लगातार मिल रही थीं धमकियां
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बागपत से सपा प्रत्याशी कुलदीप उज्ज्वल ने डीपीआरओ सर्वेश कुमार पांडेय के मोबाइल पर कॉल कर धमकाया था। मामले ने तूल पकड़ा तो कुलदीप को राज्य मद्य निषेध परिषद के चेयरमैन पद से हटा दिया गया। प्रभारी डीपीआरओ पर भी कार्रवाई के लिए उज्ज्वल पक्ष के लोग हंगामा कर रहे थे। उनके खिलाफ प्रदर्शन चल रहे हैं। जौनपुर से फोन पर हुई वार्ता में प्रभारी डीपीआरओ पांडेय ने कहा कि उन्हें फोन पर धमकियां मिल रही हैं।
वह बागपत में अकेले रहते हैं। उन्हें खतरे की आशंका थी। उनका कहना है कि जो भी हो रहा है, उसमें उनकी भूमिका नहीं है। उनकी तरफ से चिट्ठी और रिकॉर्डिंग वायरल नहीं की गई है। इससे पूर्व, डीपीआरओ खुद को असहज बताते हुए छुट्टी का प्रार्थना पत्र लेकर डीएम के पास पहुंचे थे। डीएम का कहना था कि जिले के गांवों की कार्ययोजना लटकी है। एक सप्ताह में कार्य पूरा किया जाना है।
इसके चलते उनकी छुट्टी स्वीकृत नहीं की जा सकती। इसके बाद वह शुक्रवार को दफ्तर नहीं जाकर अपने घर जौनपुर पहुंच गए। डीएम हृदय शंकर तिवारी का कहना है कि उनका छुट्टी प्रार्थना पत्र स्वीकृत नहीं किया गया। इसके बावजूद वह छुट्टी पर गए हैं तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
डीपीआरओ ने जताया था खतरा
प्रभारी जिला पंचायत राज अधिकारी सर्वेश कुमार पांडेय ने बृहस्पतिवार को डीएम को पत्र लिखा था। उनका कहना था कि उनके आसपास कुछ संदिग्ध लोग घूमते महसूस हो रहे हैं। प्रमुख सचिव, पंचायत राज निदेशक, डीएम और सीडीओ को पत्र की प्रति दी गई। खुद को खतरा बताते हुए जनपद से ट्रांसफर की मांग की गई थी। सीडीओ जेपी रस्तोगी ने बताया कि उन्हें पत्र की प्रति मिल गई है।
सीडीओ भी लिख चुके पत्र
स्वच्छता अभियान में शौचालय निर्माण एवं पंचायत विभाग के कईं महत्वपूर्ण कार्य अधर में होने के कारण डीपीआरओ से पहले भी जवाब मांगा जा चुका हैं। शौचालय का सत्यापन भी समय से नहीं हो पाया। पिछले दिनों सीडीओ जेपी रस्तोगी ने उनके खिलाफ शासन को पत्र लिखा था। सर्वेश कुमार पांडेय के पास प्रभारी डीपीआरओ का पद है। वित्तीय अधिकार का मामला भी कोर्ट में लंबित है।
डॉ. उज्ज्वल की बहाली के लिए धरना
बड़ौत। कुलदीप उज्ज्वल की दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री पद पर बहाली की मांग को लेकर बागपत विधानसभा क्षेत्र के लोग काफी संख्या में तहसील पहुंचे और धरने पर बैठ गए। बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा।
धरने पर बैठे लोगों का कहना था कि कुलदीप उज्ज्वल को 8 जून को भ्रष्ट अधिकारियों की शिकायत पर हटा दिया गया।
वे ईमानदारी से जनता की समस्याओं का समाधान कराते आ रहे हैं। अधिकारियों ने आम लोगों के उत्पीड़न और भ्रष्टाचार से रोके जाने पर झूठी शिकायत की। तहसीलदार राज बहादुर सिंह को सौंपे गए मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में मांग की गई है कि उज्ज्वल को ससम्मान बहाल कर दोषी अधिकारियों को हटाया जाए।
प्रदर्शन करने वालों में सलीम, कमलदीन, इमरान, साबिर अली, मोहम्मद, आबिर, मेहरबान, सब्बीरा, नाजम, शकील, फारुख, खुरशैद, अरशद, हाशिम, सुरेश, फरियाद, संजीव, शौकेंद्र राणा, संदीप, उमरदीन, राजकुमार, हरेंद्र आदि शामिल थे।
उज्ज्वल पर कार्रवाई की मांग
बागपत। ऑल इंडिया जमाते सलमानी के राष्ट्रीय सचिव सपा नेता शफीक सलमानी ने कहा कि कुलदीप उज्ज्वल का व्यवहार ठीक नहीं रहा। प्रशासनिक अधिकारियों से अभद्रता नहीं करनी चाहिए थी। सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए।