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34 साल में सभासद से मंत्री बने केपी मलिक, आजतक कोई चुनाव नहीं हारे
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मंत्री बने बड़ौत विधायक केपी मलिक आज तक कोई चुनाव नहीं हारे
बड़ौत पालिका में सबसे पहले बने सभासद, इसके बाद से जारी है राजनीतिक यात्रा
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। बड़ौत से भाजपा विधायक केपी मलिक ने 34 साल के राजनीतिक कॅरिअर में नगर पालिका के सभासद से मंत्री तक का सफर तय किया है। शामली के कुड़ाना गांव निवासी केपी मलिक के पिता विशंभर सिंह मलिक काफी समय तक सहकारिता विभाग में रहे। उन्होंने बड़ौत में घर बना लिया था।
केपी मलिक ने वर्ष 1988 में बड़ौत में सबसे पहले नगर पालिका परिषद के सभासद का चुनाव लड़ा था। इसके बाद वह वर्ष 1990 में पालिका के चेयरमैन बने। वर्ष 1996 में केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के उत्तरी परिक्षेत्र के निदेशक नामित हुए। वर्ष 1999 में उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक के मेरठ व सहारनपुर मंडल के निदेशक बने। वर्ष 2004 में मेरठ-बागपत सीट से एमएलसी बने। वह वर्ष 2012 में नगर पालिका बड़ौत के दोबारा चेयरमैन चुने गए। इसके बाद वर्ष 2017 में बड़ौत विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बने। वर्ष 2020 में उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक लखनऊ के उपसभापति बनाए गए। अब वर्ष 2022 में दोबारा विधायक बनने पर मंत्री बनाया गया। इस तरह से केपी मलिक 61 साल की उम्र में 34 साल का राजनीतिक सफर तय करते हुए मंत्री पद तक पहुंच गए। केपी मलिक आज तक कोई चुनाव नहीं हारे हैं। केपी मलिक दसवीं पास हैं और उनके पास खेती के अतिरिक्त कई व्यवसाय हैं। जिनके सहारे वे करोड़पति हैं। केपी मलिक के मंत्री बनाए जाने से परिवार के लोग काफी खुश हैं।
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बड़ौत पालिका में सबसे पहले बने सभासद, इसके बाद से जारी है राजनीतिक यात्रा
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। बड़ौत से भाजपा विधायक केपी मलिक ने 34 साल के राजनीतिक कॅरिअर में नगर पालिका के सभासद से मंत्री तक का सफर तय किया है। शामली के कुड़ाना गांव निवासी केपी मलिक के पिता विशंभर सिंह मलिक काफी समय तक सहकारिता विभाग में रहे। उन्होंने बड़ौत में घर बना लिया था।
केपी मलिक ने वर्ष 1988 में बड़ौत में सबसे पहले नगर पालिका परिषद के सभासद का चुनाव लड़ा था। इसके बाद वह वर्ष 1990 में पालिका के चेयरमैन बने। वर्ष 1996 में केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के उत्तरी परिक्षेत्र के निदेशक नामित हुए। वर्ष 1999 में उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक के मेरठ व सहारनपुर मंडल के निदेशक बने। वर्ष 2004 में मेरठ-बागपत सीट से एमएलसी बने। वह वर्ष 2012 में नगर पालिका बड़ौत के दोबारा चेयरमैन चुने गए। इसके बाद वर्ष 2017 में बड़ौत विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बने। वर्ष 2020 में उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक लखनऊ के उपसभापति बनाए गए। अब वर्ष 2022 में दोबारा विधायक बनने पर मंत्री बनाया गया। इस तरह से केपी मलिक 61 साल की उम्र में 34 साल का राजनीतिक सफर तय करते हुए मंत्री पद तक पहुंच गए। केपी मलिक आज तक कोई चुनाव नहीं हारे हैं। केपी मलिक दसवीं पास हैं और उनके पास खेती के अतिरिक्त कई व्यवसाय हैं। जिनके सहारे वे करोड़पति हैं। केपी मलिक के मंत्री बनाए जाने से परिवार के लोग काफी खुश हैं।
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