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....ऐसा कॉलेज, जहां जमीन पर बिछी टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ती है बेटियां

Fri, 27 Aug 2021 10:56 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 27 Aug 2021 10:56 PM IST
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In six years, only 67 girl students were reduced
बड़ौत। शिक्षा व्यवस्था सुधारने के तमाम दावों के बीच शासन हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है। इसके बावजूद जनपद का एक ऐसा कॉलेज भी है, जहां बेटियां टाट-पट्टी पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। यह स्थिति तब है जब प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे का दंभ भर रहे हैं। यहां कुछ वर्षों में छात्राओं की संख्या घटकर महज 67 रह गई है।
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यह हाल तुगाना गांव स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज का है। विभागीय रिकार्ड के अनुसार कॉलेज में फिलहाल महज 67 छात्राएं हैं। जिन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी प्रधानाचार्या गीता शर्मा समेत पांच शिक्षिकाओं पर है। छह साल पहले इस कॉलेज में तुगाना, लूंब, किरठल, टांडा समेत अन्य गांवों से तकरीबन 500 से अधिक छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने आती थीं। असुविधा व असुरक्षा के चलते इनकी संख्या घटकर महज 65 रह गई है। कॉलेज में बेटियों के लिए पेयजल व शौच की उचित व्यवस्था नहीं है। सरकारी हैंडपंप भी खराब है। परिसर में घास होने से जहरीले कीड़ों का डर रहता है।
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तीन कक्षाओं में छात्राएं नहीं
कॉलेज में जहां कुछ वर्ष पहले कक्षा छह, सात व आठ मेें 150 से अधिक छात्राएं थीं। वहीं, अब इनमें एक भी छात्रा पंजीकृत नहीं है।
असुरक्षा के चलते छोड़ रहीं कॉलेज
कॉलेज गांव से करीब डेढ़ किमी बाहर स्थित है। इसलिए छात्राएं जंगल के रास्ते कॉलेज आती हैं। कई बार उनसे छेड़छाड़ की घटनाएं हो चुकी हैं। चहारदीवारी न होने से असामाजिक तत्व परिसर में बैठकर शराब पीते हैं। वहीं, शाम होते ही बिल्डिंग में आवारा गोवंश बंद कर दिए जाते हैं।
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टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ना दूभर
छात्रा नेहा व मुस्कान का कहना है कि गर्मी व सर्दी में टाट पट्टी पर बैठना मुश्किल होता है। ऐसे में पढ़ाई पर केंद्रित नहीं हो पाती हैं। कई बार हीनभावना भी हावी हो जाती है।
स्वास्थ्य पर पड़ता है कुप्रभाव
सीएचसी अधीक्षक डॉ. विजय कुमार के अनुसार टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ने से स्वास्थ्य पर कुप्रभाव पड़ता है। कड़ाके की ठंड में छात्राओं के लिए इन पर बैठना मुश्किल होता है। वहीं, गर्मी में भी परेशानी होती है।

अव्यवस्थाएं हावी
प्रधानाचार्या गीता शर्मा का कहना है कि कॉलेज में चहारदीवारी और फर्नीचर नहीं है। शिक्षिकाओं व छात्राओं की सुरक्षा का अभाव है। इसके साथ अन्य अव्यवस्थाएं हावी हैं। इस संबंध में विभागीय अफसरों को अवगत कराया जा चुका है। (संवाद)
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