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Baghpat News: औरंगजेब के निशाने पर रहा था बालैनी का वाल्मीकि मंदिर
Mon, 21 Apr 2025 12:07 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Mon, 21 Apr 2025 12:07 AM IST
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औरंगजेब के निशाने पर रहा था बालैनी का वाल्मीकि मंदिर की खबर से संबंधित फोटो। बालैनी स्थित वाल
बागपत। औरंगजेब को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है। इससे महर्षि वाल्मीकि मंदिर बालैनी भी चर्चा में आ गया। यह मंदिर भी औरंगजेब के निशाने पर रहा था। न केवल औरंगजेब, बल्कि बाद में अंग्रेज अफसर ने यहां कहर बरपाया था। इसके बावजूद यह मंदिर आबाद है।
बालैनी में मेरठ-बागपत नेशनल हाईवे से कुछ दूरी पर हिंडन नदी किनारे महर्षि वाल्मीकि मंदिर आस्था के साथ ही संस्कृति तथा इतिहास का संगम है। मान्यता है कि महर्षि वाल्मीकि ने आश्रम स्थापित कर तपस्या की थी। वर्ष 1987 में मंदिर परिसर को समतल कराते समय खोदाई में चांदी के छह सिक्के तथा तीन टांग वाली प्रतिमा समेत अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा निकली थी।
इसके अलावा नौ इंच चौड़ी एवं 12 इंच लंबी सात से 10 किलों वजन की चपटी ईंटें भी निकली थी। मंदिर में लव कुश जन्म स्थली, सीता मैया का समाधि स्थल, पंचमुखी महादेव मंदिर, राधा-कृष्ण जी का मंदिर, वैष्णो देवी मंदिर, शनि मंदिर तथा यज्ञशाला है।
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मंदिर प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष विनोद कुमार ने बताया कि औरंगजेब के शासनकाल में धार्मिक स्थलों पर अत्याचार हुआ तो उसके निशाने पर बालैनी का मंदिर भी आया। तब इस इसको मिटाने का प्रयास किया गया, मगर तब लोगों के विरोध पर वापस लौटना पड़ा।
इस बारे में बुजुर्गों से सुना था और मंदिर की लव-कुश पुस्तिका में इसका उल्लेख किया गया है। मंदिर के लंबे समय तक मुख्य पुजारी रहे स्व. लक्ष्य देवानंद जी महाराज भी औरंगजेब के अत्याचार की बात बताते थे।
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बालैनी में मेरठ-बागपत नेशनल हाईवे से कुछ दूरी पर हिंडन नदी किनारे महर्षि वाल्मीकि मंदिर आस्था के साथ ही संस्कृति तथा इतिहास का संगम है। मान्यता है कि महर्षि वाल्मीकि ने आश्रम स्थापित कर तपस्या की थी। वर्ष 1987 में मंदिर परिसर को समतल कराते समय खोदाई में चांदी के छह सिक्के तथा तीन टांग वाली प्रतिमा समेत अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा निकली थी।
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इसके अलावा नौ इंच चौड़ी एवं 12 इंच लंबी सात से 10 किलों वजन की चपटी ईंटें भी निकली थी। मंदिर में लव कुश जन्म स्थली, सीता मैया का समाधि स्थल, पंचमुखी महादेव मंदिर, राधा-कृष्ण जी का मंदिर, वैष्णो देवी मंदिर, शनि मंदिर तथा यज्ञशाला है।
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मंदिर प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष विनोद कुमार ने बताया कि औरंगजेब के शासनकाल में धार्मिक स्थलों पर अत्याचार हुआ तो उसके निशाने पर बालैनी का मंदिर भी आया। तब इस इसको मिटाने का प्रयास किया गया, मगर तब लोगों के विरोध पर वापस लौटना पड़ा।
इस बारे में बुजुर्गों से सुना था और मंदिर की लव-कुश पुस्तिका में इसका उल्लेख किया गया है। मंदिर के लंबे समय तक मुख्य पुजारी रहे स्व. लक्ष्य देवानंद जी महाराज भी औरंगजेब के अत्याचार की बात बताते थे।