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EXclusive: अधिकारियों के पास गन न धन, कैसे बचे 'जन', खूंखार जानवरों के आगे नतमस्तक है वन विभाग

Tue, 13 Dec 2022 03:42 PM IST
Dimple Sirohi मुकेश पंवार, अमर उजाला, बड़ौत/बागपत
मुकेश पंवार, अमर उजाला, बड़ौत/बागपत Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 13 Dec 2022 03:42 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश में वन विभाग के पास संसाधनों की इस कदर कमी है कि इसका खामियाजा वन्य जीवों को भुगतना पड़ रहा है। विभाग के पास न तो गन है और न ही धन। ऐसे में वन्य जीवों का बचाना महंगा सौदा साबित हो रहा है। हाल ही में बड़ौत में कुएं में तेंदुआ गिरा तो विभाग की हकीकत खुल गई। 

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Forest department has neither gun nor other resources to catch the dreaded animals
leopard - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आधुनिक युग में भी वन विभाग संसाधन की कमी का रोना रो रहा है। विभाग के पास न गन है और न ही धन, ऐसे में न तो वह वन्यजीव बचा पा रहा है और न ही आए दिन किसानों व ग्रामीणों पर हो रहे हमले रोक पा रहा है। लालफीताशाही में यह विभाग चल रहा है, जिस कारण पिछले कुछ वर्षों में कई तेंदुए बेमौत अपनी जान गंवा चुके हैं।  

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विभागीय रिकार्ड के अनुसार जनपद बागपत में मात्र छह वन रक्षक हैं, जबकि 15 वन रक्षकों की आवश्यकता है। बात यदि वन दरोगा की करें तो मात्र आठ वन दरोगा हैं, जबकि जरूरत 14 वन दरोगा की है। इसके अलावा जनपद में दो वन क्षेत्राधिकारी सहित एक डीएफओ है। अब यदि संसाधन की बात करें तो तेंदुए जैसे खूंखार जानवर की सूचना मिलने पर आज भी वन विभाग लाठी-डंडे लेकर ही दौड़ता है। उसके पास मात्र एक पिंजरा है, जो काफी जर्जर है। आवश्यकता पड़ने पर मेरठ, सरधना या हस्तिनापुर से ही पिंजरा मंगाना पड़ता है। इसके अलावा तेंदुए जैसे जानवर को बेहोश करने के लिए गन तक उपलब्ध नहीं है। यहीं कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में कई तेंदुए बेमौत अपनी जान गंवा चुके हैं। 

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Forest department has neither gun nor other resources to catch the dreaded animals
तेंदुए का रेस्क्यू - फोटो : अमर उजाला
केस नंबर-एक
- नौ जनवरी 2021 को बड़ौत में दिल्ली-सहारनपुर रेलवे लाइन पर बावली अंडरपास के पास डेढ़ साल के मादा तेंदुए की मौत हो गई थी। तेंदुए की मौत की अब तक जांच चल रही है।
 
केस नंबर-दो
- 15 दिसंबर 2020 को बरनावा वन क्षेत्र के शाहपुर बाणगंगा गांव के जंगल में तेंदुए को मौत के घाट उतार दिया गया था। तेंदुए के सिर पर कई प्रहार किए गए थे। मगर, अभी शिकारी नहीं पकड़े गए।

केस नंबर-तीन
- 23 अक्तूबर 2018 को ककौरकलां गांव में भी शिकारियों की ओर से लगाए गए खटके में तेंदुआ फंस गया था। वन विभाग की देरी के कारण तेंदुए की मौत हो गई थी।

केस नंबर-चार
- निरपुड़ा और हिसावदा गांव में तेंदुए को मौत के घाट उतार दिया गया था। वर्ष 2002 में पुसार गांव में भी ग्रामीणों द्वारा तेंदुए को मौत के घाट उतार दिया गया था।

मिलन के समय निकलते हैं जंगल से बाहर
वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस खुशारिया ने मुताबिक दहशरा, दीपावली से शुरू हुए मिलन की प्रक्रिया के तहत तेंदुआ जंगल से बाहर निकलता है और होली तक उनके मिलन की प्रक्रिया चलती है। तेंदुआ बहुत ही शर्मिला जानवर होता है।

20 फुट लंबी व 15 फुट ऊंची लगाता है छलांग
वन क्षेत्राधिकारी रविकांत के अनुसार तेंदुआ 20 फुट लंबी और 15 फुट की ऊंची छलांग लगा सकता है। वह खरगोश, शेह, कुत्ता आदि खाना पसंद है।
 
यह बात सहीं है कि विभाग स्टाफ की कमी व संसाधन से जूझ रहा है, इस संबंध में कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, हमारी कोशिश प्रत्येक वन्यजीव को बचाने की रहती है।  - हेमंत सेठ, डीएफओ 

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