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कृष्णा और हिंडन नदी देखने पहुंची फ्रांस की टीम
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
Updated Mon, 09 May 2016 01:17 AM IST
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दाहा गांव में कृष्णा और हिंडन नदियों में प्रदूषण की जानकारी के लिए डॉ. चंद्रवीर के आवास पर पहुंची फ्रांस की टीम।
- फोटो : अमर उजाला
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दोघट। फ्रांस देश से प्रदूषित कृष्णा और हिंडन नदी की जानकारी के लिए टीम चौगामा क्षेत्र पहुंची। इस टीम ने दोनों नदियों के किनारे बसे गांवों में पहुंचकर हालात का जायजा भी लिया।
फ्रांस से पहुंची टरडी हैरीस, लैला और साजिद की तीन सदस्यीय टीम रविवार को दोआब पर्यावरण समिति दाहा के चेयरमैन डॉ. चंद्रवीर सिंह के आवास पर पहुंची और उनसे कृष्णा और हिंडन नदी के बारे में जानकारी ली। डॉ. चंद्रवीर सिंह राणा ने टीम को बताया दोनों नदियों के प्रदूषण के हालात पर दुनिया भर में चर्चा हो चुकी है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि सरकार द्वारा धरातल पर कोई काम होता नजर नहीं आ रहा है।
उन्होंने बताया छह जिलों में स्थिति ज्यों की त्यों बनी है। नदियों के किनारे बस सभी गांवों के हैंडपंप दूषित पानी दे रहे हैं, इन्हें अभी तक भी सील नहीं किया । शुद्ध पेयजल की उपलब्धता किसी भी गांव में नहीं कराई और न ही पेयजल को किसी अन्य साधनों द्वारा गांव वालों को मुहैय्या कराया। जबकि एनजीटी ने जिन वाहनों से जल को भेजना था, उन पर जीपीएस लगाने को कहा था, ताकि वाहनों की निगरानी की जा सके कि पानी उक्त गांव में भेजा या नहीं।
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उन्होंने बताया कारखानों के पानी की जांच रिपोर्ट भी एनजीटी के आदेश के अनुसार मांगी, वह भी अभी तक उप्र प्रदूषण विभाग ने एनजीटी में दाखिल नहीं की। क्षेत्र में रहने वाले किसान और मजदूर गंदा और प्रदूषित जल पीने को मजबूर हैं और पानी से होने वाली बीमारियों ने कृष्णा, हिंडन और काली नदी के किनारे वाले ग्रामवासियों को घेर रखा है।
उन्होंने बताया दोआब पर्यावरण समिति ने उप्र जल निगम द्वारा इस इलाके के सभी हैंडपंपों की रिपोर्ट को गलत ठहराया। एनजीटी ने समिति के इस बयान को ठीक माना और दोबारा से सभी गांवों के पानी की जांच करने के आदेश दिए। एनजीटी इस मुद्दे पर गंभीर है, लेकिन सरकार की प्रतिक्रिया इस विषय में एक प्रश्न चिह्न लिए हुए है। उन्होंने बताया यदि सरकार की कार्यशैली इसी तरह की रही तो इतनी भयंकर बीमारियां इस क्षेत्र में विकराल रूप ले लेगी कि आने वाली पीढ़ी पर इसका जबरदस्त दुष्प्रभाव पड़ेगा और इन इलाकों में पीने के पानी के लाले पड़ जाएंगे।
उन्होंने बताया पानी की गुणवत्ता जो खराब हो चुकी है, उसे ठीक करने में कई दशक लग जाएंगे और इस पर सहारनपुर से लेकर गाजियाबाद तक के क्षेत्रों में कई हजार करोड़ रुपये सरकार को खर्च करने होंगे। तब जाकर यह शुरू हो सकेगा। फ्रांस की टीम दोनों नदियों की हालत और पानी की स्थिति को देखकर दंग रह गई। उनका मानना था कि इतना प्रदूषण उन्हें आज तक देखने को नहीं मिला।
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फ्रांस से पहुंची टरडी हैरीस, लैला और साजिद की तीन सदस्यीय टीम रविवार को दोआब पर्यावरण समिति दाहा के चेयरमैन डॉ. चंद्रवीर सिंह के आवास पर पहुंची और उनसे कृष्णा और हिंडन नदी के बारे में जानकारी ली। डॉ. चंद्रवीर सिंह राणा ने टीम को बताया दोनों नदियों के प्रदूषण के हालात पर दुनिया भर में चर्चा हो चुकी है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि सरकार द्वारा धरातल पर कोई काम होता नजर नहीं आ रहा है।
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उन्होंने बताया छह जिलों में स्थिति ज्यों की त्यों बनी है। नदियों के किनारे बस सभी गांवों के हैंडपंप दूषित पानी दे रहे हैं, इन्हें अभी तक भी सील नहीं किया । शुद्ध पेयजल की उपलब्धता किसी भी गांव में नहीं कराई और न ही पेयजल को किसी अन्य साधनों द्वारा गांव वालों को मुहैय्या कराया। जबकि एनजीटी ने जिन वाहनों से जल को भेजना था, उन पर जीपीएस लगाने को कहा था, ताकि वाहनों की निगरानी की जा सके कि पानी उक्त गांव में भेजा या नहीं।
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उन्होंने बताया कारखानों के पानी की जांच रिपोर्ट भी एनजीटी के आदेश के अनुसार मांगी, वह भी अभी तक उप्र प्रदूषण विभाग ने एनजीटी में दाखिल नहीं की। क्षेत्र में रहने वाले किसान और मजदूर गंदा और प्रदूषित जल पीने को मजबूर हैं और पानी से होने वाली बीमारियों ने कृष्णा, हिंडन और काली नदी के किनारे वाले ग्रामवासियों को घेर रखा है।
उन्होंने बताया दोआब पर्यावरण समिति ने उप्र जल निगम द्वारा इस इलाके के सभी हैंडपंपों की रिपोर्ट को गलत ठहराया। एनजीटी ने समिति के इस बयान को ठीक माना और दोबारा से सभी गांवों के पानी की जांच करने के आदेश दिए। एनजीटी इस मुद्दे पर गंभीर है, लेकिन सरकार की प्रतिक्रिया इस विषय में एक प्रश्न चिह्न लिए हुए है। उन्होंने बताया यदि सरकार की कार्यशैली इसी तरह की रही तो इतनी भयंकर बीमारियां इस क्षेत्र में विकराल रूप ले लेगी कि आने वाली पीढ़ी पर इसका जबरदस्त दुष्प्रभाव पड़ेगा और इन इलाकों में पीने के पानी के लाले पड़ जाएंगे।
उन्होंने बताया पानी की गुणवत्ता जो खराब हो चुकी है, उसे ठीक करने में कई दशक लग जाएंगे और इस पर सहारनपुर से लेकर गाजियाबाद तक के क्षेत्रों में कई हजार करोड़ रुपये सरकार को खर्च करने होंगे। तब जाकर यह शुरू हो सकेगा। फ्रांस की टीम दोनों नदियों की हालत और पानी की स्थिति को देखकर दंग रह गई। उनका मानना था कि इतना प्रदूषण उन्हें आज तक देखने को नहीं मिला।