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जियो टैगिंग से की जा रही निगरानी

Tue, 20 Jul 2021 12:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jul 2021 12:09 AM IST
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monitoring through geo tagging
बागपत। डिजिटल क्रांति के युग में चीजें तेजी के बदल रही हैं। कई क्षेत्रों में निगरानी को भी तकनीक आधारित कर दिया है। सरकारी योजनाओं की निगरानी के लिए जियो टैगिंग कराया जाना आम हो गया है। विभिन्न विभागों के विकास कार्यों की प्रगति जानने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके सकारात्मक नतीजे भी सामने आ रहे हैं।
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क्या है जियो टैगिंग
जियो टैगिंग का अर्थ कार्य की भौगोलिक स्थिति, फोटो, मैप और वीडियो के जरिए सटीक जानकारी देना है। इससे अक्षांश व देशांतर से उस जगह की लोकेशन जानी जाती है। इससे गूगल मैप देखकर जगह का आसानी से पता किया जाता है। इसके अतिरिक्त अन्य चीजें भी इससे जोड़ी जा सकती हैं। अब मनरेगा अंतर्गत होने वाले कार्यों की स्थिति व सरकारी योजना के तहत निर्माण कार्यों की भी जियो टैंगिंग हो रही है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि कार्य की क्या स्थिति है और कितना धन खर्च हो रहा है। इससे फर्जीवाड़ा नहीं हो पाएगा।
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मोबाइल एप और पोर्टल के जरिए निगरानी
जियो टैगिंग वाले कार्य पोर्टल या वेबसाइट पर अपलोड किए जाते हैं। इसमें कार्य शुरू होने से पहले की स्थिति, 50 फीसदी कार्य होने और कार्य पूरा होने की स्थिति की जानकारी व फोटो अपलोड किए जाते हैं। जिससे अनियमितता की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाती है। पहले विकास कार्य धरातल की बजाय कागजों में ही पूरे कर भुगतान जारी कर दिया जाता था। इसलिए ज्यादातर विभाग विकास कार्यों की जियो टैगिंग कराते हैं। इससे विभाग के कार्यों को मोबाइल एप के जरिए कहीं भी देखा जा सकता है।
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टीबी के मरीजों की भी जियो टैगिंग
स्वास्थ्य विभाग अब टीबी के मरीजों की भी जियो टैगिंग करा रहा है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. यशवीर सिंह ने बताया कि जियो टैगिंग के माध्यम से मरीज की भौगोलिक जानकारी फोटो, नक्शे और वीडियो के माध्यम से उपलब्ध रहेगी। मरीज के संपर्क में बने रहने के लिए यह बहुत मददगार है। जियो टैगिंग के माध्यम से यह भी पता लगाया जा सकता है कि क्षेत्र में कितने क्षय रोगी हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इस अभियान के तहत जिले में अब तक लगभग 1200 फीसदी टीबी मरीजों का डेटा अपलोड किया जा चुका है।
लोगों की मदद के लिए किया इस्तेमाल
प्रदेश सरकार ने कोरोना काल में लोगों की मदद के लिए जियो टैगिंग का इस्तेमाल किया था। कई जिलों में कम्युनिटी किचन और आश्रय स्थल की जियो टैगिंग कराई थी। जिससे लोगों को खाने और ठहरने के लिए स्थान तलाश करने में दिक्कत का सामना न करना पड़े। यूपी ऐसा करने वाला पहला राज्य बना था।
इनकी भी हो रही जियो टैगिंग
सरकार की ओर से मनरेगा के कार्य, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, विकास कार्यों, टीबी व कैंसर के मरीजों, पौधों, तालाबों, अवैध निर्माणों, राशन की दुकानों, संपत्तियों, पशुओं, खनन पट्टों आदि की जियो टैगिंग कराई जा रही है।

जियो टैगिंग के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। इससे कई विभागों की योजनाओं की निगरानी रखना काफी आसान है। सरकार भी इसे अपनाने पर जोर दे रही है।-राजकमल यादव, डीम बागपत
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