पहली बना आर्यन अपहरण मर्डर केस
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सीओ क्राइम श्वेतांभ पांडेय के मुताबिक लुहारी गांव के युवक अर्जुन की हत्या के केस में पकड़े गए आरोपी वरुण लुहारी ने पूछताछ में बताया कि 16 जून को वह जेल से जमानत पर छूटा था। करीब 15 दिन बाद भड़ल गांव के बाबू ने उससे संपर्क कर कहा कि क्या काम कर रहा है। उसने कहा कि वह जेल से आया है। फिलहाल कोई काम नहीं है।
बाबू ने अपने गांव के चमड़ा व्यापारी को काफी रुपये वाला बताते हुए उसके बेटे के अपहरण करने के बारे में बात की, लेकिन बाद में उससे बाबू ने कोई संपर्क नहीं किया। 28 जुलाई को भड़ल गांव के कांवड़ सेवा शिविर से रविंद्र के बेटे आर्यन का अपहरण हो गया। इस घटना को बाबू ने ही अंजाम दिया है। जबकि जेल जाते समय वरुण लुहारी ने कहा कि दोघट थाना के एक दारोगा ने यह कहानी खुद बनाई है। उसे नहीं पता किसने आर्यन का अपहरण किया और किसने हत्या। पुलिस उसे साजिश के तहत फंसा रही है। इस बारे में दोघट थाना प्रभारी चितवन सिंह ने कहा कि वरुण द्वारा लगाया गया आरोप पूरी तरह से गलत है।
वरुण बोला, आर्यन केस की हो सीबीआई जांच
बागपत। वरुण ने कहा कि उसे तो आर्यन के अपहरण की जानकारी समाचार पत्रों से हुई थी। उसकी हत्या किसने और क्यों की है? उसे इसकी कोई जानकारी नहीं है। पुलिस इस केस में अपनी मर्जी से नाम ले रही है। इस केस की सीबीआई जांच होनी चाहिए।
बड़ौत के व्यापारी से दस लाख रुपये
लेकर अर्जुन हत्याकांड में फंसाया
बागपत। वरुण ने कहा कि लुहारी गांव के जयंत उर्फ गोलू के भाई की कुछ दिन पूर्व हत्या हो गई थी। गोलू को शक था कि अर्जुन ने उसके भाई की मुखबिरी की है। तभी उसकी विपक्षियों ने हत्या की। इसी को लेकर गोलू ने अर्जुन की हत्या की। उसे तो पुलिस ने बड़ौत के व्यापारियों से दस लाख रुपये लेकर केस में फंसाया है। क्योंकि उसके भाई कपिल की बड़ौत के व्यापारी परिवार ने हत्या कर दी थी। इसको लेकर उनके बीच विवाद चल रहा है। जबकि सीओ श्वेतांभ पांडेय का कहना है कि वरुण और गोलू ही अर्जुन को गांव से बुलाकर खेत ले गए थे। वहां पर शराब पीते समय उनका आपस में झगड़ा हो गया था। इसी दौरान गोलू ने उसके सिर में ईंट मार दी थी। जिससे उसकी मौत हो गई थी। बाद में उसके शव को आरोपी खेत में फेंक आए थे।