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दस साल से पॉलिटेक्निक कॉलेज का सपना अधूरा
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राजकीय पॉलिटेक्निक कोताना
- फोटो : BAGHPAT
बागपत। गांवों में इंजीनियर बनाने के लिए कोताना गांव में पॉलिटेक्निक कॉलेज और दो छात्रावास की शुरूआत जरूर हुई। मगर दस साल बाद भी पॉलिटेक्निक कॉलेज का पूरा नहीं हो सका है। हर बार निर्माण कार्य पूरा करने का समय बढ़ाया जा रहा है। अभी तक केवल 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो सका है।
यमुना से सटे हुए कोताना व आसपास के गांवों के छात्र-छात्राओं को पॉलिटेक्निक की पढ़ाई करने के लिए बड़ौत जाना पड़ता है। जहां के लिए यातायात की व्यवस्था भी नहीं है। वर्ष 2012 में कोताना में 12 करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से पॉलिटेक्निक कालेज व दो छात्रावास बनाने की घोषणा की गई। कई साल बाद निर्माण शुरू किया और बजट मंजूर होने के बाद किस्तों में धीरे-धीरे मिलता रहा। पॉलिटेक्निक कॉलेज के लिए अभी तक आठ करोड़ रुपये मिल चुके हैं। जिनसे केवल 80 प्रतिशत कार्य हुआ है और कालेज का निर्माण अभी अधूरा पड़ा है। इस तरह दस साल बीतने के बाद भी कॉलेज और छात्रावास का निर्माण नहीं हो सका है।
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हर बार बढ़ रहा निर्माण पूरा करने का समय
पॉलिटेक्निक कॉलेज और छात्रावास के निर्माण के लिए बीच में कई साल बजट लगातार मिलता रहा तो निर्माण कार्य भी लगातार चलता रहा। अब पिछले साल से बजट अटक गया है, तो निर्माण भी रुक गया है। इसलिए ही जहां पहले इसका निर्माण पूरा करने का समय वर्ष 2021 रखा गया था तो वह अब वर्ष 2023 कर दिया है।
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निर्माण शुरू होने पर जगी थी उम्मीद, अब अटका निर्माण
कोताना गांव के सोनू त्यागी का कहना है कि इसका कई साल पहले निर्माण शुरू हुआ था तो छात्र-छात्राओं के लिए काफी खुशी की बात थी कि यहां पॉलिटेक्निक कॉलेज बनेगा। उनको बड़ौत इतनी दूर नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन इतने साल बीतने के बाद भी निर्माण नहीं हो सका है। कोताना के मनोज प्रधान ने बताया कि निर्माण कभी तेजी से चलता है तो कभी धीमा हो जाता है। अब निर्माण नहीं हो रहा है, जिससे यह लंबा खिंचता दिख रहा है। इसका निर्माण जल्द होना चाहिए।
कोट...
यहां से बजट से लिए मांग भेजी हुई है। शासन से जल्द ही बजट मिलने की उम्मीद है। जितना बजट मिला था, उससे उतना ही निर्माण कार्य कराया जा चुका है। - सुमन गौतम, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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यमुना से सटे हुए कोताना व आसपास के गांवों के छात्र-छात्राओं को पॉलिटेक्निक की पढ़ाई करने के लिए बड़ौत जाना पड़ता है। जहां के लिए यातायात की व्यवस्था भी नहीं है। वर्ष 2012 में कोताना में 12 करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से पॉलिटेक्निक कालेज व दो छात्रावास बनाने की घोषणा की गई। कई साल बाद निर्माण शुरू किया और बजट मंजूर होने के बाद किस्तों में धीरे-धीरे मिलता रहा। पॉलिटेक्निक कॉलेज के लिए अभी तक आठ करोड़ रुपये मिल चुके हैं। जिनसे केवल 80 प्रतिशत कार्य हुआ है और कालेज का निर्माण अभी अधूरा पड़ा है। इस तरह दस साल बीतने के बाद भी कॉलेज और छात्रावास का निर्माण नहीं हो सका है।
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हर बार बढ़ रहा निर्माण पूरा करने का समय
पॉलिटेक्निक कॉलेज और छात्रावास के निर्माण के लिए बीच में कई साल बजट लगातार मिलता रहा तो निर्माण कार्य भी लगातार चलता रहा। अब पिछले साल से बजट अटक गया है, तो निर्माण भी रुक गया है। इसलिए ही जहां पहले इसका निर्माण पूरा करने का समय वर्ष 2021 रखा गया था तो वह अब वर्ष 2023 कर दिया है।
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निर्माण शुरू होने पर जगी थी उम्मीद, अब अटका निर्माण
कोताना गांव के सोनू त्यागी का कहना है कि इसका कई साल पहले निर्माण शुरू हुआ था तो छात्र-छात्राओं के लिए काफी खुशी की बात थी कि यहां पॉलिटेक्निक कॉलेज बनेगा। उनको बड़ौत इतनी दूर नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन इतने साल बीतने के बाद भी निर्माण नहीं हो सका है। कोताना के मनोज प्रधान ने बताया कि निर्माण कभी तेजी से चलता है तो कभी धीमा हो जाता है। अब निर्माण नहीं हो रहा है, जिससे यह लंबा खिंचता दिख रहा है। इसका निर्माण जल्द होना चाहिए।
कोट...
यहां से बजट से लिए मांग भेजी हुई है। शासन से जल्द ही बजट मिलने की उम्मीद है। जितना बजट मिला था, उससे उतना ही निर्माण कार्य कराया जा चुका है। - सुमन गौतम, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी

सोनू त्यागी- फोटो : BAGHPAT

मनोज प्रधान- फोटो : BAGHPAT