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गुलामी की मानसिकता से उबारने में हिंदी ही सक्षम

Tue, 07 Sep 2021 10:29 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Sep 2021 10:29 PM IST
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Hindi is capable of getting rid of the mentality of slavery
पूजा तोमर। - फोटो : BARAUT
हिंदी है हम
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बड़ौत। अमर उजाला फाउंडेशन के ‘हिंदी हैं हम’ कार्यक्रम के तहत मंगलवार को जेपी पब्लिक स्कूल में हिंदी की महत्ता पर शिक्षकों और छात्राओं ने व्याख्यान दिए। इसमें वक्ताओं कहा आजादी के 75 साल बाद भी देश में गुलामी की मानसिकता हावी है, इस मानसिकता से उबारने में हिंदी ही सक्षम है।
जेपी पब्लिक स्कूल मेें आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल की निर्देशक शरण शर्मा, डायरेक्टर गौरव शर्मा, अभिषेक शर्मा व दीपा चौहान ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। निदेशक शरण शर्मा ने कहा कि हिंदी हमारी मातृ और राष्ट्रभाषा है, लेकिन आज भी कुछ लोग हिंदी के बजाय अंग्रेजी बोलने में अपनी शान समझते हैं। हम अधिक से अधिक हिंदी बोलनी चाहिए। गौरव शर्मा ने कहा कि हिंदी भाषा को सम्मान दिलाने के लिए आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह भारतेंदु हरिश्चंद्र का बेहद योगदान रहा है। उन्होंने अपनी पत्रिकाओं के माध्यम से हिंदी भाषा की काफी सेवा की। अभिषेक शर्मा ने कहा हमारा कर्तव्य है कि हिंदी को आगे बढ़ाएं। हिंदी को हमें उपेक्षित होने से बचाना होगा। दीपा चौहान ने कहा कि दक्षिण भारत से लेकर देशभर में हिंदी भाषा के सम्मान के लिए अलख जगानी होगी। हमें हिंदी के महान साहित्यकार प्रसाद, पंत, निराला और अज्ञेय आदि की परंपरा को आगे बढ़ाना होगा।
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ये बोली छात्राए----
प्रतियोगिता परीक्षा में हिंदी शामिल करने की जरूरत
अदिति माथुर का कहना है कि समाज में लोगों को हिंदी भाषा के प्रति जागरूक करने के लिए इस तरह के कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए। हिंदी भाषा को बड़ी प्रतियोगिता परीक्षाओं में अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। इसके लिए समाज के सभी लोगों को आगे आना होगा।
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हिंदी को बढ़ावा देने के लिए आगे आएं
पूजा तोमर का कहना है कि हिंदी हमारी मातृ और राष्ट्रभाषा दोनों है। इसलिए हमारा नैतिक कर्तव्य बनता है कि हिंदी को बढ़ावा देने के लिए आगे आएं।
हिंदी के बढ़ाने को संयुक्त प्रयास की जरूरत
हिमांशी ने कहा कि देश में अभी कई जगहों पर हिंदी के बजाय अंग्रेजी में बोलना लोग अपनी शान समझते हैं। जिस कारण हिंदी भाषा की उपेक्षा हो रही है। हिंदी भाषा के बढ़ाने के लिए सभी लोगों को संयुक्त प्रयास करने होंगे।
हिंदी को रोजगार से जोड़ने की जरूरत
कीर्ति ने कहा कि लोगों को इस मानसिकता से उबारने के लिए हिंदी को अनिवार्य रूप से रोजगार से जोड़ने की जरूरत है। हिंदी हैं हम अभियान जैसे कार्यक्रम समय-समय पर होने चाहिए। तभी हिंदी को बढ़ावा मिल सकता है।

हिंदी हमारे गौरव का प्रतीक
तमन्ना चौधरी ने कहा कि हिंदी को राजकीय कामकाज की भाषा बनाया जाना चाहिए। हिंदी हमारे गौरव का प्रतीक है। सरकार दफ्तरों में भी अनिवार्यता के साथ हिंदी में ही काम करने की जरूरत है।
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