग कब बनी। इस सवाल के जवाब में सीएमएस ने बताया कि वर्ष 2004 में बनी है।
पानी की टंकी के आसपास काफी गंदगी मिली। पूछा कि कितने दिन में टंकियों की सफाई की जाती है। इस पर जवाब मिला कि छह माह में एक बार। डीएम ने कहा कि टंकी की सफाई के लिए रविवार का दिन निर्धारित किया जाए। टंकियों की ब्लीचिंग आदि से अच्छी तरह से सफाई कराई जाए।
प्रमुख सचिव ने अस्पताल के कार्यों की समीक्षा की। संविदा पर कार्य कर रहे 35 कर्मियों के वेतन भुगतान के बारे में जानकारी की, तो बताया गया कि जुलाई तक का वेतन दिया जा चुका है। प्रमुख सचिव ने सर्जरी उपकरणों के बारे में जानकारी की। उन्हें बताया कि पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के चलते आईसीयू होने के बावजूद चालू नहीं है।
एक सौ बेड का अस्पताल होने के बाद भी 60 बेड ही है। प्रमुख सचिव ने कहा कि स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाय की डिमांड भेजे। आईसीयू को जल्द ही चालू कराया जाएगा।
दवाईयों की समीक्षा करते हुए प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि जिन दवाईयों की आवश्यकता है, उन्हें समाप्त होने से पहले ही आर्डर कर मांग लिया जाए। एंटी रैबिज और सांप काटने की दवाईयों की उपलब्धता रहनी चाहिए। एक दवाई नहीं मिलने पर उन्होंने सीएमएस को फटकार लगाई।
उन्होंने कहा कि मरीजों को कोई दवाई बाहर से खरीदनी न पड़े। निरीक्षण के दौरान उन्हें एनआरसी सेंटर में 10 बच्चे भर्ती मिले। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे को भगाया न जाए। किसी को भी बिना इलाज के न जाने दें। 14 दिन अवश्य भर्ती रखा जाए।
उन्होंने जननी सुरक्षा योजना की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत मिलने वाली सभी सुविधा मुहैय्या कराई जाए। उन्होंने हरचंदपुर की सलोनी और निबाली गांव की राजेंद्री के बच्चे को अस्पताल में खुद भर्ती करने के निर्देश दिए।
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अधिकारियों ने उन्हें बताया कि पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के चलते आईसीयू होने के बावजूद चालू नहीं है। उन्होंने स्टाफ से लेकर सीएमएस तक को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि अस्पताल में सफाई की व्यवस्था होनी चाहिए। मरीजों को अस्पताल में उपचार और पर्याप्त सुविधा मिले।
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बाल विकास एवं पुष्टाहार के प्रमुख सचिव कुमार कमलेश सुबह करीब 8.30 बजे अस्पताल पहुुंच गए। अस्पताल परिसर में उन्हें ओपीडी की पर्ची बनवाने वालों की भीड़ लगी हुई मिली। उन्होंने कहा कि पर्ची के लिए एक खिड़की पर्याप्त नहीं है। तुरंत दूसरीे खिड़की चालू करने के निर्देश दिए।
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मरीजों और उनके साथ आए लोगों की सुविधा के लिए वाटर कूलर लगाए जाने के भी निर्देश दिए। उन्हें अस्पताल में गंदगी का अंबार लगा मिला। यहां तक सीएमएस बी.एस कुशवाहा के कक्ष में भी गंदगी मिली। इस पर उन्होंने सीएमएस को फटकार लगाते हुए सफाई कराने के निर्देश दिए। उन्होंने सीएमएस से पूछा कि अस्पताल की बिल्डिंग कब बनी। इस सवाल के जवाब में सीएमएस ने बताया कि वर्ष 2004 में बनी है।
पानी की टंकी के आसपास काफी गंदगी मिली। पूछा कि कितने दिन में टंकियों की सफाई की जाती है। इस पर जवाब मिला कि छह माह में एक बार। डीएम ने कहा कि टंकी की सफाई के लिए रविवार का दिन निर्धारित किया जाए। टंकियों की ब्लीचिंग आदि से अच्छी तरह से सफाई कराई जाए।
प्रमुख सचिव ने अस्पताल के कार्यों की समीक्षा की। संविदा पर कार्य कर रहे 35 कर्मियों के वेतन भुगतान के बारे में जानकारी की, तो बताया गया कि जुलाई तक का वेतन दिया जा चुका है। प्रमुख सचिव ने सर्जरी उपकरणों के बारे में जानकारी की। उन्हें बताया कि पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के चलते आईसीयू होने के बावजूद चालू नहीं है।
एक सौ बेड का अस्पताल होने के बाद भी 60 बेड ही है। प्रमुख सचिव ने कहा कि स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाय की डिमांड भेजे। आईसीयू को जल्द ही चालू कराया जाएगा।
दवाईयों की समीक्षा करते हुए प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि जिन दवाईयों की आवश्यकता है, उन्हें समाप्त होने से पहले ही आर्डर कर मांग लिया जाए। एंटी रैबिज और सांप काटने की दवाईयों की उपलब्धता रहनी चाहिए। एक दवाई नहीं मिलने पर उन्होंने सीएमएस को फटकार लगाई।
उन्होंने कहा कि मरीजों को कोई दवाई बाहर से खरीदनी न पड़े। निरीक्षण के दौरान उन्हें एनआरसी सेंटर में 10 बच्चे भर्ती मिले। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे को भगाया न जाए। किसी को भी बिना इलाज के न जाने दें। 14 दिन अवश्य भर्ती रखा जाए।
उन्होंने जननी सुरक्षा योजना की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत मिलने वाली सभी सुविधा मुहैय्या कराई जाए। उन्होंने हरचंदपुर की सलोनी और निबाली गांव की राजेंद्री के बच्चे को अस्पताल में खुद भर्ती करने के निर्देश दिए।