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किसान के खेत में कंपनियों के दखल की बेचैनी
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- किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि कंपनियां मनमर्जी से तय करेगी दाम
- फसलों के वाजिब दाम नहीं मिलने से पहले ही घाटे में किसान
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। कृषि विधेयकों पर सड़क से लेकर संसद तक घमासान मचा है। इसे लेकर आम किसान के मन में संशय के हालात हैं। पीढ़ियों से खेती कर रहे किसानों के बीच कांट्रेक्ट खेती को लेकर रुचि नजर नहीं आ रही है। विपक्ष का कहना है कि किसान के खेत तक कंपनियों का दखल बढ़ेगा। मनमाने भाव तय होंगे और मनचाहा खेत खरीदा जाएगा। आज देश अन्नदाता पर निर्भर है, कल किसान कंपनियों पर निर्भर हो जाएगा। सरकार को चाहिए कि किसानों को फसलों का वाजिब दाम मिलना चाहिए।
किसने क्या कहा
सपा जिलाध्यक्ष बिल्लू प्रधान का कहना है कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कह रही थी, लेकिन फेल हो गई। अब मुद्दों से किसानों का ध्यान भटकाने के लिए विधेयक लेकर आई है। सरकार कंपनियां को लाभ पहुंचाने की जुगत भिड़ा रही है।
- रालोद जिलाध्यक्ष सुखबीर सिंह गठीना का कहना है कि किसान के खेत में सरकार दखल देने के लिए उतावली क्यों हैं। सरकार को अगर चिंता है तो उसे फसलों का वाजिब दाम दें। विधेयकों से किसान का भला होने वाला नहीं है।
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- भाकियू के जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर का कहना है कि मंडी व्यवस्था खत्म होते ही बाहरी कंपनियों की मनमानी बढ़ जाएगी। किसानों का शोषण होगा। कांट्रेक्ट फार्मिंग के नाम पर कृषि उद्योग का निजीकरण कर दिया जाएगा। किसान मजबूर हो जाएगा।
- भारतीय किसान संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अनु मलिक का कहना है कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। नए कानून से किसान अपनी ही जमीन पर मजदूर बन जाएगा। कंपनियां अपने अनुसार ही खेती कराएगी।
- भाजपा जिलाध्यक्ष सूरजपाल गुर्जर का कहना है कि किसानों के सामने विकल्प बढ़ेंगे। लाभ होगा। किसानों को पूरी तरह जागरूक होने की जरूरत है। किसी तरह का नुकसान होने वाला नहीं है। सरकार किसान हित में विधेयक लेकर आई है।
किस विधेयक में क्या
- कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवधर्न एवं सुविधा) बिल से किसान को फसल सरकारी मंडियों में बेचने की बाध्यता खत्म होगी। किसान अपनी फसल कहीं भी बेच सकेंगे।
- कृषक कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार बिल के जरिये किसान फसल बोने से पहले ही अनुबंध कर सकेगा। अनुबंधित किसानों को समय पर भुगतान की सुविधा।
- आवश्यक वस्तु अधिनियम संशोधन बिल के तहत किसानों को कहीं भी फसल बेचने की छूट होगी। किसानों को उत्पाद, उत्पाद जमा सीमा, आवाजाही और आपूर्ति की छूट होगी।
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- फसलों के वाजिब दाम नहीं मिलने से पहले ही घाटे में किसान
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। कृषि विधेयकों पर सड़क से लेकर संसद तक घमासान मचा है। इसे लेकर आम किसान के मन में संशय के हालात हैं। पीढ़ियों से खेती कर रहे किसानों के बीच कांट्रेक्ट खेती को लेकर रुचि नजर नहीं आ रही है। विपक्ष का कहना है कि किसान के खेत तक कंपनियों का दखल बढ़ेगा। मनमाने भाव तय होंगे और मनचाहा खेत खरीदा जाएगा। आज देश अन्नदाता पर निर्भर है, कल किसान कंपनियों पर निर्भर हो जाएगा। सरकार को चाहिए कि किसानों को फसलों का वाजिब दाम मिलना चाहिए।
किसने क्या कहा
सपा जिलाध्यक्ष बिल्लू प्रधान का कहना है कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कह रही थी, लेकिन फेल हो गई। अब मुद्दों से किसानों का ध्यान भटकाने के लिए विधेयक लेकर आई है। सरकार कंपनियां को लाभ पहुंचाने की जुगत भिड़ा रही है।
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- रालोद जिलाध्यक्ष सुखबीर सिंह गठीना का कहना है कि किसान के खेत में सरकार दखल देने के लिए उतावली क्यों हैं। सरकार को अगर चिंता है तो उसे फसलों का वाजिब दाम दें। विधेयकों से किसान का भला होने वाला नहीं है।
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- भाकियू के जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर का कहना है कि मंडी व्यवस्था खत्म होते ही बाहरी कंपनियों की मनमानी बढ़ जाएगी। किसानों का शोषण होगा। कांट्रेक्ट फार्मिंग के नाम पर कृषि उद्योग का निजीकरण कर दिया जाएगा। किसान मजबूर हो जाएगा।
- भारतीय किसान संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अनु मलिक का कहना है कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। नए कानून से किसान अपनी ही जमीन पर मजदूर बन जाएगा। कंपनियां अपने अनुसार ही खेती कराएगी।
- भाजपा जिलाध्यक्ष सूरजपाल गुर्जर का कहना है कि किसानों के सामने विकल्प बढ़ेंगे। लाभ होगा। किसानों को पूरी तरह जागरूक होने की जरूरत है। किसी तरह का नुकसान होने वाला नहीं है। सरकार किसान हित में विधेयक लेकर आई है।
किस विधेयक में क्या
- कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवधर्न एवं सुविधा) बिल से किसान को फसल सरकारी मंडियों में बेचने की बाध्यता खत्म होगी। किसान अपनी फसल कहीं भी बेच सकेंगे।
- कृषक कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार बिल के जरिये किसान फसल बोने से पहले ही अनुबंध कर सकेगा। अनुबंधित किसानों को समय पर भुगतान की सुविधा।
- आवश्यक वस्तु अधिनियम संशोधन बिल के तहत किसानों को कहीं भी फसल बेचने की छूट होगी। किसानों को उत्पाद, उत्पाद जमा सीमा, आवाजाही और आपूर्ति की छूट होगी।