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बुढ़ाना में दोस्ताना, धनौरा में बनाया ठिकाना 

Tue, 25 Oct 2016 12:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Tue, 25 Oct 2016 12:16 AM IST
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 friendly in Budhana, home made Dhanaura
आरोपी सहदेव - फोटो : amar ujala
बागपत। सोनीपत के पंकज मान और धनौरा के सहदेव की मुलाकात डेढ़ साल पहले मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना में हुई थी। दोस्ती का ऐसा रंग चढ़ा कि पंकज मान का धनौरा में आना जाना शुरू हो गया। यहीं उसकी गांगनौली के पंकज राठी से मुलाकात हुई। यहीं से दोस्ती, दुश्मनी और कत्लोगारत की पूरी साजिश रची गई।
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हरियाणा का पवन पहलवान बुढ़ाना के एक वकील का क्लाइंट है। करीब डेढ़ साल पहले सोनीपत का पंकज मान भी पवन के साथ बुढ़ाना पहुंचा, यहां उसकी मुलाकात धनौरा गांव के सहदेव से हुई। इसके बाद मुलाकातों का सिलसिला चल निकला। आए दिन पंकज मान धनौरा में दिखता था। सहदेव धनौरा और सविता के बेटे पंकज गांगनौली की पहले से ही मित्रता थी। धनौरा में ही पंकज मान और पंकज राठी की मुलाकात हुई। इन सबका गांगनौली भी आना जाना शुरू हो गया। सविता सोनीपत के पंकज मान को बेटे की तरह मानने लगी थी।
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पिस्टल खरीदते ही पड़ी दुश्मनी की नींव
बागपत। पुलिस की मानें तो पंकज मान ने सहदेव धनौरा से 60 हजार रुपये में पिस्टल खरीदी थी। पंकज मान का तर्क था कि हरियाणा में उसके परिवार की लड़की के साथ किसी ने छेड़छाड़ की है, इसका उसे बदला लेना था। जिससे बदला लेना था, वह व्यक्ति गोवा चला गया। इस पर पंकज मान ने सहदेव को पिस्टल वापस कर दिया, लेकिन  सहदेव ने उसके 60 हजार रुपये नहीं लौटाए। पंकज गांगनौली, सविता और योगेश रठौड़ा ने भी सहदेव को रुपये लौटाने के लिए बार-बार कहा। एसपी पूनम ने बताया सविता ने पंकज मान के पक्ष में सहदेव धनौरा पर रुपये ठगने का आरोप लगाकर सीओ बड़ौत को शिकायती पत्र भी दिया था। यहीं से इनके मन में खटास शुरू हो गई। 
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सहदेव धनौरा ने दिया था आइडिया
बागपत। पुलिस ने बताया  पंकज मान ने प्रेमिका के परिवार को मौत के घाट उतारने के लिए असलाह की जरूरत बताई। इस पर सहदेव धनौरा ने उसे सिपाहियों की हत्या और असलाह लूटने का आइडिया दिया। पंकज मान ने पुलिस को बताया सहदेव का कहना था कि एसएलआर उसे ले जानी थी और सविता की लाइसेंसी रायफल सहदेव धनौरा को देने की योजना बनाई। साथ ही पंकज को रुपये भी देने का वादा किया। पूरे केस में प्रवीण गैंग को फंसाने को भी योजना में शामिल किया। इस योजना के बाद पंकज ने हरीश को पूरे मामले में शामिल किया।


दस दिन पहले की थी रेकी
बागपत। पंकज मान का गांगनौली में आना जाना था, लेकिन हरीश अंजान था। इसलिए वारदात से 10 दिन पहले पंकज अपने दोस्त हरीश को लेकर यहां पहुंचा और सारे रास्ते दिखाए। इस रेकी के बाद ही वह वारदात में शामिल हुआ।
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