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छपरौली की कुर्सी और श्रवण के बीच खड़े थे संजय खोखर
छपरौली कस्बा के तिलवाड़ा रोड पर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय खोखर की हत्या के दौरान घटना स्थल प
- फोटो : BAGHPAT
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छपरौली चेयरमैन की कुर्सी और श्रवण के बीच खड़े थे संजय खोखर
बागपत। छपरौली नगर पंचायत की कुर्सी पाने के लिए खूनी साजिश रची गई। वर्तमान चेयरमैन संजीव खोखर और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय खोखर के बीच बेहद करीबी रिश्ते रहे हैं। संजीव खोखर की दो बार लगातार जीत के बाद कस्बे में यह संदेश गया कि संजय खोखर की बदौलत ही कामयाबी मिली है। यही वजह है कि इस बार चुनाव की तैयारी में जुटे अभियुक्त श्रवण खोखर ने पूर्व जिलाध्यक्ष को रास्ते से हटाने का फैसला किया। साजिश में अपने चाचा को शामिल कर खूनी खेल खेला गया।
श्रवण खोखर की मां सुशीला खोखर कस्बे की साल 2006 से 2011 तक चेयरपर्सन रही हैं। 2012 में वह चुनाव हार गईं और अगले चुनाव से उनका परिवार दूर रहा। इस बार नगर पंचायत चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए संभावित प्रत्याशी के तौर पर उनका बेटा श्रवण खोखर लोगों के बीच पहुंचना शुरू हो गया था। पुलिस जांच में सामने आया है कि श्रवण को लग रहा था कि वर्तमान चेयरमैन संजीव खोखर और संजय खोखर एक हैं। ऐसे में चुनाव जीतने की राह आसान नहीं होगी। इसी कारण श्रवण खोखर ने किसी तरह अपने चाचा संजीव कुमार खोखर पुत्र सोहन पाल सिंह को भी साजिश में शामिल कर लिया।
भोपाल कैप्टन की हत्या में था नामजद
संजीव कुमार खोखर 16 साल पहले भाकियू नेता भोपाल कैप्टन की हत्या में भी नामजद रहा है। लंबे समय से उसका संजय खोखर के घर में आना-जाना रहा। रात में और अल सुबह भी संजय खोखर के पास पहुंच जाता था। संजीव खोखर की संजय खोखर के परिवार से भी निकटता रही थी।
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यकीन ही नहीं, संजीव ऐसा कर देगा : मनीष खोखर
संजय खोखर के बेटे मनीष खोखर का कहना है कि उनके परिवार को यकीन ही नहीं है कि संजीव ऐसा कर सकता है। संजीव कुमार खोखर के परिवार से हमारी कोई दुश्मनी नहीं है। पुलिस जांच कर रही है, इससे ज्यादा उन्हें कुछ नहीं कहना है।
बागपत। छपरौली नगर पंचायत की कुर्सी पाने के लिए खूनी साजिश रची गई। वर्तमान चेयरमैन संजीव खोखर और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय खोखर के बीच बेहद करीबी रिश्ते रहे हैं। संजीव खोखर की दो बार लगातार जीत के बाद कस्बे में यह संदेश गया कि संजय खोखर की बदौलत ही कामयाबी मिली है। यही वजह है कि इस बार चुनाव की तैयारी में जुटे अभियुक्त श्रवण खोखर ने पूर्व जिलाध्यक्ष को रास्ते से हटाने का फैसला किया। साजिश में अपने चाचा को शामिल कर खूनी खेल खेला गया।
श्रवण खोखर की मां सुशीला खोखर कस्बे की साल 2006 से 2011 तक चेयरपर्सन रही हैं। 2012 में वह चुनाव हार गईं और अगले चुनाव से उनका परिवार दूर रहा। इस बार नगर पंचायत चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए संभावित प्रत्याशी के तौर पर उनका बेटा श्रवण खोखर लोगों के बीच पहुंचना शुरू हो गया था। पुलिस जांच में सामने आया है कि श्रवण को लग रहा था कि वर्तमान चेयरमैन संजीव खोखर और संजय खोखर एक हैं। ऐसे में चुनाव जीतने की राह आसान नहीं होगी। इसी कारण श्रवण खोखर ने किसी तरह अपने चाचा संजीव कुमार खोखर पुत्र सोहन पाल सिंह को भी साजिश में शामिल कर लिया।
भोपाल कैप्टन की हत्या में था नामजद
संजीव कुमार खोखर 16 साल पहले भाकियू नेता भोपाल कैप्टन की हत्या में भी नामजद रहा है। लंबे समय से उसका संजय खोखर के घर में आना-जाना रहा। रात में और अल सुबह भी संजय खोखर के पास पहुंच जाता था। संजीव खोखर की संजय खोखर के परिवार से भी निकटता रही थी।
यकीन ही नहीं, संजीव ऐसा कर देगा : मनीष खोखर
संजय खोखर के बेटे मनीष खोखर का कहना है कि उनके परिवार को यकीन ही नहीं है कि संजीव ऐसा कर सकता है। संजीव कुमार खोखर के परिवार से हमारी कोई दुश्मनी नहीं है। पुलिस जांच कर रही है, इससे ज्यादा उन्हें कुछ नहीं कहना है।

बागपत एसपी कार्यालय पर छपरौली पुलिस हिरासत में आरोपियों के बारे में खुलासा करते एसपी अभिषेक सिं?- फोटो : BAGHPAT