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दूध के 15 सैपलों की आई रिपोर्ट, नौ हुए फेल
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- खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से इस वित्त वर्ष में भेजे गए थे 37 सैंपल
- जिले में पुराना है दूध में मिलावट का खेल
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जिले में दूध में मिलावट का खेल पुराना है और मिलावट खोरों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया काफी लंबी है। समय-समय पर खाद्य विभाग की ओर से जांच के लिए नमूने तो भेजे जाते है, मगर समय पर रिपोर्ट न मिलने के कारण दूध माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई में देरी हो जाती है। इस वित्तीय वर्ष में विभाग की ओर से भेजे गए 37 नमूनों में से अभी तक केवल 15 की ही रिपोर्ट आई है। इनमें नौ फेल हुए है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी वीके राठी ने बताया कि इस वर्ष में जिले में चेकिंग अभियान चलाकर 37 नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें से विभाग को 15 नमूनों की रिपोर्ट मिली है। इनमें से केवल छह नमूने ही मानक पर पूरे उतरे जबकि नौ नमूने फेल हो गए थे। विभाग की ओर से नौ लोगों के खिलाफ दूध में मिलावट करने पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत वाद दायर कराया गया है। अन्य नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद दूध माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
संक्रमण के कारण रिपोर्ट में हो रही देरी
खाद्य सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि कोरोना संक्रमण की महामारी फैलने के कारण नमूनों की रिपोर्ट में देरी हो रही है। वित्त वर्ष 2020-21 में जिले से भेजे गए दूध के 18 नमूनों की रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है, जबकि वित्त वर्ष 2021-22 के 22 नमूनों की रिपोर्ट भी अभी आनी बाकी है। रिपोर्ट में देरी के चलते दूध माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाई है।
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ऐसे की जाती है दूध में मिलावट
दूध माफिया दूध में मुख्य रुप से पानी की मिलावट करते है। इसके अलावा मिल्क पाउडर से भी दूध तैयार किया जाता है। कुछ मिलावटखोर दूध से क्रीम निकाल कर दूध तैयार करते है। जिले में अभी तक रिफाइंड या अन्य घातक पदार्थों से दूध तैयार करने की पुष्टि नहीं हुई है।
विभाग की ओर से शुरू किया जाएगा अभियान
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि विभाग की ओर से समय-समय पर दूध विक्रेताओं, मिठाई की दुकानों व अन्य प्रतिष्ठानों पर अभियान चलाकर दूध की चेकिंग कराई जाती है। महामारी कम होने पर जिले में फिर से अभियान चलाकर दूध माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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- जिले में पुराना है दूध में मिलावट का खेल
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। जिले में दूध में मिलावट का खेल पुराना है और मिलावट खोरों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया काफी लंबी है। समय-समय पर खाद्य विभाग की ओर से जांच के लिए नमूने तो भेजे जाते है, मगर समय पर रिपोर्ट न मिलने के कारण दूध माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई में देरी हो जाती है। इस वित्तीय वर्ष में विभाग की ओर से भेजे गए 37 नमूनों में से अभी तक केवल 15 की ही रिपोर्ट आई है। इनमें नौ फेल हुए है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी वीके राठी ने बताया कि इस वर्ष में जिले में चेकिंग अभियान चलाकर 37 नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें से विभाग को 15 नमूनों की रिपोर्ट मिली है। इनमें से केवल छह नमूने ही मानक पर पूरे उतरे जबकि नौ नमूने फेल हो गए थे। विभाग की ओर से नौ लोगों के खिलाफ दूध में मिलावट करने पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत वाद दायर कराया गया है। अन्य नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद दूध माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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संक्रमण के कारण रिपोर्ट में हो रही देरी
खाद्य सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि कोरोना संक्रमण की महामारी फैलने के कारण नमूनों की रिपोर्ट में देरी हो रही है। वित्त वर्ष 2020-21 में जिले से भेजे गए दूध के 18 नमूनों की रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है, जबकि वित्त वर्ष 2021-22 के 22 नमूनों की रिपोर्ट भी अभी आनी बाकी है। रिपोर्ट में देरी के चलते दूध माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाई है।
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ऐसे की जाती है दूध में मिलावट
दूध माफिया दूध में मुख्य रुप से पानी की मिलावट करते है। इसके अलावा मिल्क पाउडर से भी दूध तैयार किया जाता है। कुछ मिलावटखोर दूध से क्रीम निकाल कर दूध तैयार करते है। जिले में अभी तक रिफाइंड या अन्य घातक पदार्थों से दूध तैयार करने की पुष्टि नहीं हुई है।
विभाग की ओर से शुरू किया जाएगा अभियान
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि विभाग की ओर से समय-समय पर दूध विक्रेताओं, मिठाई की दुकानों व अन्य प्रतिष्ठानों पर अभियान चलाकर दूध की चेकिंग कराई जाती है। महामारी कम होने पर जिले में फिर से अभियान चलाकर दूध माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।