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Baghpat News: जमीन पर कब्जे के विरोध में सीएम आवास पर अनशन की चेतावनी
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-बामनौली के किसान ने दीपावली तक जमीन पर कब्जा नहीं मिलने पर दी अनशन की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
दोघट। बामनौली गांव के एक किसान को नसबंदी कराने पर मिली जमीन पर कब्जा हो गया है। इसके लिए किसान पिछले 46 साल से अफसरों के कार्यालयों पर चक्कर लगा रहा है। अब किसान ने दीपावली तक जमीन पर कब्जा नहीं मिलने पर सीएम आवास के बाहर अनशन करने की चेतावनी दी।
बामनौली गांव के रहने वाले महेशपाल ने मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में बताया कि उसके पिता रामपाल सिंह को वर्ष 1976 में नसबंदी कराने पर सरकार से एक बीघा 13 बिस्वा कृषि भूमि मिली थी। इसी तरह गांव के 12 लोगों को भी भूमि मिली थी। उनकी जमीन पर एक साल बाद ही कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया था। इसके बाद वर्ष 1983 में तत्कालीन ग्राम प्रधान ने उनकी हालत देखते हुए एक-एक बीघा कृषि भूमि आवंटित की थी। आरोप लगाया कि उस भूमि पर भी कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया। नसबंदी कराने पर मिली जमीन का 2004 तक न्यायालय में मुकदमा चला और उनके पक्ष में फैसला आया। चकबंदी प्रक्रिया शुरू होने पर जमीन मिलने की आस हुई तो उनकी जमीन के कुछ हिस्से पर दूसरे किसानों का कब्जा मिला और कुछ हिस्सा कृष्णा नदी में दर्शा दिया गया। इसके बाद उसने डीएम से लेकर सीएम तक गुहार लगाई, लेकिन जमीन नहीं मिल पाई। जमीन की लड़ाई लड़ते हुए उसके पिता की मौत हो चुकी है। किसान ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी जमीन नहीं दिलाई गई तो वह सीएम आवास के बाहर अनशन शुरू करेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
दोघट। बामनौली गांव के एक किसान को नसबंदी कराने पर मिली जमीन पर कब्जा हो गया है। इसके लिए किसान पिछले 46 साल से अफसरों के कार्यालयों पर चक्कर लगा रहा है। अब किसान ने दीपावली तक जमीन पर कब्जा नहीं मिलने पर सीएम आवास के बाहर अनशन करने की चेतावनी दी।
बामनौली गांव के रहने वाले महेशपाल ने मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में बताया कि उसके पिता रामपाल सिंह को वर्ष 1976 में नसबंदी कराने पर सरकार से एक बीघा 13 बिस्वा कृषि भूमि मिली थी। इसी तरह गांव के 12 लोगों को भी भूमि मिली थी। उनकी जमीन पर एक साल बाद ही कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया था। इसके बाद वर्ष 1983 में तत्कालीन ग्राम प्रधान ने उनकी हालत देखते हुए एक-एक बीघा कृषि भूमि आवंटित की थी। आरोप लगाया कि उस भूमि पर भी कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया। नसबंदी कराने पर मिली जमीन का 2004 तक न्यायालय में मुकदमा चला और उनके पक्ष में फैसला आया। चकबंदी प्रक्रिया शुरू होने पर जमीन मिलने की आस हुई तो उनकी जमीन के कुछ हिस्से पर दूसरे किसानों का कब्जा मिला और कुछ हिस्सा कृष्णा नदी में दर्शा दिया गया। इसके बाद उसने डीएम से लेकर सीएम तक गुहार लगाई, लेकिन जमीन नहीं मिल पाई। जमीन की लड़ाई लड़ते हुए उसके पिता की मौत हो चुकी है। किसान ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी जमीन नहीं दिलाई गई तो वह सीएम आवास के बाहर अनशन शुरू करेगा।
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