सपा ने खेला जाट कार्ड
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टिकटों की घोषणा में भी सपा ने इन्हीं तीनों को आगे रखा और बागपत विधानसभा सीट पर डाक्टर कुलदीप उज्ज्वल, बड़ौत से चौधरी साहब सिंह को और छपरौली से हाजी तराबुद्दीन को टिकट दिया है। सपा जिलाध्यक्ष डाक्टर एसपी यादव ने बताया कि तीनों सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी गई है। तीनों उम्मीदवारों को मजबूती से चुनाव लड़ाया जाएगा।
पहली बार बागपत छोड़ेंगे चौधरी साहब सिंह
बागपत। प्रदेश के पशुधन विभाग के सलाहकार चौधरी साहब सिंह को सपा ने इस बार बड़ौत विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया है। राजनीतिक इतिहास में चौधरी साहब सिंह पहली बार बागपत सीट को छोड़कर दूसरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। चौधरी साहब सिंह ने राजनीति की शुरुआत 1974 से की थी। पहली बार 1985 में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह द्वारा बनाई गई दलित मजदूर किसान पार्टी के टिकट पर बागपत विधानसभा सीट से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।
1989 में जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़कर पहली बार विधायक बने। उसके बाद 1991 में निर्दलीय, 1993 में फिर से जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ा। 1996 में सपा और रालोद के संयुक्त प्रत्याशी बने। 2002 में बसपा का दामन थामा और टिकट लेकर चुनाव लड़े, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। उसके बाद 2007 और 2012 में सपा के टिकट पर किस्मत आजमाई, लेकिन सफल नहीं हो सके। चौधरी साहब सिंह पहली बार बागपत छोड़कर बड़ौत विधानसभा क्षेत्र का रुख करेंगे। चौधरी साहब सिंह पूरे राजनीतिक कैरियर में पहली बार बागपत छोड़ रहे हैं।
डाक्टर कुलदीप उज्जवल को पहली बार मिला टिकट
बागपत। समाजवादी पार्टी ने राज्य मद्य निषेध परिषद के चेयरमैन डाक्टर कुलदीप उज्ज्वल को बागपत विधानसभा क्षेत्र से पार्टी उम्मीदवार घोषित किया है। उन्हें पहली बार विधानसभा टिकट मिला है। सीसीएस यूनिवर्सिटी मेरठ में छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले डाक्टर कुलदीप 2004 में सपा छात्र सभा की सीट पर यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेंट बने। उसके बाद 2005 में सपा के यूथ संगठन में राष्ट्रीय सचिव रहे। बिनौली विकास खंड के ग्राम मवीकलां निवासी डाक्टर कुलदीप उज्जवल को दिसंबर 2013 में प्रदेश के रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया।
अक्तूबर 2014 में पिता धर्मपाल सिंह के विवादित बयान ने डाक्टर कुलदीप उज्ज्वल की काफी किरकिरी कराई और उन्हें 26 अक्तूबर 2014 को राज्यमंत्री के दर्जे से हाथ धोना पड़ा। प्रदेश सरकार ने उन्हें फिर से 21 सितंबर 2015 में राज्य मद्य निषेध परिषद का चेयरमैन बना दिया। राजनीति शास्त्र में डाक्टरेट कुलदीप उज्ज्वल पर सपा ने दांव चला है और उन्हें बागपत विधानसभा से पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया है।
2012 विस चुनाव में सुर्खियों में आए थे तराबुद्दीन
बागपत। समाजवादी पार्टी द्वारा बागपत की छपरौली विधानसभां के लिए घोषित प्रत्याशी के रूप में पश्चिमी उत्तर प्रदेश गन्ना बीज एवं विकास निगम के चेयरमैन हाजी तराबुद्दीन पर भरोसा जताया है। सिर्फ पांच साल की सक्रियता ने उन्हें सपा का इतना खास बना दिया कि उन्हें न सिर्फ पश्चिम उत्तर प्रदेश गन्ना बीज एवं विकास निगम का चेयरमैन बना दिया, बल्कि इस बार उन्हें छपरौली विधानसभा क्षेत्र से सपा के उम्मीदवार के रूप में भी उतार दिया। उन्हें पांच साल पहले 2012 में भी अचानक सपा ने टिकट देकर सुर्खियों में ला दिया था।
उस समय हाजी तराबुद्दीन का नाम सपा के कार्यकर्ताओं को तो दूर की बात है, उस समय के सपा जिलाध्यक्ष ठाकुर प्रदीप सिंह को भी नहीं पता था। उन्होंने उस समय टिकट घोषित होने के बाद बयान भी दिया था कि उन्हें नहीं मालूम कि हाजी तराबुद्दीन कौन है? हालांकि बाद में हाजी तराबुद्दीन का टिकट काटकर मनोज चौधरी को टिकट दिया गया था। वहां सपा तीसरे स्थान पर रही थी। सपा ने इस बार फिर से हाजी तराबुद्दीन पर दांव चला है। सपा ने 143 सीटों पर जारी की गई प्रत्याशियों की सूची में उनका नाम छपरौली विधानसभा से उम्मीदवार के रूप में घोषित किया है।