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जिंदा को मरा दिखाया, मरने वाले कर दिए गायब

Sun, 03 Apr 2022 10:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 03 Apr 2022 10:48 PM IST
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The living were shown dead, those who died disappeared
जिला अस्पताल बागपत - फोटो : BAGHPAT
स्वास्थ्य अभियान
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कोरोना संक्रमण से मरे बताकर जिनकी सूची भेजी गई, उनमें कई बाद में जिंदा मिले
स्वास्थ्य विभाग के डाटा में रही गड़बड़ी, मुआवजा मिलने की घोषणा के बाद दुरुस्त की
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। कोरोना संक्रमण काल में आंकड़ों में खूब खेल हुआ। जिंदा लोगों को मरा दर्शाया। वहीं, मरने वाले सूची से गायब कर दिए गए। सरकार ने कोरोना संक्रमण से मरने वालों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा कर सूची जारी की। इसके बाद इनका खुलासा हुआ। इसके बाद आंकड़ों को दुरुस्त किया गया और मरने वालों के परिजनों को मुआवजा भी दिया गया।
कोरोना संक्रमण से मरने वालों के आश्रितों को 50 हजार रुपये का मुआवजा दिए जाने की घोषणा के बाद स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में खेल का खुलासा हुआ। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना संक्रमण की पहली व दूसरी लहर के दौरान मरने वाले 141 लोगों की सूची जारी की थी। उसमें पांच नाम ऐसे शामिल कर दिए जो जिंदा थे। उनके यहां जब स्वास्थ्य विभाग से मुआवजा देने के लिए फोन किया गया तो पता चला कि वे जिंदा हैं। इसके अतिरिक्त 100 से ज्यादा ऐसे लोग आए, जिनके परिजनों की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई थी। उनका नाम सूची में शामिल नहीं था। इस तरह से आंकड़ों में गड़बड़ी मिली और डाटा काफी मशक्कत के बाद दुरुस्त किया गया।
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मृत घोषित करने पर भटकते रहे परिजन
स्वास्थ्य विभाग के डाटा में गड़बड़ी किए जाने से गौरीपुर जवाहरनगर निवासी पवन कुमार अपनी पत्नी मुनेश की कोरोना संक्रमण से मौत होने के बाद भी भटकता रहा। उसकी मौत जिला अस्पताल में हुई थी, लेकिन उसका नाम मृतकों की सूची में दर्ज नहीं किया गया। झूंडपुर गांव निवासी विनय कुमार के पिता सुरेंद्र शर्मा की खेकड़ा के कोविड अस्पताल में मौत हो गई थी। मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का कारण कोरोना संक्रमण लिखा हुआ था। इसके बावजूद सूची में नाम शामिल नहीं किया गया। उन्हें सूची में नाम शामिल कराने के लिए भटकना पड़ा। इस तरह के केवल दो मामले नहीं थे, बल्कि 100 से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए और डाटा बाद में दुरुस्त किया गया।
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वर्जन
यहां ऐसे काफी लोग थे, जिनकी कोरोना से मौत होने के बाद भी नाम सूची में नहीें था। उनके कागज दिखाने के बाद नाम सूची में शामिल किए गए थे। जिन जिंदा को मरा दिखाया गया था। वह त्रुटि डाटा फीड करते हुुई थी। उसे दुरुस्त करा दिया गया था।-डॉ. दिनेश कुमार, सीएमओ
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