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20 गोवंशों में मिले लंपी रोग के लक्षण, 16 सैंपल जांच के लिए भेजे
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बागपत। पशुओं में लंपी रोग के लक्षण मिलने से पशुपालन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। जिले में 20 गोवशों में लंपी रोग के संदिग्ध लक्षण मिले। जिसके बाद पशुपालन विभाग की टीम ने पशुपालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी और 16 गोवंशों के सैंपल लेकर जांच के लिए बरेली लैब भेजे।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. रमेश चंद्रा ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज की ट्रैकिंग के लिए ब्लॉक छह टीमें गठित की गई है। बिनौली क्षेत्र के कई गांवों में 16 गोवंशों में लंपी बीमारी के संदिग्ध लक्षण देखने को मिले। जिसकी सूचना मिलने पर संदिग्ध लक्षण वाले गोवंशें को दूसरे गोवंशों से अलग बंधवाया और उनके सैंपल लेकर आरवीआरआई लैब बरेली में जांच के लिए भेजे। इसके अलावा कोताना गांव में चार गोवंशों में संदिग्ध लक्षण मिले है, जिन्हें ट्रैक कर लिया गया है। पशुपालकों को बीमारी के प्रति जागरूक कर सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
इस तरह है रोग के लक्षण
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. रमेश चंद्रा ने बताया कि वायरस से ग्रस्त होने पर पशुओं के शरीर पर गांठें बन जाती हैं और बाद में घाव बन जाते हैं। पशु को तेज बुखार आना, नाक व मुंह से पानी का गिरना, भूख कम लगना भी बीमारी के लक्षण है। बीमारी होने पर पशु चारा कम खाना शुरू कर देता है। बीमारी के फैलाने का सबसे मुख्य कारण मक्खी, मच्छर हैं। इनके अलावा पशुओं की लार, दूषित चारा और दूषित पानी से भी बीमारी फैलती है।
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ब्लॉक में गठित की गई टीम में यह है शामिल
लंपी रोग के पशुओं में लक्षण मिलने के बाद ब्लॉक में टीमों को लगाया गया है। खेकड़ा व छपरौली ब्लॉक की टीमों में दो-दो चिकित्सक, तीन-तीन पशुधन प्रसार अधिकारी, तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रखे गए है। जबकि बागपत, बड़ौत, पिलाना, बिनौली ब्लॉक की टीमों में तीन-तीन चिकित्सक, तीन-तीन पशुधन प्रसार अधिकारी, तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रखे गए है।
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मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. रमेश चंद्रा ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज की ट्रैकिंग के लिए ब्लॉक छह टीमें गठित की गई है। बिनौली क्षेत्र के कई गांवों में 16 गोवंशों में लंपी बीमारी के संदिग्ध लक्षण देखने को मिले। जिसकी सूचना मिलने पर संदिग्ध लक्षण वाले गोवंशें को दूसरे गोवंशों से अलग बंधवाया और उनके सैंपल लेकर आरवीआरआई लैब बरेली में जांच के लिए भेजे। इसके अलावा कोताना गांव में चार गोवंशों में संदिग्ध लक्षण मिले है, जिन्हें ट्रैक कर लिया गया है। पशुपालकों को बीमारी के प्रति जागरूक कर सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
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इस तरह है रोग के लक्षण
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. रमेश चंद्रा ने बताया कि वायरस से ग्रस्त होने पर पशुओं के शरीर पर गांठें बन जाती हैं और बाद में घाव बन जाते हैं। पशु को तेज बुखार आना, नाक व मुंह से पानी का गिरना, भूख कम लगना भी बीमारी के लक्षण है। बीमारी होने पर पशु चारा कम खाना शुरू कर देता है। बीमारी के फैलाने का सबसे मुख्य कारण मक्खी, मच्छर हैं। इनके अलावा पशुओं की लार, दूषित चारा और दूषित पानी से भी बीमारी फैलती है।
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ब्लॉक में गठित की गई टीम में यह है शामिल
लंपी रोग के पशुओं में लक्षण मिलने के बाद ब्लॉक में टीमों को लगाया गया है। खेकड़ा व छपरौली ब्लॉक की टीमों में दो-दो चिकित्सक, तीन-तीन पशुधन प्रसार अधिकारी, तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रखे गए है। जबकि बागपत, बड़ौत, पिलाना, बिनौली ब्लॉक की टीमों में तीन-तीन चिकित्सक, तीन-तीन पशुधन प्रसार अधिकारी, तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रखे गए है।