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Baghpat News: पुस्तकालयों में नहीं मिल रहा ज्ञान, सामान रखने को बनाए गोदाम

Fri, 30 Aug 2024 03:47 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत Updated Fri, 30 Aug 2024 03:47 AM IST
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Knowledge is not available in libraries, warehouses are built to keep things
बागपत। जिले में लाखों रुपये खर्च करके बनाए गए 20 पुस्तकालयों में किताबें ही नहीं है और उनपर ताला लटका हुआ है। कई जगह पुस्तकालय में झाड़ू, फावड़े सहित अन्य सामान रखने को गोदाम बना दिए गए हैं। किताबें नहीं होने के कारण युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए बागपत व बड़ौत की तरफ जाना पड़ रहा है।
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ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दूर नहीं जाना पड़े। इसलिए ही गांवों में पुस्तकालय बनाए गए थे। पुस्तकालय बनाने में 40 लाख रुपये से अधिक का बजट खर्च किया गया था। मगर 38 पुस्तकालय में से 20 में आज तक किताबें तक नहीं है। इनमें अधिकतर ऐसे पुस्तकालय है, जहां फर्नीचर व अन्य सुविधाएं है और केवल किताबों के बिना वह बेकार है।
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इसलिए ही किसी जगह फर्नीचर पर धूल जम रही है तो किसी जगह ताले लटके हुए है। इस तरह लाखों रुपये खर्च करके भी युवाओं को उनका फायदा नहीं मिल रहा है।
- सरूरपुर, खेड़की, सिसाना व गढी कलंजरी में लटका ताला
सिसाना, सरूरपुर, खेड़की व गढ़ी कलंजरी गांव में बने पुस्तकालयों पर ताला लटका हुआ है। सिसाना गांव में लगे फर्नीचर पर धूल चढ़ी हुई है तो सरूरपुर कला गांव के पुस्तकालय में फर्नीचर पर धूल तो चढ़ी हुई है साथ ही परिसर में झाड़ू, फावड़े व अन्य सामान रखा हुआ है। वहां लगा फर्नीचर भी खराब होने लगा है। ऐसे में इनका युवाओं को कोई फायदा तक नहीं हो पा रहा है।
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- ट्योढ़ी में कुर्सी व किताबें, फिर भी नहीं मिल रहा लाभ
ट्योढ़ी गांव के पुस्तकालय में कुर्सी व किताबें होने के बाद भी यहां ताला लगा रहता है। युवाओं को इसका भी कोई लाभ तक नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में युवाओं को काफी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि अधिकतर समय पुस्तकालय बंद रहता है और यहां कभी-कभी युवा पढ़ाई करने के लिए आते हैं। किताबें व कुर्सी रखी हुई, लेकिन बंद होने के कारण काफी युवाओं को वापस जाना पड़ता है।

- पंचायतघर में पुस्तकालय तो बना दिया गया, लेकिन यहां किसी भी तरह की कोई सुविधा नहीं है। गांव में सबसे ज्यादा युवा पुलिस की तैयारी करते हैं। इसके बाद भी पुस्तकालय में झाड़ू व अन्य सामान रखकर युवाओं के साथ मजाक किया जा रहा है। - नीटू नैन, सरूरपुर

- गांव में पुस्तकालय बना दिया है, लेकिन जब से यह बना है तब से ताला ही लगा हुआ है। यहां किसी भी तरह की किताब नहीं है। ऐसे में युवाओं को कोचिंग करने के लिए बागपत जाना पड़ता है। - सत्यम, सिसाना

- पुस्तकालय बन गया, लेकिन पुस्तक उपलब्ध नहीं हो रही है। पुस्तकालय में यदि सभी तरह की पुस्तक होगी तो युवाओं को किसी अन्य स्थानों पर नहीं जाना पड़ेगा। पुस्तकालय में किताबें रखवाकर उनको समय पर खुलवाने की व्यवस्था करानी चाहिए। - अमन कुमार, ट्योढ़ी

- पुस्तकालय पर ताला लगा रहता है। यहां युवाओं के लिए कोई सुविधा नहीं है। लाखों रुपये खर्च कर दिए, फिर भी पुस्तकें तक नहीं रखी गई। ऐसे में सरकारी बजट की बर्बादी की जा रही है। जब पुस्तकालय बनाया गया तो यहां युवाओं के लिए सुविधा देनी चाहिए। - अभिषेक शर्मा, खेड़की


वर्जन
- जल्द ही सभी पुस्तकालयों में पुस्तकों की व्यवस्था कराई जाएगी। बजट के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। बजट आने के बाद सभी पुस्तकालयों में पुस्तक उपलब्ध कराई जाएगी। जिससे युवा उनमें पढ़ाई कर सके। - अरुण अत्री, डीपीआरओ
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