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Baghpat News: खिचड़ी खाने से बीमार बच्चे हुए ठीक, दस लोगों पर मुकदमा
Mon, 27 Mar 2023 07:44 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Mon, 27 Mar 2023 07:44 PM IST
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- फैजपुर निनाना में प्रसाद की खिचड़ी खाने पर बिगड़ी थी 30 बच्चों और दस लोगों की हालत
- जिला अस्पताल से छुट्टी मिलने पर बच्चों को घर पहुंचने पर परिजनों ने गले से लगाया
- खाद्य विभाग की टीम ने खिचड़ी का नमूना लेकर जांच को भेजा, भांग के पत्ते भी मिले
फोटो एक की सीरिज
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। फैजपुर निनाना गांव में प्रसाद की खिचड़ी खाने के बाद बीमार हुए 30 बच्चे और दस अन्य लोग ठीक हैं। इनमें से अस्पताल में भर्ती हुए बच्चों समेत सभी को अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेज दिया गया है। इस मामले में अब दस के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वहीं खाद्य विभाग की टीम ने खिचड़ी के नमूने लिए तो उनको बर्तन में भांग की पत्ती मिली है।
गांव में ओमप्रकाश उर्फ पिप्पन नाम के व्यक्ति ने रविवार को भंडारा किया था। उसने प्रसाद में खिचड़ी बांटी थी जो वहां करीब 100 लोगों ने खाई थी। उनमें से अधिकतर को करीब चार घंटे बाद चक्कर आने के साथ ही उल्टी शुरू हो गई थी और कई बच्चे बेहोश हो गए थे। जिनकी हालत ज्यादा खराब होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिला अस्पताल में 20 बच्चों व तीन व्यक्तियों को भर्ती कराया गया था, जबकि अन्य की हालत ज्यादा खराब नहीं होने पर घर में आराम कराया गया। खिचड़ी खाने से बीमार होने वाले सभी की सोमवार सुबह तक हालत ठीक हो गई और उनको अस्पताल से छुट्टी दी गई। उसके बाद भी चिकित्सक उन सभी के परिजनों से हालचाल जानते रहे।
- दस लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
सरूरपुर चौकी प्रभारी नरेश चंद की तरफ से फैजपुर निनाना में खिचड़ी बांटने वाले ओमप्रकाश उर्फ पिप्पन, बंटा, सीडी, अजय, कपिल, प्रवीण, जोनी, भूरा, किरणपाल, विनोद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। आरोपियों पर खाने में विषाक्त पदार्थ मिलाने के आरोप में मुकदमा हुआ है।
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खिचड़ी का नमूना लेकर जांच को भेजा
जिला अभिहित अधिकारी मानवेंद्र सिंह ने बताया कि फैजपुर निनाना गांव में खिचड़ी खाने से बच्चों व अन्य के बीमार होने का पता चलने पर रविवार रात को गांव में पहुंचकर खिचड़ी के बर्तन (भगोने) को देखा गया। खिचड़ी का नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा गया है। उसके साथ एक पत्र भेजकर पूरी घटना के बारे में बताया गया है, जिससे रिपोर्ट जल्द मिल सके। उनके अनुसार बर्तन में कुछ पत्ते भी मिले है जो भांग के पत्तों की तरह लग रहे थे।
- चिकित्सकों व कर्मियों ने घर-घर जाकर रातभर की जांच
जिले में पहली बार ऐसा हुआ कि कोई पीएचसी रात को खुली रही। बागपत सीएचसी अधीक्षक डा. विभाष राजपूत ने बताया कि वहां पांच चिकित्सक, तीन सीएचओ, फार्मासिस्ट, आशा मौजूद रहे। सभी ने घर-घर जाकर सर्वे किया और वहां जांच की गई। जिनकी हालत ज्यादा खराब मिली, उनको अस्पताल भेजा गया। जबकि अन्य को घर में आराम करने की सलाह दी गई। उनके अनुसार रात के डेढ़ बजे तक घरों मेंं जांच की गई।
- बच्चों को गले से लगाकर बोले परिजन ऐसे भंडारे में नहीं खाएंगे
अस्पताल से जब बच्चों को घर भेजा गया तो अधिकतर की मां ने अपने बेटों को गले से लगा लिया। ग्रामीणों ने बताया कि बच्चों की हालत खराब होने पर वह काफी डर गए थे। वह समझ ही नहीं सके कि आखिर उनके बच्चों को क्या हुआ है। उन्होंने कहा कि अब इस तरह के भंडारे में वह कुछ नहीं खाएंगे और अपने बच्चों को भी नहीं खाने देंगे।
- 20 हजार रुपये मुआवजा देने की अफवाह फैली
गांव में बच्चों की हालत खराब होने के बाद यह भी अफवाह फैल गई कि बीमारों को सरकार की तरफ से बीस हजार रुपये मुआवजा दिया जाएगा। जिसके बाद गांव में कई अन्य खुद को बीमार बताने लगे, लेकिन उनकी जांच की गई तो वे ठीक मिले। इस तरह से अफवाह फैलने पर भी काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा।
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- जिला अस्पताल से छुट्टी मिलने पर बच्चों को घर पहुंचने पर परिजनों ने गले से लगाया
- खाद्य विभाग की टीम ने खिचड़ी का नमूना लेकर जांच को भेजा, भांग के पत्ते भी मिले
फोटो एक की सीरिज
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। फैजपुर निनाना गांव में प्रसाद की खिचड़ी खाने के बाद बीमार हुए 30 बच्चे और दस अन्य लोग ठीक हैं। इनमें से अस्पताल में भर्ती हुए बच्चों समेत सभी को अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेज दिया गया है। इस मामले में अब दस के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वहीं खाद्य विभाग की टीम ने खिचड़ी के नमूने लिए तो उनको बर्तन में भांग की पत्ती मिली है।
गांव में ओमप्रकाश उर्फ पिप्पन नाम के व्यक्ति ने रविवार को भंडारा किया था। उसने प्रसाद में खिचड़ी बांटी थी जो वहां करीब 100 लोगों ने खाई थी। उनमें से अधिकतर को करीब चार घंटे बाद चक्कर आने के साथ ही उल्टी शुरू हो गई थी और कई बच्चे बेहोश हो गए थे। जिनकी हालत ज्यादा खराब होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिला अस्पताल में 20 बच्चों व तीन व्यक्तियों को भर्ती कराया गया था, जबकि अन्य की हालत ज्यादा खराब नहीं होने पर घर में आराम कराया गया। खिचड़ी खाने से बीमार होने वाले सभी की सोमवार सुबह तक हालत ठीक हो गई और उनको अस्पताल से छुट्टी दी गई। उसके बाद भी चिकित्सक उन सभी के परिजनों से हालचाल जानते रहे।
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- दस लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
सरूरपुर चौकी प्रभारी नरेश चंद की तरफ से फैजपुर निनाना में खिचड़ी बांटने वाले ओमप्रकाश उर्फ पिप्पन, बंटा, सीडी, अजय, कपिल, प्रवीण, जोनी, भूरा, किरणपाल, विनोद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। आरोपियों पर खाने में विषाक्त पदार्थ मिलाने के आरोप में मुकदमा हुआ है।
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खिचड़ी का नमूना लेकर जांच को भेजा
जिला अभिहित अधिकारी मानवेंद्र सिंह ने बताया कि फैजपुर निनाना गांव में खिचड़ी खाने से बच्चों व अन्य के बीमार होने का पता चलने पर रविवार रात को गांव में पहुंचकर खिचड़ी के बर्तन (भगोने) को देखा गया। खिचड़ी का नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा गया है। उसके साथ एक पत्र भेजकर पूरी घटना के बारे में बताया गया है, जिससे रिपोर्ट जल्द मिल सके। उनके अनुसार बर्तन में कुछ पत्ते भी मिले है जो भांग के पत्तों की तरह लग रहे थे।
- चिकित्सकों व कर्मियों ने घर-घर जाकर रातभर की जांच
जिले में पहली बार ऐसा हुआ कि कोई पीएचसी रात को खुली रही। बागपत सीएचसी अधीक्षक डा. विभाष राजपूत ने बताया कि वहां पांच चिकित्सक, तीन सीएचओ, फार्मासिस्ट, आशा मौजूद रहे। सभी ने घर-घर जाकर सर्वे किया और वहां जांच की गई। जिनकी हालत ज्यादा खराब मिली, उनको अस्पताल भेजा गया। जबकि अन्य को घर में आराम करने की सलाह दी गई। उनके अनुसार रात के डेढ़ बजे तक घरों मेंं जांच की गई।
- बच्चों को गले से लगाकर बोले परिजन ऐसे भंडारे में नहीं खाएंगे
अस्पताल से जब बच्चों को घर भेजा गया तो अधिकतर की मां ने अपने बेटों को गले से लगा लिया। ग्रामीणों ने बताया कि बच्चों की हालत खराब होने पर वह काफी डर गए थे। वह समझ ही नहीं सके कि आखिर उनके बच्चों को क्या हुआ है। उन्होंने कहा कि अब इस तरह के भंडारे में वह कुछ नहीं खाएंगे और अपने बच्चों को भी नहीं खाने देंगे।
- 20 हजार रुपये मुआवजा देने की अफवाह फैली
गांव में बच्चों की हालत खराब होने के बाद यह भी अफवाह फैल गई कि बीमारों को सरकार की तरफ से बीस हजार रुपये मुआवजा दिया जाएगा। जिसके बाद गांव में कई अन्य खुद को बीमार बताने लगे, लेकिन उनकी जांच की गई तो वे ठीक मिले। इस तरह से अफवाह फैलने पर भी काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा।