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Baghpat News: रमाला में नहीं किया जाता होलिका का दहन
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रमाला । बागपत का रमाला ऐसा गांव है, जहां होलिका का दहन नहीं किया जाता। ग्रामीणों का कहना है कि होलिका में जलकर गांव के दो बैलों की मौत हो गई थी, जिसके बाद ग्रामीणों ने गांव में होलिका दहन नहीं करने का निर्णय लिया था। उसके बाद से होलिका दहन नहीं करने की परंपरा लगातार चली आ रही है।
दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर बसा रमाला गांव अनोखी परंपरा का गवाह है। एक तरफ देशभर में होलिका दहन और होली गीतों की धूम मचती है, वहीं इस गांव में होलिका दहन नहीं किया जाता है। ग्रामीणों का कहना है गांव में होलिका का दहन न करने की करीब सौ साल पुरानी परंपरा है। गांव के लोग बैलों के होलिका में जलने से उनकी मौत हो जाने का कारण बताते है। आज भी गांव में इस परंपरा को निभाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि आग में गोवंश के जल जाने से गांव के लोग दुखी हो गए थे। ग्रामीणों ने फिर कभी भी होलिका का दहन न करने का फैसला लिया, जो बाद में गांव की परंपरा बन गया।
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-गांव में होली के दिन गांव में होलिका दहन नहीं किया जाता है, जबकि दुल्हैंडी जरूर बच्चे खेलते हैं। गांव में आज भी पुरानी परंपरा को निभाया जा रहा है। - पूर्व ग्राम प्रधान राजकुमार चौहान
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- गोवंश की मौत के शोक में गांव में होलिका दहन नहीं किया जाता है, लेकिन होली का त्योहार मनाया जाता है। लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर त्योहार मनाते हैं। - सतीश चौहान
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दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर बसा रमाला गांव अनोखी परंपरा का गवाह है। एक तरफ देशभर में होलिका दहन और होली गीतों की धूम मचती है, वहीं इस गांव में होलिका दहन नहीं किया जाता है। ग्रामीणों का कहना है गांव में होलिका का दहन न करने की करीब सौ साल पुरानी परंपरा है। गांव के लोग बैलों के होलिका में जलने से उनकी मौत हो जाने का कारण बताते है। आज भी गांव में इस परंपरा को निभाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि आग में गोवंश के जल जाने से गांव के लोग दुखी हो गए थे। ग्रामीणों ने फिर कभी भी होलिका का दहन न करने का फैसला लिया, जो बाद में गांव की परंपरा बन गया।
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-गांव में होली के दिन गांव में होलिका दहन नहीं किया जाता है, जबकि दुल्हैंडी जरूर बच्चे खेलते हैं। गांव में आज भी पुरानी परंपरा को निभाया जा रहा है। - पूर्व ग्राम प्रधान राजकुमार चौहान
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- गोवंश की मौत के शोक में गांव में होलिका दहन नहीं किया जाता है, लेकिन होली का त्योहार मनाया जाता है। लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर त्योहार मनाते हैं। - सतीश चौहान