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‘घर में सुख-शांति के लिए जरूर पढ़ें शिव महापुराण’
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अग्रसैन भवन में श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन पाठ करते आचार्य
- फोटो : BARAUT
बड़ौत। अग्रसेन भवन में शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन सुबह-शाम भगवान भोलेनाथ के नाम का जाप करने के लिए श्रद्धालुओं को प्रेरित किया।
शुक्रताल तीर्थ से आए हुए आचार्य कृष्णा पांडे ने कहा कि घर में हमेशा सुख-शांति के लिए एक-दूसरे का सम्मान करने के साथ-साथ सप्ताह में कम से कम एक बार यज्ञ और शिव महापुराण पढ़नी चाहिए। परमहंस डॉ. मुक्तानंद पुरी महाराज ने कहा कि एक ही परमात्मा है, जो सदचित आनंद स्वरूप है। वही एक परमात्मा अव्यक्त से व्यक्त होता है, अनेक रूप और अनेक नामों को धारण करता है, वेदों में उसे शिव कहते हैं।
उन्होंने बताया कि तारकासुर के आतंक से जब पृथ्वी त्राहि-त्राहि कर रही थी, तब भगवान विष्णु आदि देवता शिव से प्रार्थना करते हैं। भगवान शंकर का प्रथम विवाह दक्ष कन्या माता सती के साथ हुआ, क्योंकि तारकासुर का वध भगवान शिव के औरस पुत्र के हाथों ही संभव था। दक्ष के भगवान भोलेनाथ से विद्वेष रखने के कारण माता सती ने दक्ष के यज्ञ में अपने शरीर को आहुत कर दिया। भगवान महादेव का दूसरा विवाह हिमालय पुत्री माता पार्वती के साथ हुआ।
माता पार्वती ने विवाह पूर्व भगवान शंकर की समाधि को समाधि से जागृत करने के लिए घोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने माता पार्वती के साथ विवाह किया। मौके पर राजीव गठिना, सुभाष शर्मा, आजाद वर्मा, राजेंद्र भारद्वाज, डॉक्टर अखिलेश शर्मा, देव कुमार शर्मा, राज कुमार गोयल, सुरेंद्र मित्तल, धर्म प्रकाश वर्मा, माया, शकुंतला, अंजू सुधा, सुरेंद्र कुचल शामिल रहे।
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शुक्रताल तीर्थ से आए हुए आचार्य कृष्णा पांडे ने कहा कि घर में हमेशा सुख-शांति के लिए एक-दूसरे का सम्मान करने के साथ-साथ सप्ताह में कम से कम एक बार यज्ञ और शिव महापुराण पढ़नी चाहिए। परमहंस डॉ. मुक्तानंद पुरी महाराज ने कहा कि एक ही परमात्मा है, जो सदचित आनंद स्वरूप है। वही एक परमात्मा अव्यक्त से व्यक्त होता है, अनेक रूप और अनेक नामों को धारण करता है, वेदों में उसे शिव कहते हैं।
उन्होंने बताया कि तारकासुर के आतंक से जब पृथ्वी त्राहि-त्राहि कर रही थी, तब भगवान विष्णु आदि देवता शिव से प्रार्थना करते हैं। भगवान शंकर का प्रथम विवाह दक्ष कन्या माता सती के साथ हुआ, क्योंकि तारकासुर का वध भगवान शिव के औरस पुत्र के हाथों ही संभव था। दक्ष के भगवान भोलेनाथ से विद्वेष रखने के कारण माता सती ने दक्ष के यज्ञ में अपने शरीर को आहुत कर दिया। भगवान महादेव का दूसरा विवाह हिमालय पुत्री माता पार्वती के साथ हुआ।
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माता पार्वती ने विवाह पूर्व भगवान शंकर की समाधि को समाधि से जागृत करने के लिए घोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने माता पार्वती के साथ विवाह किया। मौके पर राजीव गठिना, सुभाष शर्मा, आजाद वर्मा, राजेंद्र भारद्वाज, डॉक्टर अखिलेश शर्मा, देव कुमार शर्मा, राज कुमार गोयल, सुरेंद्र मित्तल, धर्म प्रकाश वर्मा, माया, शकुंतला, अंजू सुधा, सुरेंद्र कुचल शामिल रहे।
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