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रुपयों का इंतजाम नहीं, कैसे बजेगी शहनाई
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Fri, 11 Nov 2016 12:18 AM IST
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बागपत। शादी के सीजन से ठीक पहले आर्थिक सुधार के नाम पर बंद किए गए एक हजार और पांच सौ रुपये के नोट का असर दिखाई देने लगा है। शुक्रवार से शुरू होने जा रहे शुभ मुहूर्त में रुपयों की कमी खलेगी। जिन घरों में शादियां है, वे आज दिनभर बैंकों के चक्कर काटते दिखे। लेकिन यहां कोई राहत नहीं मिली। ऐसे में रस्म पूरी करने तक दोनों पक्षों को पापड़ बेलने पड़ेंगे।
शुक्रवार से शादियों का शुभ मुहूर्त शुरू है। अकेले बागपत जिले में सैकड़ों शादियां हैं। 500 और एक हजार रुपये का नोट बंद हो जाने के कारण बाजारों में सन्नाटा हैं। दुकानदार पुराने नोट लेने को तैयार नहीं है, जबकि जिन घरों में शादियां है, उन्हें सामान चाहिए। कहीं भरोसे पर उधार में सामान दिया गया तो कहीं लोग मायूस है। नगदी इंतजाम के लिए वर और वधू पक्ष बैंकों के चक्कर काटते दिखे। बागपत के पवन पांचाल ने एसबीआई के बैंक मैनेजर से मिलकर बिटिया की शादी की बात कही। उसने कहा कि करीब 50 हजार रुपये की तुरंत आवश्यकता है, लेकिन यहां बात नहीं बनी। अकेले पवन ही नहीं, बैंकों में दिनभर लोग शादी विवाह के कार्ड लेकर आते-जाते रहे।
रस्म में अभी लौटेगा सौ का नोट
शादी की रस्मों में पांच सौ और एक हजार का नोट चलन में आ गया था। लेकिन इस बार यहां भी एक सौ और पचास रुपये का नोट ही चलेगा। इतना तय है कि नोट की कमी के चलते इन्हें भी सीमित ही इस्तेमाल किया जाएगा।
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शुक्रवार से शादियों का शुभ मुहूर्त शुरू है। अकेले बागपत जिले में सैकड़ों शादियां हैं। 500 और एक हजार रुपये का नोट बंद हो जाने के कारण बाजारों में सन्नाटा हैं। दुकानदार पुराने नोट लेने को तैयार नहीं है, जबकि जिन घरों में शादियां है, उन्हें सामान चाहिए। कहीं भरोसे पर उधार में सामान दिया गया तो कहीं लोग मायूस है। नगदी इंतजाम के लिए वर और वधू पक्ष बैंकों के चक्कर काटते दिखे। बागपत के पवन पांचाल ने एसबीआई के बैंक मैनेजर से मिलकर बिटिया की शादी की बात कही। उसने कहा कि करीब 50 हजार रुपये की तुरंत आवश्यकता है, लेकिन यहां बात नहीं बनी। अकेले पवन ही नहीं, बैंकों में दिनभर लोग शादी विवाह के कार्ड लेकर आते-जाते रहे।
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रस्म में अभी लौटेगा सौ का नोट
शादी की रस्मों में पांच सौ और एक हजार का नोट चलन में आ गया था। लेकिन इस बार यहां भी एक सौ और पचास रुपये का नोट ही चलेगा। इतना तय है कि नोट की कमी के चलते इन्हें भी सीमित ही इस्तेमाल किया जाएगा।
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