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Baghpat News: 66 गांवों में 25 करोड़ के कार्यों की फाइलें गायब, मुकदमा दर्ज होगा
Sat, 20 Jul 2024 05:54 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Sat, 20 Jul 2024 05:54 AM IST
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बागपत। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 66 गांव में कराए गए 25 करोड़ रुपये के कार्यों में घपले के आरोप लगे तो उनकी फाइलें गायब कर दी गईं। आरोप है कि बजट खर्च करने के बाद भी कार्य नहीं कराए गए। इसकी जांच कराने के आदेश हुए, मगर अवर अभियंताओं को फाइलें नहीं मिलीं तो जांच से मना कर दिया। अब फाइल गायब होने पर जिम्मेदारों पर मुकदमा दर्ज कराने के आदेश सीडीओ ने दिए हैं।
स्वच्छ भारत मिशन फेज-टू के तहत गांवों को ओडीएफ प्लस बनाने के लिए वर्ष 2022-23 में 66 गांवों का चयन किया गया था और इनमें 25 करोड़ से ज्यादा रुपये का बजट जारी किया था। इससे गांवों में खाद के गड्ढे, आरसीसी सेंटर, शॉकपिट, पानी निकासी की नाली, नाले, कूड़ा एकत्र करने को ई-रिक्शा खरीदने समेत अन्य कार्य कराए जाने थे। स्वच्छ भारत मिशन फेज-टू के तहत बजट खर्च कर दिया गया है, लेकिन इनमें कई गांवों में विकास कार्य तक नहीं कराए गए।
इसमें पहले भी जिला विकास एवं निगरानी समिति की बैठक में सांसद व अन्य जन प्रतिनिधियों ने घोटाले का आरोप लगाया था। इसके बाद डीएम के आदेश पर अवर अभियंता को जांच सौंपी गई थी। अवर अभियंताओं ने फाइल नहीं मिलने पर जांच करने से मना कर दिया था और इसमें किसी तरह की जांच नहीं हो सकी। मगर यह मामला अब फिर से तूल पकड़ गया है।
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- सचिवों ने अवर अभियंताओं को नहीं दिए थे दस्तावेज
66 गांवों के घपले की जांच करने के लिए प्रधानों व सचिवों ने अवर अभियंताओं को दस्तावेज देने से इंकार कर दिया था। वह काफी दिन तक अधिकारियों से गुहार लगाते रहे, लेकिन जब प्रधानों व सचिवों ने सहयोग करने से मना कर दिया था। इसकी वजह से अवर अभियंता ने जांच करने से हाथ खड़े कर दिए थे और लिखकर दिया कि वह जांच के लिए योग्य नहीं है। किसी जिला स्तरीय अधिकारी को लगाया जाए।
- सीडीओ ने लिखा तीन बार पत्र, अब मुकदमे के आदेश
सीडीओ नीरज कुमार श्रीवास्तव ने 66 गांव में हुए घपलों की जांच करने के लिए तीन बार पत्र लिखा, फिर भी डीपीआरओ ने जांच समिति तक नहीं बनाई। उन्होंने एक बार फिर डीपीआरओ को 66 गांव के घपलों की जांच करने के लिए फाइल कार्यालय में भेजने के आदेश दिए। इसके साथ ही आदेश दिया गया कि अगर फाइल नहीं मिलती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाए।
- वर्जन : स्वच्छ भारत मिशन के तहत 66 गांवों में घपले के आरोपों की कोई जानकारी नहीं है। ओडीएफ की जो फाइल है, वह अलमारी में रखी हो सकती है। जिला समन्वयक का निधन होने के कारण अलमारी का ताला लगा हुआ है। सोमवार को मृतक कर्मचारी के परिजनों को चाबी लेकर बुलाया है और इसके बाद फाइलों के बारे में कुछ कहा जा सकता है।-- अरुण अत्री, डीपीआरओ
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स्वच्छ भारत मिशन फेज-टू के तहत गांवों को ओडीएफ प्लस बनाने के लिए वर्ष 2022-23 में 66 गांवों का चयन किया गया था और इनमें 25 करोड़ से ज्यादा रुपये का बजट जारी किया था। इससे गांवों में खाद के गड्ढे, आरसीसी सेंटर, शॉकपिट, पानी निकासी की नाली, नाले, कूड़ा एकत्र करने को ई-रिक्शा खरीदने समेत अन्य कार्य कराए जाने थे। स्वच्छ भारत मिशन फेज-टू के तहत बजट खर्च कर दिया गया है, लेकिन इनमें कई गांवों में विकास कार्य तक नहीं कराए गए।
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इसमें पहले भी जिला विकास एवं निगरानी समिति की बैठक में सांसद व अन्य जन प्रतिनिधियों ने घोटाले का आरोप लगाया था। इसके बाद डीएम के आदेश पर अवर अभियंता को जांच सौंपी गई थी। अवर अभियंताओं ने फाइल नहीं मिलने पर जांच करने से मना कर दिया था और इसमें किसी तरह की जांच नहीं हो सकी। मगर यह मामला अब फिर से तूल पकड़ गया है।
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- सचिवों ने अवर अभियंताओं को नहीं दिए थे दस्तावेज
66 गांवों के घपले की जांच करने के लिए प्रधानों व सचिवों ने अवर अभियंताओं को दस्तावेज देने से इंकार कर दिया था। वह काफी दिन तक अधिकारियों से गुहार लगाते रहे, लेकिन जब प्रधानों व सचिवों ने सहयोग करने से मना कर दिया था। इसकी वजह से अवर अभियंता ने जांच करने से हाथ खड़े कर दिए थे और लिखकर दिया कि वह जांच के लिए योग्य नहीं है। किसी जिला स्तरीय अधिकारी को लगाया जाए।
- सीडीओ ने लिखा तीन बार पत्र, अब मुकदमे के आदेश
सीडीओ नीरज कुमार श्रीवास्तव ने 66 गांव में हुए घपलों की जांच करने के लिए तीन बार पत्र लिखा, फिर भी डीपीआरओ ने जांच समिति तक नहीं बनाई। उन्होंने एक बार फिर डीपीआरओ को 66 गांव के घपलों की जांच करने के लिए फाइल कार्यालय में भेजने के आदेश दिए। इसके साथ ही आदेश दिया गया कि अगर फाइल नहीं मिलती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाए।
- वर्जन : स्वच्छ भारत मिशन के तहत 66 गांवों में घपले के आरोपों की कोई जानकारी नहीं है। ओडीएफ की जो फाइल है, वह अलमारी में रखी हो सकती है। जिला समन्वयक का निधन होने के कारण अलमारी का ताला लगा हुआ है। सोमवार को मृतक कर्मचारी के परिजनों को चाबी लेकर बुलाया है और इसके बाद फाइलों के बारे में कुछ कहा जा सकता है।