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बच्चों को बीमार कर रही जंक फूड की लत
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बच्चों को बीमार कर रही जंक फूड की लत
बड़ौत। बच्चों की जंक फूड की लत न सिर्फ अभिभावकों के लिए मुसीबत बन गई है, बल्कि बच्चों को बीमार कर रही है। जनपद में बच्चों के मोटापा, पेट में दर्द, उल्टी, दस्त, होमीग्लोबिन की कमी, सिरदर्द से संबंधित मामले बढ़ रहे हैं। सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में 550 से 600 बच्चों को लेकर अभिभावक पहुंचे रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद में आठ सीएचसी, 23 पीएचसी और एक जिला अस्पताल के अलावा ढेर सारे निजी अस्पताल संचालित हैं। जिनमें प्रतिदिन 550 से 600 अभिभावक जंक फूड से बीमार हुए अपने बच्चों को लेकर आ रहे हैं। बच्चों में चाऊमीन, बर्गर, मोमोज सहित अन्य जंक फूड खाने की आदत तेजी से बढ़ रही है।
- बच्चों में मधुमेह का सात गुना खतरा
जिला बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. असद अली ने बताया कि नूडल्स, पेटीज, चिप्स समेत अन्य फास्ट फूड में नमक, रंग समेत अन्य तत्वों की मात्रा कई गुना होती है। इन्हें लंबे समय तक खाने से बच्चों में मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह का खतरा सात गुना तक बढ़ जाता है। किडनी लीवर की क्षमता भी प्रभावित होती है। मैदा और ट्रांसफैट के कारण बच्चों की सेहत को प्रभावित कर रही है।
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- अजीनोमोटो से स्वाद कलिकाएं हो रहीं प्रभावित
आस्था नर्सिंग अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव तोमर के अनुसार जीभ की ऊपरी सतह पर लाल दाने के रूप में स्वाद कलिकाएं होती हैं। लार के जरिये ये खट्टा, मीठा, कड़वा और नमकीन स्वाद बतातीं हैं। जंक फूड में अजीनोमोटो समेत अन्य रसायन होते हैं, इनके खाने, पीने से जीभ में इनके प्रति नया स्वाद पनपता है। ऐसी स्थिति में बच्चों को दाल, हरी सब्जी समेत पौष्टिक आहार अच्छा नहीं लगता।
- ये बोली मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष
दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज की मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अंशु अग्रवाल के मुताबिक बच्चों को जब पसंदीदा फास्ट फूड नहीं मिलते तो उनमें गुस्सा करना, खाना फेंक देना, सामान फेंकना, जोर-जोर से चिल्लाना जैसे विकार पनपने लगते हैं। ऐसा होने पर परिजन फास्ट फूड उपलब्ध करा देते हैं। इससे बच्चे में विकार और बढ़ जाते हैं। इसलिए अभिभावकों को बच्चों को मारने-पीटने की बजाए जंक-फूड से होने वाली बीमारी के बारे में बताना चाहिए।
- दवाइयाें पर हो रहे छह लाख रुपये खर्च
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र पंवार ने अनुसार जनपद में 280 रिटेल व 80 होल सेल मेडिकल स्टोर है। जिन पर पिछले छह माह में जंक फूड खाने से बच्चों में होने वाली बीमारी से संबंधित ऑक्टेरोटाइड, फोलिक एसिड, मेट्रोनिडाजोल सहित बच्चों से संबंधित अन्य दवाईयों की खपत बढ़ गई है। अभिभावकों को जंक फूड से बच्चों में होने वाली बीमारियों की दवाइयां हर माह लगभग छह लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
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बड़ौत। बच्चों की जंक फूड की लत न सिर्फ अभिभावकों के लिए मुसीबत बन गई है, बल्कि बच्चों को बीमार कर रही है। जनपद में बच्चों के मोटापा, पेट में दर्द, उल्टी, दस्त, होमीग्लोबिन की कमी, सिरदर्द से संबंधित मामले बढ़ रहे हैं। सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में 550 से 600 बच्चों को लेकर अभिभावक पहुंचे रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद में आठ सीएचसी, 23 पीएचसी और एक जिला अस्पताल के अलावा ढेर सारे निजी अस्पताल संचालित हैं। जिनमें प्रतिदिन 550 से 600 अभिभावक जंक फूड से बीमार हुए अपने बच्चों को लेकर आ रहे हैं। बच्चों में चाऊमीन, बर्गर, मोमोज सहित अन्य जंक फूड खाने की आदत तेजी से बढ़ रही है।
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- बच्चों में मधुमेह का सात गुना खतरा
जिला बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. असद अली ने बताया कि नूडल्स, पेटीज, चिप्स समेत अन्य फास्ट फूड में नमक, रंग समेत अन्य तत्वों की मात्रा कई गुना होती है। इन्हें लंबे समय तक खाने से बच्चों में मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह का खतरा सात गुना तक बढ़ जाता है। किडनी लीवर की क्षमता भी प्रभावित होती है। मैदा और ट्रांसफैट के कारण बच्चों की सेहत को प्रभावित कर रही है।
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- अजीनोमोटो से स्वाद कलिकाएं हो रहीं प्रभावित
आस्था नर्सिंग अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव तोमर के अनुसार जीभ की ऊपरी सतह पर लाल दाने के रूप में स्वाद कलिकाएं होती हैं। लार के जरिये ये खट्टा, मीठा, कड़वा और नमकीन स्वाद बतातीं हैं। जंक फूड में अजीनोमोटो समेत अन्य रसायन होते हैं, इनके खाने, पीने से जीभ में इनके प्रति नया स्वाद पनपता है। ऐसी स्थिति में बच्चों को दाल, हरी सब्जी समेत पौष्टिक आहार अच्छा नहीं लगता।
- ये बोली मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष
दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज की मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अंशु अग्रवाल के मुताबिक बच्चों को जब पसंदीदा फास्ट फूड नहीं मिलते तो उनमें गुस्सा करना, खाना फेंक देना, सामान फेंकना, जोर-जोर से चिल्लाना जैसे विकार पनपने लगते हैं। ऐसा होने पर परिजन फास्ट फूड उपलब्ध करा देते हैं। इससे बच्चे में विकार और बढ़ जाते हैं। इसलिए अभिभावकों को बच्चों को मारने-पीटने की बजाए जंक-फूड से होने वाली बीमारी के बारे में बताना चाहिए।
- दवाइयाें पर हो रहे छह लाख रुपये खर्च
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र पंवार ने अनुसार जनपद में 280 रिटेल व 80 होल सेल मेडिकल स्टोर है। जिन पर पिछले छह माह में जंक फूड खाने से बच्चों में होने वाली बीमारी से संबंधित ऑक्टेरोटाइड, फोलिक एसिड, मेट्रोनिडाजोल सहित बच्चों से संबंधित अन्य दवाईयों की खपत बढ़ गई है। अभिभावकों को जंक फूड से बच्चों में होने वाली बीमारियों की दवाइयां हर माह लगभग छह लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।