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अस्पताल में खराब हुई मशीन, रक्त जांच में 600 रुपये हो रहे खर्च
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बागपत जिला अस्पताल स्थित खून की जांच के लिए परेशान लोग
- फोटो : BAGHPAT
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जिला अस्पताल में 100 से ज्यादा मरीजों की जेब हो रही ढीली
मरीज निजी लैब में जांच कराने के लिए विवश
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। स्वास्थ्य विभाग की बेहतर सुविधाएं देने के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। जिला अस्पताल में हर माह खून की जांच की मशीन खराब पड़ी रहती है। जिसके चलते जांच मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। वे 600 रुपये खर्च कर निजी प्रयोगशाला में जांच कराने के लिए मजबूर हैं।
जिला अस्पताल में खून की जांच की मशीन खराब होने से जांच बंद हैं। रोजाना 100 से अधिक मरीजों को अस्पताल से बिना जांच कराए लौटना पड़ रहा है। मरीजों को निजी प्रयोगशाला का ही सहारा रह गया है। इससे उनकी जेब पर बोझ पड़ रहा है। मरीजों को जांच के लिए 500 से 600 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मशीनों की मेंटिनेंस की वैद्यता दिसंबर से समाप्त हो चुकी है। जिला स्तर से अभी वैद्यता नहीं बढ़वाई गई है। मशीन को ठीक कराने के लिए प्राइवेट इंजीनियर की व्यवस्था कराई जा रही है।
मरीजों को उठानी पड़ रही परेशानी
जिला अस्पताल में शुक्रवार को जांच कराने पहुंची पुराना कस्बा की रुबी ने बताया कि वह चिकित्सक की सलाह पर लीवर की जांच कराने आई थीं। लैब में मशीन खराब होने के कारण जांच नहीं हो सकी है। अब उन्हें प्राइवेट लैब से जांच करानी पड़ेगी। निनाना के बिट्टूू ने बताया कि जांच कराने के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं, मगर मशीन खराब होने के कारण जांच नहीं हो पा रही है।
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वर्जन-
जिला अस्पताल की लैब मेंटिनेंस की वैद्यता दिसंबर में समाप्त हो गई है। मशीन ठीक कराने के लिए निजी इंजीनियर से बात की गई है। मशीनें ठीक कराकर जल्द ही जांच शुरू की जाएगी।-डॉ. दिनेश कुमार, सीएमओ
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मरीज निजी लैब में जांच कराने के लिए विवश
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। स्वास्थ्य विभाग की बेहतर सुविधाएं देने के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। जिला अस्पताल में हर माह खून की जांच की मशीन खराब पड़ी रहती है। जिसके चलते जांच मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। वे 600 रुपये खर्च कर निजी प्रयोगशाला में जांच कराने के लिए मजबूर हैं।
जिला अस्पताल में खून की जांच की मशीन खराब होने से जांच बंद हैं। रोजाना 100 से अधिक मरीजों को अस्पताल से बिना जांच कराए लौटना पड़ रहा है। मरीजों को निजी प्रयोगशाला का ही सहारा रह गया है। इससे उनकी जेब पर बोझ पड़ रहा है। मरीजों को जांच के लिए 500 से 600 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मशीनों की मेंटिनेंस की वैद्यता दिसंबर से समाप्त हो चुकी है। जिला स्तर से अभी वैद्यता नहीं बढ़वाई गई है। मशीन को ठीक कराने के लिए प्राइवेट इंजीनियर की व्यवस्था कराई जा रही है।
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मरीजों को उठानी पड़ रही परेशानी
जिला अस्पताल में शुक्रवार को जांच कराने पहुंची पुराना कस्बा की रुबी ने बताया कि वह चिकित्सक की सलाह पर लीवर की जांच कराने आई थीं। लैब में मशीन खराब होने के कारण जांच नहीं हो सकी है। अब उन्हें प्राइवेट लैब से जांच करानी पड़ेगी। निनाना के बिट्टूू ने बताया कि जांच कराने के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं, मगर मशीन खराब होने के कारण जांच नहीं हो पा रही है।
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जिला अस्पताल की लैब मेंटिनेंस की वैद्यता दिसंबर में समाप्त हो गई है। मशीन ठीक कराने के लिए निजी इंजीनियर से बात की गई है। मशीनें ठीक कराकर जल्द ही जांच शुरू की जाएगी।-डॉ. दिनेश कुमार, सीएमओ