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15 साल बाद घर लौटी लापता महिला
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Tue, 01 Sep 2015 12:53 AM IST
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बागपत के खेकड़ा नगर से 15 वर्ष पूर्व लापता महिला सोमवार को अचानक अपने घर पहुंची। उसके बच्चों ने उसे पहचान लिया। मां बेटा गले मिलकर रोने लगे। साथ ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।
नगर में माता वाली गली में रहने वाले रामदास की पत्नी उर्मिला देवी करीब 15 वर्ष पूर्व 1999 में दिमागी संतुलन खराब होने के कारण बीमार रहने लगी थी। इसी दौरान वह घर से निकल कर चली गई। परिजनों ने चारों ओर उर्मिला की खोज की, लेकिन उसका कोई पता नही चल सका। इस दौरान 2009 में रामदास की मौत हो गई।
घर में पुत्री रीना की शादी हो गई। घर में दो बेटे रविंद्र और सुरेंद्र रह गए। सोमवार को अचानक ईसाई मिशनरी की गाड़ी में दो लोग आए। उनके साथ उर्मिला देवी भी थी। घर में छोटा बेटा सुरेंद्र था। मां को देखते ही सुरेंद्र ने उसे पहचान लिया और गले लगकर रो पड़ा। उर्मिला भी अपने घर को पहचान कर रो पड़ी।
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ईसाई मिशनरी के अरुण जोन ने बताया कि उनके मिशन के लोगों को यह महिला लावारिस हालत में ट्रेन में मिली थी। यह महिला कुछ भी नही बता पा रही थी। बंगाल के मदर टेरेसा आश्रम में इसको शरण दी गई। वहां वर्षों तक इसने कुछ नही बताया और अन्य महिलाओं के साथ रहती रही।
अब करीब एक सप्ताह पूर्व इसकी यादें लौट आई। उसने मिशन के संचालक के सामने मेरठ जिला, खेकड़ा पुराना थाना आदि का जिक्र किया। वे लोग इसको लेकर आ गए। दिन भर महिला को देखने के लिये उनके घर लोगों का आवागमन लगा रहा।
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नगर में माता वाली गली में रहने वाले रामदास की पत्नी उर्मिला देवी करीब 15 वर्ष पूर्व 1999 में दिमागी संतुलन खराब होने के कारण बीमार रहने लगी थी। इसी दौरान वह घर से निकल कर चली गई। परिजनों ने चारों ओर उर्मिला की खोज की, लेकिन उसका कोई पता नही चल सका। इस दौरान 2009 में रामदास की मौत हो गई।
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घर में पुत्री रीना की शादी हो गई। घर में दो बेटे रविंद्र और सुरेंद्र रह गए। सोमवार को अचानक ईसाई मिशनरी की गाड़ी में दो लोग आए। उनके साथ उर्मिला देवी भी थी। घर में छोटा बेटा सुरेंद्र था। मां को देखते ही सुरेंद्र ने उसे पहचान लिया और गले लगकर रो पड़ा। उर्मिला भी अपने घर को पहचान कर रो पड़ी।
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ईसाई मिशनरी के अरुण जोन ने बताया कि उनके मिशन के लोगों को यह महिला लावारिस हालत में ट्रेन में मिली थी। यह महिला कुछ भी नही बता पा रही थी। बंगाल के मदर टेरेसा आश्रम में इसको शरण दी गई। वहां वर्षों तक इसने कुछ नही बताया और अन्य महिलाओं के साथ रहती रही।
अब करीब एक सप्ताह पूर्व इसकी यादें लौट आई। उसने मिशन के संचालक के सामने मेरठ जिला, खेकड़ा पुराना थाना आदि का जिक्र किया। वे लोग इसको लेकर आ गए। दिन भर महिला को देखने के लिये उनके घर लोगों का आवागमन लगा रहा।