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नहीं हुई तालाबों की खुदाई, गांवों में घरों तक पहुंचा पानी
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तालाबों की खुदाई हुई नहीं तो कैसे सुधरेगा भूगर्भ जल स्तर
भर गए तालाब, गांवों में लोगों के घरों तक पहुंच रहा गंदा पानी
तालाबों की खुदाई का बजट प्रस्ताव बनाने में ही गुजर गया पूरा साल
बागपत। बरसात से पहले प्रशासनिक अधिकारी तालाबों की खुदाई कराने की बजाय फाइलों की लीपापोती में लगे रहे। जिसका परिणाम यह हुआ कि अब बारिश शुरू होते होते तालाब पानी से लबालब हो गए हैं। गंदा पानी गांवों की गलियों में भरने के साथ साथ लोगों के घरों तक पहुंच रहा है। आए दिन ग्रामीण प्रशासनिक अधिकारियों का घेराव कर रहे हैं। लेकिन प्रशासन है कि कोई समाधान करने को तैयार नहीं है।
जनपद की अधिकतर ग्राम पंचायतों में तालाबों पर अतिक्रमण हो रहे हैं। जिसके कारण गांव का गंदा पानी तालाबों तक पहुंचने की बजाय रास्तों में ही भरा रहता है। बारिश के दौरान पूरा गांव तालाब बन जाता है। जनपद के गांवों में जलभराव के कारण लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो जाते हैं। बरसात से पूर्व मनरेगा के तहत पिलाना ब्लॉक में कुछ तालाबों की सफाई का कार्य कराया गया था, मगर बरसात शुरू होने पर बंद कर दिया गया।
भूगर्भ जल स्तर सुधारने में सहायक होते हैं तालाब
- बागपत का ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में जलस्तर गिरता जा रहा है। काफी इलाके डार्क जोन में चले गए हैं। जल वैज्ञानिक गिरते भूगर्भ जल स्तर को लेकर बेहद चिंतित हैं। शासन स्तर पर भी भूगर्भ जल को बचाने और गिरते जल स्तर को रोकने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चला रही है। जिनमें एक अभियान तालाबों को भी बचाने का है। माना जाता है कि अगर बरसात के पानी को तालाबों में इक्टठा करने के बाद भूगर्भ तक पहुंचाया जाए तो भूगर्भ जल स्तर में काफी सुधार हो सकता है। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के तालाबों की खुदाई तक नहीं हो पा रही है।
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70 फीसदी तालाबों पर हो गया कब्जा
- जनपद में 650 तालाब हैं। इनमें से लगभग 70 प्रतिशत तालाब ऐसे हैं जिनपर लोगों ने कब्जे कर लिए हैं। जिनमें स्थाई और अस्थाई कब्जे हैं। ग्रामीण आए दिन जिले के आला अधिकारियों से शिकायत करते हैं। लेकिन विभागीय अधिकारी हैं कि तालाबों को कब्जा मुक्त कराने की योजना तक नहीं बनाते हैं। जिसका परिणाम है कि आने वाले समय में तालाब अपना अस्तित्व खो देंगे और गिरते भूगर्भ जल स्तर को कोई नहीं बचा पाएगा।
इनका यह है कहना--
- तालाबों की सफाई के लिए बजट तैयार करके शासन को भेजा गया। लेकिन बजट नहीं मिल पाया। जिसके कारण तालाबों की खुदाई और सफाई नहीं हो पायी। ----विपिन त्यागी, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग।
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भर गए तालाब, गांवों में लोगों के घरों तक पहुंच रहा गंदा पानी
तालाबों की खुदाई का बजट प्रस्ताव बनाने में ही गुजर गया पूरा साल
बागपत। बरसात से पहले प्रशासनिक अधिकारी तालाबों की खुदाई कराने की बजाय फाइलों की लीपापोती में लगे रहे। जिसका परिणाम यह हुआ कि अब बारिश शुरू होते होते तालाब पानी से लबालब हो गए हैं। गंदा पानी गांवों की गलियों में भरने के साथ साथ लोगों के घरों तक पहुंच रहा है। आए दिन ग्रामीण प्रशासनिक अधिकारियों का घेराव कर रहे हैं। लेकिन प्रशासन है कि कोई समाधान करने को तैयार नहीं है।
जनपद की अधिकतर ग्राम पंचायतों में तालाबों पर अतिक्रमण हो रहे हैं। जिसके कारण गांव का गंदा पानी तालाबों तक पहुंचने की बजाय रास्तों में ही भरा रहता है। बारिश के दौरान पूरा गांव तालाब बन जाता है। जनपद के गांवों में जलभराव के कारण लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो जाते हैं। बरसात से पूर्व मनरेगा के तहत पिलाना ब्लॉक में कुछ तालाबों की सफाई का कार्य कराया गया था, मगर बरसात शुरू होने पर बंद कर दिया गया।
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भूगर्भ जल स्तर सुधारने में सहायक होते हैं तालाब
- बागपत का ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में जलस्तर गिरता जा रहा है। काफी इलाके डार्क जोन में चले गए हैं। जल वैज्ञानिक गिरते भूगर्भ जल स्तर को लेकर बेहद चिंतित हैं। शासन स्तर पर भी भूगर्भ जल को बचाने और गिरते जल स्तर को रोकने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चला रही है। जिनमें एक अभियान तालाबों को भी बचाने का है। माना जाता है कि अगर बरसात के पानी को तालाबों में इक्टठा करने के बाद भूगर्भ तक पहुंचाया जाए तो भूगर्भ जल स्तर में काफी सुधार हो सकता है। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के तालाबों की खुदाई तक नहीं हो पा रही है।
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70 फीसदी तालाबों पर हो गया कब्जा
- जनपद में 650 तालाब हैं। इनमें से लगभग 70 प्रतिशत तालाब ऐसे हैं जिनपर लोगों ने कब्जे कर लिए हैं। जिनमें स्थाई और अस्थाई कब्जे हैं। ग्रामीण आए दिन जिले के आला अधिकारियों से शिकायत करते हैं। लेकिन विभागीय अधिकारी हैं कि तालाबों को कब्जा मुक्त कराने की योजना तक नहीं बनाते हैं। जिसका परिणाम है कि आने वाले समय में तालाब अपना अस्तित्व खो देंगे और गिरते भूगर्भ जल स्तर को कोई नहीं बचा पाएगा।
इनका यह है कहना--
- तालाबों की सफाई के लिए बजट तैयार करके शासन को भेजा गया। लेकिन बजट नहीं मिल पाया। जिसके कारण तालाबों की खुदाई और सफाई नहीं हो पायी। ----विपिन त्यागी, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग।