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एक साल से बंद पड़े आंगनबाड़ी केंद्र, नहीं हो पाया बच्चों का सर्वे

Thu, 02 Sep 2021 10:35 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 02 Sep 2021 10:35 PM IST
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Survey not done due to closure of Anganwadi center
बागपत। कोरोना महामारी के चलते एक साल से आंगनबाड़ी केंद्र बंद पड़े हैं। इससे बच्चों का सर्वे नहीं हो पाया है। जिले में फिलहाल साढ़े चार हजार बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। पोषण माह में आंगनबाड़ी घर-घर जाकर सर्वे करके कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित करेंगी। वहीं, जिले में 1.21 लाख लाभार्थियों को खाद्यान्न वितरित किया जा रहा है।
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कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों की पहचान के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता केंद्रों पर बच्चों का वजन करके उनकी कैटेगरी चिह्नित करती हैं। इसके अतिरिक्त डोर-टू डोर सर्वे कराया जाता है। कोरोना महामारी के कारण एक वर्ष से आंगनबाड़ी केंद्र बंद हैं। इस कारण बच्चों का सर्वे नहीं हुआ। पोषण माह कार्यक्रम अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चों का सर्वे करेंगी। कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को कैटेगरी के आधार पर उपचार एवं खाद्यान्न दिया जाता है। पोषण माह अंतर्गत बच्चों को चिह्नित करने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
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ऐसे किया जाता है खाद्यान्न का वितरण
छह माह से तीन साल तक के बच्चों को माह में एक बार एक किलो चावल, डेढ़ किलो गेहूं, 750 ग्राम दाल और तीन माह में एक बार 450 ग्राम घी व 400 ग्राम मिल्क पाउडर। तीन से छह साल तक के बच्चों को माह में एक बार एक किलो चावल, डेढ किलो गेहूं और तीन माह में एक बार 450 ग्राम घी। गर्भवती महिला, धात्री महिलाओं व किशोरियों को माह में एक बार एक किलो चावल, डेढ़ किलो गेहूं, 750 ग्राम दाल और तीन माह में 450 ग्राम घी का वितरण किया जाता है। छह माह से तीन साल तक के अतिकुपोषित बच्चों को माह में एक बार एक किलो चावल, डेढ़ किलो गेहूं, 750 ग्राम दाल, तीन माह में एक बार 900 ग्राम घी और 750 ग्राम मिल्क पाउडर वितरित किया जाता है।
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जिले में लाभार्थियों का ब्योरा
जिला कार्यक्रम अधिकारी विपिन मैत्रेय ने बताया कि जिले में शून्य से छह माह तक के 13,779 बच्चे, छह माह से तीन वर्ष तक के 62,521 बच्चे और तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के 29,756 बच्चे हैं। इनके अतिरिक्त 14,080 गर्भवती व 13,779 धात्री महिलाएं और 1125 किशोरी समेत एक लाख 21 हजार 261 लाभार्थी हैं। जिले में चार हजार 510 बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इनमें 1081 अतिकुपोषित व 3,439 बच्चे कुपोषित हैं।
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