Baghpat: ताक पर नियम जोखिम में जान, जितनी सवारी बस के अंदर उतनी ही छत पर, लटक कर भी कर रहे सफर
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उत्तर प्रदेश के बड़ौत-छपरौली मार्ग पर जान को हथेली पर रखकर छात्र व यात्री सफर करने को मजबूर हैं, लेकिन न तो इस ओर रोडवेज विभाग के अधिकारी ध्यान दे रहे हैं और ना ही पुलिस प्रशासन व प्रशासनिक अधिकारी। वही समस्या को लेकर यात्रियों में आक्रोश पनप जा रहे हैं।
बसों के ऊपर, खिड़की पर और पीछे भी लटकी सवारियां
लोग बस की छतों पर बैठकर व पीछे लटककर मलकपुर, सिनौली, आर्दश नंगला, शबगा, बदरखा, ककौर, कुर्डी,छपरौली, टांडा सहित कई स्थानों के लिए सफर करते हैं। इसमें ज्यादातर नौजवान व छात्र होते हैं, जो बस की छतों पर बैठ कर सवारी करना अपनी शान समझते हैं।
ट्रैफिक नियमों को धता बताकर सड़कों पर प्रतिदिन ऐसी कई बसें दौड़ रही हैं। आए दिन सड़कों पर इस तरह कि दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। इसके बावजूद रोडवेज प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
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ऐसे में अगर लोग जानबूझकर बसों की छत पर बैठकर सवारी करते हैं तो निश्चित रूप से प्रशासन की निष्क्रियता साफ झलक रही है। इतना ही नहीं सड़कों के किनारे बिजली के नंगे तार छत पर बैठे लोगों को अपनी चपेट में लेने के लिए सदैव खतरे का संकेत देते रहते हैं। जिससे छत पर बैठे लोगों के गिरने का डर भी बना रहता है।
यात्रियों में मनोज कुमार, अनिल, पंकज कुमार, अखिलेश सहित कई लोगों ने बताया कि यह एक दुर्भाग्य है कि लोग बस की छत पर बैठकर खतरों के साथ यात्रा करते हैं। रोडवेज प्रशासन को भी इस ओर पहल करने की जरूरत है।
जितनी सवारी अन्दर उतनी ऊपर
इन बस में हालत यह है कि जितनी सवारी बस के अन्दर बैठी होती है लगभग उतनी ही सवारी वह बस के ऊपर बैठा कर चलते हैंं। इस प्रकार बस मालिकों की दोहरी कमाई हो रही है। उन्हें इस बात की बिल्कुल चिंता नहीं है कि अगर अधिक वजन से बस असंतुलित होकर पलट जाती है तो कितने लोगों की जिंदगियां एक झटके में समाप्त हो जाएंगी।