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बागपत के वीरों में हिला दी थी अंग्रेजी हुकूमत की जड़े

Sat, 15 Aug 2020 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 15 Aug 2020 12:18 AM IST
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The warriors of Baghpat shook the roots of English rule
74वे स्वतंत्रता दिवस पर विशेष
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आजादी की लड़ाई में बाबा शाहमल और बावली गांव के वीरों का भी योगदान अविस्मरणीय
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। देश को आजादी दिलाने मेें बिजरौल गांव के बाबा शाहमल और बावली गांव के वीरों का योगदान सराहनीय है। जहां 1857 की क्रांति में अंग्रेजी हुकूमत की जड़े हिलाने वाले शहीद बाबा शाहमल की बहादुरी के किस्से आज भी लोगों की जबान पर है, वहीं बावली गांव के वीरों ने आजादी की लड़ाई में दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए थे।
10 मई 1857 को मेरठ से शुरू हुई क्रांति की आग बागपत और बड़ौत क्षेत्र में भी फैली थी। बागपत के बिजरौल गांव के रहने वाले क्रांतिकारी बाबा शाहमल के नेतृत्व में हजारों किसानों ने बड़ौत तहसील पर हमला बोलकर सरकारी खजाना लूट लिया था। भारत में क्रांतिकारियों की अगुवाई करने वाले अंतिम मुगल शासक बहादुर शाह जफर ने दिल्ली दरबार से शाहमल को बड़ौत क्षेत्र का सूबेदार नियुक्त किया। उन्होंने अंग्रेजों को रसद पहुंचाने के लिए प्रयोग किया जाने वाला बागपत में यमुना किनारे बना नाव का पुल बारूद से उड़ा दिया गया। कई बार अंग्रेजी हुकूमत के दांत खट्टे करने वाले बाबा शाहमल पर 18 जुलाई 1857 में बड़का गांव के जंगल में हमला बोल दिया। एटोनॉकी नामक फ्रांसीसी सैनिक के हमले में बाबा शहीद हो गए थे।
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बावली के वीरों पर ग्रामीणों को नाज
बड़ौत। बावली गांव के स्वतंत्रता सेनानी हरिपाल का हाल ही मेें निधन हो गया है। उन्होंने आजाद हिंद फौज में रहते हुए सन 1944-1945 के बीच हुई आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के छक्के उड़ा दिए थे। दूसरे स्वतंत्रता सेनानी 107 वर्ष के हो चुके इलम सिंह ने वर्ष 1941-1942 में 25 दिनों तक सिंगापुर मेें भूखे-प्यासे रहकर देश को आजादी दिलाने में सराहनीय भूमिका निभाई थी।
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अशोक चक्र विजेता भी है इस गांव में
बड़ौत। बावली गांव की एक विशेषता यह भी है कि यहां पर अशोक चक्र विजेता भी है। गांव के बिजेन्द्रपाल सिंह तोमर ने 18 दिसंबर 1961 के गोवा आपरेशन में अहम योगदान दिया था और देश को पुर्तगालियों से आजाद कराया था।
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