फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   Tenants could not get out from the cycle of consolidation

चकबंदी के चक्रव्यूह से निकल नहीं पाए काश्तकार

Wed, 31 Mar 2021 10:25 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 31 Mar 2021 10:25 PM IST
विज्ञापन
Tenants could not get out from the cycle of consolidation
चकबंदी के चक्रव्यूह से निकल नहीं पाए काश्तकार
विज्ञापन

बामनौली गांव में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान बरती गई हद दर्जे की अनियमितता
अपनी ही जमीन पर कब्जे के लिए दर-दर भटक रहे सैकड़ों किसान परिवार
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जिले में 14 अगस्त 1981 को शुरू हुई चकबंदी प्रक्रिया सैकड़ों किसान परिवारों के लिए बर्बादी का सबब बन गई। चार दशक में पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन अपनी ही जमीनों पर कब्जे के लिए सैकड़ों किसान भटकते रहे। चकबंदी विभाग के अधिकारियों ने हवा में ही किसानों के चक काट दिए।
गलत चकबंदी के कारण किसी किसान ने खुदकुशी कर ली तो कोई मानसिक संतुलन खो बैठा। अपनी जमीन के लिए किसान मोबाइल कंपनी के टावर पर चढ़ गए। मार्ग जाम किया, हंगामे-प्रदर्शन भी हुए। लेकिन न्याय नहीं मिला। जांच हुई तो दोषी अधिकारियों के नाम भी सामने आए, लेकिन मामला रफा-दफा कर दिया। मेरठ के चकबंदी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब यहां भी किसानों को न्याय की आस जगी है।
विज्ञापन

चकबंदी प्रक्रिया में हर स्तर पर हुई अनियमितता
बामनौली के पूर्व प्रधान महिपाल सिंह कोर्ट में चकबंदी मामलों की पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि चकबंदी प्रक्रिया में हर स्तर पर अनियमितता हुई। प्रक्रिया शुरू करने से पहले सेक्शन-4 प्रकाशित कराया जाता है। यह भी गलत प्रकाशित हुआ। ऐसे में चकबंदी प्रक्रिया आगे बढ़नी ही नहीं चाहिए थी। फिर भी गलत तरीके से इसे आगे बढ़ाया गया। हवा में चक काट दिए गए। कब्जा परिवर्तन करने पर मुआवजा देने का प्रावधान है, वह भी किसी किसान को नहीं मिला। विभाग के पास किसानों की जमीन, नलकूप, पेड़ या भवन तक का ब्योरा नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

कहां गायब हो गई 200 हेक्टेयर भूमि
चकबंदी प्रक्रिया में इस तरह लापरवाही बरती गई कि करीब 200 हेक्टेयर भूमि ही गायब हो गई। यह भूमि कहां गई, इसका पता नहीं चल सका। बामनौली गांव की 82 हेक्टेयर और रंछाड़ गांव की 120 हेक्टेयर भूमि का कुछ पता नहीं चल पाया।
चकबंदी से टूटे कृष्णपाल ने की जीवनलीला समाप्त
चकबंदी से आहत किसान कृष्णपाल ने 5 दिसंबर 2017 को खुदकुशी कर ली थी। कई अन्य किसानों ने भी सीएम से इच्छा मृत्यु की मांग की थी। सौराज ने वर्ष 2000 के बाद गांव में जमीन खरीदी। चकबंदी में इन्हें जमीन नहीं मिली। जमीन पाने के लिए लड़ाई लड़ रहा बेटा सुनील इतना परेशान हो गया कि दिमागी संतुलन खो बैठा।
लाखों रुपये की भूमि खरीदी, फिर भी खाली हाथ
गांव के करीब 300 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने वर्ष 2000 के बाद लाखों रुपये खर्च कर जमीन खरीदी। जमीन को तहसील के अभिलेखों में दर्ज कराया, लेकिन जिन किसानों ने जमीन बेची थी, फिर से भूमि उनके नाम दर्ज हो गई। रुपये भी चले गए और जमीन भी नहीं मिली। बड़ौली निवासी किसान छतर सिंह ने बामनौली गांव में चार बीघा जमीन खरीदी। चकबंदी में उन्हें जमीन नहीं मिली। पुष्पा पत्नी महावीर, कृष्णपाल पुत्र तिलकराम, मास्टर महेंद्र सिंह, सौराज पुत्र शिवराम समेत सैकड़ों किसानों को बैनामा की भूमि नहीं मिली।
712 पेज की जांच रिपोर्ट, कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति
चकबंदी आयुक्त के पास पहुंची शिकायत पर 2017 को चकबंदी प्रक्रिया की जांच हुई। जांच टीम ने 9 जनवरी 2018 को 712 पेज की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर अधिकारियों को सौंपी। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट था कि चकबंदी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गई। कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई। इसके बाद भी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही हुई।

वर्जन
- चकबंदी विभाग की ओर से किसानों की समस्या दूर कराने का प्रयास निरंतर जारी है। बामनौली के अलावा बरनावा में भी हम प्रयास कर रहे हैं। हाल ही में हाईकोर्ट ने मई 2023 तक चकबंदी प्रक्रिया पूरी कराने के आदेश दिए हैं। उसी दिशा में काम किया जा रहा है।
- अमरपाल शर्मा, चकबंदी अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed