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कर्ज लेकर बोई फसल, वह भी बर्बाद हो गई

Sun, 21 Aug 2022 12:28 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 21 Aug 2022 12:28 AM IST
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Sowing crops by taking loan, Yamuna drowned the farmer's hard work
बागपत यमुना खादर में नष्ट हुई लौकी की फसल - फोटो : BAGHPAT
बागपत। किसानों ने अच्छी आमदनी के लिए कर्ज लेकर यमुना खादर में फसल की बुवाई की। उस फसल से आमदनी भले ही कुछ नहीं हुई, लेकिन किसान कर्जदार जरूर बन गए हैं। क्योंकि यमुना का जलस्तर बढ़ने से सब्जी की अधिकतर फसल बर्बाद हो गई तो चारा की काफी फसल भी खराब हो गई है। चारा की कोई फसल बची है तो उसपर मिट्टी की परत जम गई है और वह पशुओं को खिलाने लायक नहीं बची है।
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जिले में ऐसे करीब एक हजार से ज्यादा किसान ऐसे हैं, जो यमुुना खादर में हर साल सब्जी की फसल की बुवाई करते हैं। इस बार भी किसानों ने अच्छी पैदावार की उम्मीद में सब्जी की फसल की बुआई की, लेकिन उनकी अच्छी पैदावार की उम्मीद पहले ही खत्म हो गई। यमुना खादर में दो हजार बीघा से अधिक भूमि पर बेबीकॉर्न, लौकी, तौरी, पेठा, मटर आदि की फसल पानी में डूबने से खराब हो गई है।
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बागपत के किसान जयकिशन, राजेंद्र, भीम सिंह, सुशील आदि ने बताया कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण इस बार लोगों से ब्याज पर कर्जा लेकर खेत में विभिन्न प्रकार की सब्जियों की फसल उगाई थीं। जुलाई माह के आखिर में यमुना का जलस्तर बढ़ता चला गया और उनकी पूरी फसल जलमग्न होने से बर्बाद हो गई। जिससे फायदा तो दूर, बल्कि खेती में लगाई गई पूंजी भी खत्म हो गई और कुछ किसान कर्जदार हो गए।
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फसल की बुआई करके कर्जदार हो गया
आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण 70 हजार रुपये ब्याज पर कर्जा लेकर फसल बोई थी, लेकिन यमुना का जलस्तर बढ़ने से आठ बीघा लौकी और चार बीघा सीताफल की फसल खराब हो गई। इस बार यमुना खादर की खेती घाटे का सौदा रही, अब कर्जा उतारने की चिंता बढ़ गई है। - बिजेंद्र कश्यप, किसान।
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मुनाफा छोड़ो, लागत भी नहीं बची
अच्छे मुनाफे के लिए यमुना खादर में तीन बीघा लौकी व 15 बीघा सीताफल की सब्जी बोई थी। जिस पर 80 हजार रुपये खर्च किए गए थे। सब्जी की पैदावार शुरू हुई तो एक-दो बार मंडी लेकर गए, लेकिन बाद में जलस्तर बढ़ने से पूरी फसल बेकार हो गई। खेती में मुनाफा तो कुछ नहीं मिला, लेकिन लागत भी डूब गई। - रिफाकत अली, किसान।
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दिलाया जाए खराब फसल का मुआवजा
यमुना नदी में 15 बीघा में सीताफल, 13 बीघा में लौकी व दो बीघा में बेबीकॉर्न की फसल उगाई थी। जलस्तर बढ़ने से फसल खराब हो गई। जिससे किसानों के सामने आर्थिक तंगी के हालात बन गए हैं। कर्ज उतारने के लिए किसान चिंतित है। जलस्तर बढ़ने से खराब हुई फसल का किसानों को मुआवजा दिलाया जाए। - जयकिशन, किसान।
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चारे की फसल पर जम गई मिट्टी की परत
किसान संजय, सुरेंद्र, अजय, सचिन चौहान ने बताया कि खेत में पशुओं के चारे के लिए ज्वार आदि फसल उगाई गई थी। यमुना का जलस्तर बढ़ने से फसल पानी में डूब गई थी। जिसमें से कुछ फसल बर्बाद हो गई और अब जलस्तर कम हुआ तो वे खेत में चारा काटने पहुंचे तो चारे की फसल पर मिट्टी की परत जमी मिली।

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कोट...
यमुना का जलस्तर बढ़ने और कटान होने से जो फसल बर्बाद हुई है। ऐसे फसलों का लेखपाल से सर्वे कराया जाएगा और नुकसान का मुआवजा किसानों को दिया जाएगा। - प्रतिपाल सिंह चौहान, एडीएम बागपत।

यमुना खादर में नष्ट हुई फसल दिखाता किसान हरिसिंह

यमुना खादर में नष्ट हुई फसल दिखाता किसान हरिसिंह- फोटो : BAGHPAT

यमुना खादर में नष्ट हुई फसल

यमुना खादर में नष्ट हुई फसल- फोटो : BAGHPAT

किसान रिफाकत अली

किसान रिफाकत अली- फोटो : BAGHPAT

करासान जयकिशन

करासान जयकिशन- फोटो : BAGHPAT

सिन बिजेंद्र

सिन बिजेंद्र- फोटो : BAGHPAT

बागपत में नष्ट हुई फसल दिखाता किसान

बागपत में नष्ट हुई फसल दिखाता किसान- फोटो : BAGHPAT

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