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शव यात्रा को खेतों में से ले जाने पर रोका
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लहचौड़ा गांव में बुखार से हुई थी युवक की मौत, पुलिस ने पहुंचकर शांत कराया मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
चांदीनगर (बागपत)। लहचौड़ा गांव में सोमवार रात को बुखार से युवक की मौत हो गई। उसका अंतिम संस्कार करने जा रहे परिजनों को एक खेत मालिक ने अपने यहां से निकलने से रोक दिया। इसे लेकर विवाद हो गया। सूचना पर पहुंची चांदीनगर पुलिस ने किसी तरह मामला शांत कराया। इसके बाद युवक के शव का रजबहे के पास अंतिम संस्कार किया गया।
लहचौड़ा गांव के अनिल (25) पुत्र रमेश की सोमवार रात को बुखार के कारण मौत हो गई। परिजनों के अनुसार अनिल कई दिनों से बुखार से पीड़ित था। उसका दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में उपचार चल रहा था। गांव में कोई श्मशान घाट नहीं है। गौना-लहचौड़ा मार्ग पर एक खाली पड़ी जमीन में ही अंतिम संस्कार किया जाता है। इस जमीन तक जाने के लिए भी खेतों के बीच से जाना पड़ता है। मंगलवार को परिजन अनिल के शव को अंतिम संस्कार के लिए खेतों के बीच से जा रहे थे। इसी दौरान खेतों के मालिक भी वहां पहुंच गए और उनको खेतों के बीच से निकलने से रोक दिया। इसे लेकर हंगामा हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह मामला शांत कराया। इसके बाद शव का रजबहे के पास अंतिम संस्कार किया गया। ग्राम प्रधान प्रदीप शर्मा का कहना है कि गांव में कोई शमशान घाट नहीं है। इसलिए ही गांव के बाहर रजबहे के पास अंतिम संस्कार करना पड़ता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चांदीनगर (बागपत)। लहचौड़ा गांव में सोमवार रात को बुखार से युवक की मौत हो गई। उसका अंतिम संस्कार करने जा रहे परिजनों को एक खेत मालिक ने अपने यहां से निकलने से रोक दिया। इसे लेकर विवाद हो गया। सूचना पर पहुंची चांदीनगर पुलिस ने किसी तरह मामला शांत कराया। इसके बाद युवक के शव का रजबहे के पास अंतिम संस्कार किया गया।
लहचौड़ा गांव के अनिल (25) पुत्र रमेश की सोमवार रात को बुखार के कारण मौत हो गई। परिजनों के अनुसार अनिल कई दिनों से बुखार से पीड़ित था। उसका दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में उपचार चल रहा था। गांव में कोई श्मशान घाट नहीं है। गौना-लहचौड़ा मार्ग पर एक खाली पड़ी जमीन में ही अंतिम संस्कार किया जाता है। इस जमीन तक जाने के लिए भी खेतों के बीच से जाना पड़ता है। मंगलवार को परिजन अनिल के शव को अंतिम संस्कार के लिए खेतों के बीच से जा रहे थे। इसी दौरान खेतों के मालिक भी वहां पहुंच गए और उनको खेतों के बीच से निकलने से रोक दिया। इसे लेकर हंगामा हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह मामला शांत कराया। इसके बाद शव का रजबहे के पास अंतिम संस्कार किया गया। ग्राम प्रधान प्रदीप शर्मा का कहना है कि गांव में कोई शमशान घाट नहीं है। इसलिए ही गांव के बाहर रजबहे के पास अंतिम संस्कार करना पड़ता है।
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