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जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को ड्पि निकालकर बाहर बैंच पर बैठाया
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जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को ड्रिप निकालकर बाहर बेंच पर बैठाया
बागपत। बुखार ने जहां कहर बरपाया हुआ है और अस्पतालों में बेड तक खाली नहीं है। वहीं ऐसे हालात में जिला अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। वहां मरीजों के उपचार से जरूरी बेड पर पेंट कराना समझा गया और मरीजों को ड्रिप निकालकर बाहर बैठा दिया। इसके बाद घंटों तक बेड पर कर्मचारी पेंट करते रहे और जिन मरीजों से बैठा नहीं गया, उनके परिजन उन्हें अपने साथ घर लेकर चले गए। इस तरह से मरीजों के उपचार में बड़ी लापरवाही सामने आई है।
बुखार ने खूब कहर बरपाया हुआ है और अस्पताल में सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। जिनकी हालत खराब होती है, उनको जिला अस्पताल के जनरल वार्ड में भर्ती किया जाता है। ताकि उनके उपचार में कोई परेशानी नहीं हो और वह डॉक्टर की देखरेख में रहे। इस तरह ही मंगलवार को जनरल वार्ड में बुखार के करीब दस मरीज भर्ती थे और इनमें ऐसे मरीज भी शामिल थे जो बुखार में हालत ज्यादा खराब होने से चक्कर आने के कारण बैठ भी नहीं सकते थे। इसके बाद भी जनरल वार्ड में बेड पर पेंट करने के लिए उन मरीजों की ड्रिप निकालकर सुईं लगी छोड़ दी गई और उनको उठाकर बाहर बैठा दिया। इससे कोई मरीज बाहर बैंच पर बैठ गया तो कोई सीढ़ी में बैठा रहा। इनमें से कुछ को बैठा नहीं गया और उन्हें चक्का आने लगे तो परिजन उन्हें परेशान होकर घर लेकर चले गए। इस तरह से बेड पर पेंट कराना मरीजों के उपचार से ज्यादा जरूरी समझा गया और इस तरह की बड़ी लापरवाही मंगलवार को कई घंटे तक जिला अस्पताल में की गई है।
मुझसे बैठा नहीं जा रहा, फिर भी बैठा दिया
सुन्हैड़ा गांव की बाला ने बताया कि उनको बुखार था और एक सप्ताह से बीमार होने के कारण अस्पताल में भर्ती कराई गई थी। बुजुर्ग होने के साथ ही बुखार से पीड़ित होने के कारण काफी परेशान थी और उनको उसके बाद भी बाहर बैठा गया गया।
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मुझे चक्कर आने लगे तो परिजन घर लेकर जा रहे
निवाड़ा की नसरीन ने बताया उनको बुखार के कारण चक्कर आ रहे थे और इसके बाद भी बेड से उठाकर बाहर भेज दिया। उनको जगह नहीं मिली तो वह सीढ़ी में बैठ गई, लेकिन चक्कर आने के कारण परिजनों के साथ घर चली गई।
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कैदी को भी बेड से उठाकर बाहर बैठाया
दोझा गांव का कैदी सुलेमान भी बुखार से हालत खराब होने के कारण चार दिन से अस्पताल में भर्ती था। उन्हें भी उठाकर बाहर बैठा दिया गया तो पुलिस कर्मी उन्हें बैंच पर लेकर काफी देर तक बैठे रहे।
जब बैठा नहीं गया तो परिजन घर लेकर चले गए
बागपत के पुराने कस्बे की फुरकाना को बैठा नहीं जा रहा था। चक्का आ रहे थे तो परिवार वाले लेकर चले गए। उन्हें भी कई दिन से बुखार था और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन बेड पर पेंट करने के लिए बाहर भेज दिया गया।
इस तरह से बेड पर पेंट करने के लिए मरीजों को उठाकर बाहर बैठाना गलत है, अगर पेंट कराना जरूरी था तो उनको किसी दूसरे बेड पर शिफ्ट किया जाना चाहिए था या चारपाई पर लेटाना चाहिए था। इसकी जांच कराई जाएगी और उसके आधार पर कार्रवाई होगी। डॉ. दिनेश कुमार, सीएमओ
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बागपत। बुखार ने जहां कहर बरपाया हुआ है और अस्पतालों में बेड तक खाली नहीं है। वहीं ऐसे हालात में जिला अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। वहां मरीजों के उपचार से जरूरी बेड पर पेंट कराना समझा गया और मरीजों को ड्रिप निकालकर बाहर बैठा दिया। इसके बाद घंटों तक बेड पर कर्मचारी पेंट करते रहे और जिन मरीजों से बैठा नहीं गया, उनके परिजन उन्हें अपने साथ घर लेकर चले गए। इस तरह से मरीजों के उपचार में बड़ी लापरवाही सामने आई है।
बुखार ने खूब कहर बरपाया हुआ है और अस्पताल में सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। जिनकी हालत खराब होती है, उनको जिला अस्पताल के जनरल वार्ड में भर्ती किया जाता है। ताकि उनके उपचार में कोई परेशानी नहीं हो और वह डॉक्टर की देखरेख में रहे। इस तरह ही मंगलवार को जनरल वार्ड में बुखार के करीब दस मरीज भर्ती थे और इनमें ऐसे मरीज भी शामिल थे जो बुखार में हालत ज्यादा खराब होने से चक्कर आने के कारण बैठ भी नहीं सकते थे। इसके बाद भी जनरल वार्ड में बेड पर पेंट करने के लिए उन मरीजों की ड्रिप निकालकर सुईं लगी छोड़ दी गई और उनको उठाकर बाहर बैठा दिया। इससे कोई मरीज बाहर बैंच पर बैठ गया तो कोई सीढ़ी में बैठा रहा। इनमें से कुछ को बैठा नहीं गया और उन्हें चक्का आने लगे तो परिजन उन्हें परेशान होकर घर लेकर चले गए। इस तरह से बेड पर पेंट कराना मरीजों के उपचार से ज्यादा जरूरी समझा गया और इस तरह की बड़ी लापरवाही मंगलवार को कई घंटे तक जिला अस्पताल में की गई है।
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मुझसे बैठा नहीं जा रहा, फिर भी बैठा दिया
सुन्हैड़ा गांव की बाला ने बताया कि उनको बुखार था और एक सप्ताह से बीमार होने के कारण अस्पताल में भर्ती कराई गई थी। बुजुर्ग होने के साथ ही बुखार से पीड़ित होने के कारण काफी परेशान थी और उनको उसके बाद भी बाहर बैठा गया गया।
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मुझे चक्कर आने लगे तो परिजन घर लेकर जा रहे
निवाड़ा की नसरीन ने बताया उनको बुखार के कारण चक्कर आ रहे थे और इसके बाद भी बेड से उठाकर बाहर भेज दिया। उनको जगह नहीं मिली तो वह सीढ़ी में बैठ गई, लेकिन चक्कर आने के कारण परिजनों के साथ घर चली गई।
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कैदी को भी बेड से उठाकर बाहर बैठाया
दोझा गांव का कैदी सुलेमान भी बुखार से हालत खराब होने के कारण चार दिन से अस्पताल में भर्ती था। उन्हें भी उठाकर बाहर बैठा दिया गया तो पुलिस कर्मी उन्हें बैंच पर लेकर काफी देर तक बैठे रहे।
जब बैठा नहीं गया तो परिजन घर लेकर चले गए
बागपत के पुराने कस्बे की फुरकाना को बैठा नहीं जा रहा था। चक्का आ रहे थे तो परिवार वाले लेकर चले गए। उन्हें भी कई दिन से बुखार था और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन बेड पर पेंट करने के लिए बाहर भेज दिया गया।
इस तरह से बेड पर पेंट करने के लिए मरीजों को उठाकर बाहर बैठाना गलत है, अगर पेंट कराना जरूरी था तो उनको किसी दूसरे बेड पर शिफ्ट किया जाना चाहिए था या चारपाई पर लेटाना चाहिए था। इसकी जांच कराई जाएगी और उसके आधार पर कार्रवाई होगी। डॉ. दिनेश कुमार, सीएमओ