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उत्तम संयम पाले ज्ञाता, नर-भव सकल करे ले साता...
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दशलक्षणधर्म पर्व के छठे दिन श्री अजीतनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में पूजा करते जैन श्रद्घालु।
- फोटो : BARAUT
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दशलक्षण पर्व के छठवे दिन जैन श्रद्धालुओं ने उत्तम संयम धर्म को किया अंगीकार
विधानाचार्याें ने दिया जीवन में संयम बरतने का संदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। दशलक्षण पर्व के छठवे दिन जैन श्रद्धालुओं ने विधिविधान पूर्वक पूजा-अर्चना की और उत्तम संयम धर्म को अंगीकार किया। पंडित चंद्रप्रकाश ग्वालियर ने कहा कि ‘उत्तम संयम पाले ज्ञाता, नर भव सकल करे ले साता’। अर्थात जिस मनुष्य ने अपने जीवन में संयम धारण कर लिया है, उसका जीवन सार्थक और सफल है। बगैर संयम के मुक्ति वधू कोसों दूर है और आकाश कुसुम के समान है।
श्री 1008 अजितनाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर मंडी में श्री अजितनाथ विधान का आयोजन किया गया। सुबह सर्वप्रथम पीत वस्त्रधारी जैन इंद्रगणों ने अजितनाथ भगवान की प्रतिमा का गर्म प्रासुक जल से अभिषेक किया। शांतिधारा का सौभाग्य सौधर्म इंद्र प्रदीप जैन को प्राप्त हुआ। नित्य नियम पूजन में नवदेवता पूजन, दशलक्षण पूजन, सोलहकारण पूजन, अजितनाथ भगवान पूजन और नंदीश्वर दीप की पूजा की गई। ग्वालियर से पधारी संगीतकार अनुपमा जैन के गाए भजन ‘मेरे अजितनाथ भगवान का जग में बज रहा डंका’ को श्रद्धालुओं ने सराहा। विधान में मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, अमित जैन, अरुण जैन, संजय जैन, इंद्राणी जैन, त्रिशला जैन, रश्मि जैन, डिंपल जैन, सरला जैन आदि उपस्थित रहे। मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि शाम सात बजे मंदिर में आरती हुई और बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। बृहस्पतिवार को मंदिर में चौसठ ऋद्धि विधान का आयोजन किया जाएगा।
जीवन में संयम का होना बहुत जरूरी
बड़ौत। पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के तहत श्री 1008 पार्श्वनाथ मंदिर नेहरू रोड में तेरह द्वीप महामंडल विधान का आयोजन किया गया। पंडित नेमचंद जैन के दिशा निर्देशन में सर्वप्रथम श्रीजी का प्रक्षालन अभिषेक किया गया। सौधर्म इंद्र सतेंद्र जैन, कुबेर इंद्र अमित जैन, यज्ञ नायक ऋषभ जैन, महेंद्र इंद्र अतिशय, संयम व आकाश जैन द्वारा शांतिधारा की गई। 13 द्वीप विधान में मंदिर मेरु की इक्ष्वकार पर्वत षट कुलाचल चार गजदंत उत्तर ऐरावत के 40 मंदिरों की पूजा की गई। 40 अर्घ्य चढ़ाए गए। पंडित नेमचंद ने कहा कि जीवन एक गाड़ी है जिसमें संयम रूपी ब्रेक जरूरी है। जिस तरह गाड़ी में ब्रेक ना हो तो गाड़ी दुर्घटना ग्रस्त हो जाती है। इसी तरह इंसान के जीवन में अगर संयम रूपी ब्रेक नही है तो वह उसका जीवन भी नरक के समान हो जाता हैं। जीवन में संयम का होना बहुत जरूरी है। कहते हैं कि अगर भोजन करने में भी संयम नहीं करोगे तो वो भी नुकसान देता है, अगर वाणी पर संयम नहीं होगा तब सबसे लड़ाई झगड़ा होगा। मीडिया प्रभारी आदिश जैन ने बताया कि सायंकालीन मंदिर में श्री भक्तांबर का विधान हुआ और श्री जी की संगीतमय आरती की गई। प्रदीप जैन ने ‘नाम लेने से तेरा भगवान पाप कटते है, हर घड़ी दिल में तेरी भक्ति के चिराग जलते हैं, ऐ परम पिता महावीर तेरी महिमा अपरंपार, तू है जग का पालनहार’ आदि भजनों से श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम में सतेंद्र, नरेश, अनिल, अमन, जयपाल, मुकेश निरंजन आदिश आदि रहे।
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विधानाचार्याें ने दिया जीवन में संयम बरतने का संदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। दशलक्षण पर्व के छठवे दिन जैन श्रद्धालुओं ने विधिविधान पूर्वक पूजा-अर्चना की और उत्तम संयम धर्म को अंगीकार किया। पंडित चंद्रप्रकाश ग्वालियर ने कहा कि ‘उत्तम संयम पाले ज्ञाता, नर भव सकल करे ले साता’। अर्थात जिस मनुष्य ने अपने जीवन में संयम धारण कर लिया है, उसका जीवन सार्थक और सफल है। बगैर संयम के मुक्ति वधू कोसों दूर है और आकाश कुसुम के समान है।
श्री 1008 अजितनाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर मंडी में श्री अजितनाथ विधान का आयोजन किया गया। सुबह सर्वप्रथम पीत वस्त्रधारी जैन इंद्रगणों ने अजितनाथ भगवान की प्रतिमा का गर्म प्रासुक जल से अभिषेक किया। शांतिधारा का सौभाग्य सौधर्म इंद्र प्रदीप जैन को प्राप्त हुआ। नित्य नियम पूजन में नवदेवता पूजन, दशलक्षण पूजन, सोलहकारण पूजन, अजितनाथ भगवान पूजन और नंदीश्वर दीप की पूजा की गई। ग्वालियर से पधारी संगीतकार अनुपमा जैन के गाए भजन ‘मेरे अजितनाथ भगवान का जग में बज रहा डंका’ को श्रद्धालुओं ने सराहा। विधान में मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, अमित जैन, अरुण जैन, संजय जैन, इंद्राणी जैन, त्रिशला जैन, रश्मि जैन, डिंपल जैन, सरला जैन आदि उपस्थित रहे। मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि शाम सात बजे मंदिर में आरती हुई और बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। बृहस्पतिवार को मंदिर में चौसठ ऋद्धि विधान का आयोजन किया जाएगा।
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जीवन में संयम का होना बहुत जरूरी
बड़ौत। पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के तहत श्री 1008 पार्श्वनाथ मंदिर नेहरू रोड में तेरह द्वीप महामंडल विधान का आयोजन किया गया। पंडित नेमचंद जैन के दिशा निर्देशन में सर्वप्रथम श्रीजी का प्रक्षालन अभिषेक किया गया। सौधर्म इंद्र सतेंद्र जैन, कुबेर इंद्र अमित जैन, यज्ञ नायक ऋषभ जैन, महेंद्र इंद्र अतिशय, संयम व आकाश जैन द्वारा शांतिधारा की गई। 13 द्वीप विधान में मंदिर मेरु की इक्ष्वकार पर्वत षट कुलाचल चार गजदंत उत्तर ऐरावत के 40 मंदिरों की पूजा की गई। 40 अर्घ्य चढ़ाए गए। पंडित नेमचंद ने कहा कि जीवन एक गाड़ी है जिसमें संयम रूपी ब्रेक जरूरी है। जिस तरह गाड़ी में ब्रेक ना हो तो गाड़ी दुर्घटना ग्रस्त हो जाती है। इसी तरह इंसान के जीवन में अगर संयम रूपी ब्रेक नही है तो वह उसका जीवन भी नरक के समान हो जाता हैं। जीवन में संयम का होना बहुत जरूरी है। कहते हैं कि अगर भोजन करने में भी संयम नहीं करोगे तो वो भी नुकसान देता है, अगर वाणी पर संयम नहीं होगा तब सबसे लड़ाई झगड़ा होगा। मीडिया प्रभारी आदिश जैन ने बताया कि सायंकालीन मंदिर में श्री भक्तांबर का विधान हुआ और श्री जी की संगीतमय आरती की गई। प्रदीप जैन ने ‘नाम लेने से तेरा भगवान पाप कटते है, हर घड़ी दिल में तेरी भक्ति के चिराग जलते हैं, ऐ परम पिता महावीर तेरी महिमा अपरंपार, तू है जग का पालनहार’ आदि भजनों से श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम में सतेंद्र, नरेश, अनिल, अमन, जयपाल, मुकेश निरंजन आदिश आदि रहे।
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