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संतो के आगमन से दिव्य हो गया आयोजन: डॉ गुणप्रकाश
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अमीनगर सराय में साधु संतो का तिलक करते श्रद्घालु
- फोटो : BAGHPAT
अमीनगर सराय। कस्बे में चल रहे नौ दिवसीय आयुर्त महाचंडी महायज्ञ के पांचवें दिन बुधवार को आचार्य ने यजमानों को मां भगवती के पांचवें स्वरूप की आराधना कराई। इसके बाद मंगल आरती की गई। कथा व्यास स्वामी त्रयंबकेश्वर महाराज ने प्रवचन किया। ब्रह्मचारी स्वेदश महाराज ने भारत वर्ष के अलग-अलग हिस्सों से आए संतों का परिचय सम्मेलन कराया। शाम को रंग- बिरंगी रोशनी में अलौकिक यज्ञशाला के समक्ष काशी आरती का भव्य आयोजन किया गया। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने आरती का श्रवण कर पुण्य लाभ कमाया।
दैवीय चैत्र नवरात्रि में चल रहे आयुर्त महाचंडी महायज्ञ के पांचवें दिन आचार्य श्री दिवाकर वश्ष्ठि ने सभी दैवीय यजमानों को भगवती के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा अर्चना कराकर शतचंडी पाठ कराया। मंगल आरती कर प्रसाद वितरित किया। उसके बाद 100 कुंडीय महायज्ञ में आचार्यों ने आहुतियां दीं। ब्रह्मचारी स्वेदश महाराज ने संतों का परिचय सम्मेलन कराया। कार्यक्रम में स्वामी प्रबोधाश्रम महाराज (गंगा तट शुक्रताल व बिहारघाट), नरसिंह भारती (श्रंगेरी मठ कर्नाटक), ध्रुवानंद तीर्थ महाराज ( भानुपुरापीठ म प्र), निर्मलस्वरूप जी महाराज (जम्मू कश्मीर),निर्मल चैतन्य पुरी महाराज (नर्मदा खंड), बृजेश चैतन्य महाराज (राजघाट बुलंदशहर), प्रणवानंद चैतन्य महाराज (जगनाथपुरी), शूलपाणी महाराज (गंगा तट), आचार्य हरिओम गुरु जी (नरवराश्रम),,आचार्य दिवाकर वशिष्ठ (नरवराश्रम), अजेश स्वरूप महाराज (बद्रीकाश्रम हिमालय), आचार्य विनीत अवस्थी, यज्ञ प्रभारी स्वदेश ब्रह्मचारी (प्रबन्धक श्री विष्णु दंडी आश्रम संस्थान बिहारघाट बुलंदशहर), वेदमूर्ति पवन ( प्रयागराज ) ने धर्मसभा को संबोधित किया। सायंकाल भव्य रंग-बिरंगी अलौकिक रोशनी से नहाए यज्ञस्थल के सम्मुख भव्य काशी आरती हुई।
शक्ति की सहनशीलता पर प्रकाश डाला
त्रयंबकेश्वर महाराज ने प्रवचन कहा कि मां जगतजननी का स्वरूप जितना सरल है उतना ही विकराल भी है। जगतजननी दुष्टों को अर्चना करने पर वरदान दे देती हैं। वहीं, धर्म की स्थापना के लिए पापियों का संहार भी करती हैं। सच्चे मन से पूजा करने पर भगवती मनोवांछित फल प्रदान करने वाली हैं। नवरात्र में ही नहीं मां का हर पल स्मरण करने से मुश्किलें सदैव के लिए दूर हो जाती हैं।
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दैवीय चैत्र नवरात्रि में चल रहे आयुर्त महाचंडी महायज्ञ के पांचवें दिन आचार्य श्री दिवाकर वश्ष्ठि ने सभी दैवीय यजमानों को भगवती के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा अर्चना कराकर शतचंडी पाठ कराया। मंगल आरती कर प्रसाद वितरित किया। उसके बाद 100 कुंडीय महायज्ञ में आचार्यों ने आहुतियां दीं। ब्रह्मचारी स्वेदश महाराज ने संतों का परिचय सम्मेलन कराया। कार्यक्रम में स्वामी प्रबोधाश्रम महाराज (गंगा तट शुक्रताल व बिहारघाट), नरसिंह भारती (श्रंगेरी मठ कर्नाटक), ध्रुवानंद तीर्थ महाराज ( भानुपुरापीठ म प्र), निर्मलस्वरूप जी महाराज (जम्मू कश्मीर),निर्मल चैतन्य पुरी महाराज (नर्मदा खंड), बृजेश चैतन्य महाराज (राजघाट बुलंदशहर), प्रणवानंद चैतन्य महाराज (जगनाथपुरी), शूलपाणी महाराज (गंगा तट), आचार्य हरिओम गुरु जी (नरवराश्रम),,आचार्य दिवाकर वशिष्ठ (नरवराश्रम), अजेश स्वरूप महाराज (बद्रीकाश्रम हिमालय), आचार्य विनीत अवस्थी, यज्ञ प्रभारी स्वदेश ब्रह्मचारी (प्रबन्धक श्री विष्णु दंडी आश्रम संस्थान बिहारघाट बुलंदशहर), वेदमूर्ति पवन ( प्रयागराज ) ने धर्मसभा को संबोधित किया। सायंकाल भव्य रंग-बिरंगी अलौकिक रोशनी से नहाए यज्ञस्थल के सम्मुख भव्य काशी आरती हुई।
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शक्ति की सहनशीलता पर प्रकाश डाला
त्रयंबकेश्वर महाराज ने प्रवचन कहा कि मां जगतजननी का स्वरूप जितना सरल है उतना ही विकराल भी है। जगतजननी दुष्टों को अर्चना करने पर वरदान दे देती हैं। वहीं, धर्म की स्थापना के लिए पापियों का संहार भी करती हैं। सच्चे मन से पूजा करने पर भगवती मनोवांछित फल प्रदान करने वाली हैं। नवरात्र में ही नहीं मां का हर पल स्मरण करने से मुश्किलें सदैव के लिए दूर हो जाती हैं।

अमीनगर सराय में चल रहे यज्ञशाला में आहुतियां देते आचार्य- फोटो : BAGHPAT
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