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तीर्थंकर महाराज ने त्यागा घर, आत्म साधना में हुए लीन
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बड़ौत में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव में पहुंचे श्रद्धालु।
- फोटो : BAGHPAT
तीर्थंकर महाराज ने त्यागा घर, आत्म साधना में हुए लीन
बड़ौत (बागपत)। धर्मसागर महाराज नसिया कमेटी के तत्वावधान और गुप्ति सागर महामुनिराज के पावन सानिध्य में नवनिर्मित 1008 मुनि सुव्रतनाथ जिन मंदिर के चल रहे पंचकल्याणक महामहोत्सव के चौथे दिन तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। तीर्थंकर महाराजा का वैराग्य और गृहत्याग का मंचन देख श्रद्धालु भावुक हो गए।
सर्वप्रथम पंडित हंसमुख शास्त्री के निर्देशन में सौधर्म इंद्र द्वारा श्रीजी का अभिषेक कर नित्य नियम पूजा अर्चना की गई। इसके पश्चात तीर्थंकर भगवान की बाल क्रीड़ा मनोहारी चित्रण और राज्य अभिषेक किया गया। दोपहर में तीर्थंकर महाराज का वैराग्य व गृहत्याग का मंचन किया गया। इसमें महाराजा एक दिन एक बलशाली हाथी को भूख से तड़पता देखते हैं। यह देखकर उनको पूर्व जन्म स्मरण हो जाता है और वह सोचते है कि इस संसार में दुख ही दुख भरा है। शरीर और आत्मा दोनों अलग है। उनके मन में वैराग्य आ जाता है और वह राजसी वस्त्र त्याग कर घर छोड़ देते हैं। दीक्षा लेकर वन में चले जाते हैं और आत्मसाधना में लीन हो जाते हैं। वैराग्य का मंचन देखकर श्रद्धालु भावुक हो गए। कार्यक्रम में सुखमाल चन्द जैन, अनिल, अजय, आनंद, अमित, अतुल, वीरेंद्र पिंटी, धनेंद्र, सिद्धार्थ, आदिश, नेहा, कृष्णा, पूनम, निधि, अल्पना सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे। मीडिया प्रभारी आदिश जैन का सहयोग रहा।
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बड़ौत (बागपत)। धर्मसागर महाराज नसिया कमेटी के तत्वावधान और गुप्ति सागर महामुनिराज के पावन सानिध्य में नवनिर्मित 1008 मुनि सुव्रतनाथ जिन मंदिर के चल रहे पंचकल्याणक महामहोत्सव के चौथे दिन तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। तीर्थंकर महाराजा का वैराग्य और गृहत्याग का मंचन देख श्रद्धालु भावुक हो गए।
सर्वप्रथम पंडित हंसमुख शास्त्री के निर्देशन में सौधर्म इंद्र द्वारा श्रीजी का अभिषेक कर नित्य नियम पूजा अर्चना की गई। इसके पश्चात तीर्थंकर भगवान की बाल क्रीड़ा मनोहारी चित्रण और राज्य अभिषेक किया गया। दोपहर में तीर्थंकर महाराज का वैराग्य व गृहत्याग का मंचन किया गया। इसमें महाराजा एक दिन एक बलशाली हाथी को भूख से तड़पता देखते हैं। यह देखकर उनको पूर्व जन्म स्मरण हो जाता है और वह सोचते है कि इस संसार में दुख ही दुख भरा है। शरीर और आत्मा दोनों अलग है। उनके मन में वैराग्य आ जाता है और वह राजसी वस्त्र त्याग कर घर छोड़ देते हैं। दीक्षा लेकर वन में चले जाते हैं और आत्मसाधना में लीन हो जाते हैं। वैराग्य का मंचन देखकर श्रद्धालु भावुक हो गए। कार्यक्रम में सुखमाल चन्द जैन, अनिल, अजय, आनंद, अमित, अतुल, वीरेंद्र पिंटी, धनेंद्र, सिद्धार्थ, आदिश, नेहा, कृष्णा, पूनम, निधि, अल्पना सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे। मीडिया प्रभारी आदिश जैन का सहयोग रहा।
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